Class 9 · HindiNCERT 2026 Revised Syllabus
Chapter 1: दो बैलों की कथा (0901CH01)
R1 and R2 book- Ganga
प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी — स्वामिभक्त बैल हीरा-मोती की गाथा, जो स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष का प्रतीक है।
Chapter code: 0901ch01 · Book: R1 and R2 book- Ganga · Class 9 Hindi
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रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क(6 questions)
1
कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है? (क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता (ख) एकता और सहयोग (ग) गर्व और दंभ (घ) विद्रोह और क्रोध
उत्तर:
(ख) एकता और सहयोग।क्यों – यही दोनों गुण उनके व्यवहार में दिखाई देते हैं।
2
हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया? (क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया। (ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया। (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा। (घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
उत्तर:
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
3
बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया? (क) कष्टों से बचने के लिए (ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए (ग) अभिमान की रक्षा के लिए (घ) अपनापन पाने के लिए
उत्तर:
(घ) अपनापन पाने के लिए
4
गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है? (क) स्वाभिमान (ख) अहिंसा (ग) पराधीनता (घ) अन्याय की रक्षा
उत्तर:
(क) स्वाभिमान
5
कहानी में बैलों की 'मूक-भाषा' का प्रयोग लेखक ने किसलिए किया? (क) कहानी को रोचक बनाने के लिए (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए (ग) संवादों को छोटा रखने के लिए (घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
उत्तर:
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए।क्यों – यह कहानी प्रतीकात्मक है। लेखक हीरा-मोती के माध्यम से परतंत्र भारत की दशा दिखाना चाहता है!
6
'दो बैलों की कथा' को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं? (क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के (ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के (ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
उत्तर:
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के।क्यों – वे दोनों संघर्ष करना नहीं छोड़ते।
मेरी समझ मेरे विचार(6 questions)
1
"दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
उत्तर:
हीरा और मोती स्वामिभक्त बैल थे। वे यह सहन नहीं कर सके कि उनके मालिक ने उन्हें बेच दिया। इस उदासी में वे नए मालिक गया के साथ रच-बस नहीं सके। उन्होंने हल में जुतने से इन्कार कर दिया।
2
"गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।" बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे? (संकेत – वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
उत्तर:
गाँवों में पशु-प्रेम के ऐसे किस्से होते रहते हैं। हीरा और मोती भी स्वामिभक्त बैल थे। उन्हें अपने मालिक झूरी से असीम प्रेम था। इस कारण वे गया के घर से पगहे तुड़वाकर वापस लौट आए। वे हर हाल में अपने स्वामी के पास रहना चाहते थे।
3
"मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!" 'कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है' इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
गया ने हीरा और मोती दोनों को जबरदस्ती बाँध लिया। बैलों के साथ सख्ती भी करता और उन्हें भूसा भी सूखा डालता। इससे बैलों के मन में प्रबल विद्रोह जाग उठा। वे उसे मज़ा चखाने की बात सोचते। किंतु अपनी दशा देखकर चुप रह जाते थे। मोती अधिक उग्र था। उससे यह सब अन्याय सहन नहीं होता था। अतः उसने हीरा को कहा- अब तो मुक्ति के लिए संघर्ष करना ही पड़ेगा। हर निराश, दलित, पीड़ित व्यक्ति के मन में ऐसा विद्रोह उठता है। यह उचित भी है।
4
"जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…" हीरा एवं मोती 'स्वतंत्रता' और 'अपनापन' दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
उत्तर:
हीरा और मोती में 'अपनापन' अधिक था। जब तक उन्हें झूरी या बालिका से अपनापन मिला, वे कभी नहीं झगड़े। वे बड़े प्रेम से बँधे रहे। उन्हें प्रेम का बंधन स्वीकार था। परंतु जब प्रेम मिलना समाप्त हो गया तो वे स्वतंत्र होने के लिए व्याकुल हो उठे। वे विद्रोही हो गए।
5
"बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" 'अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है' – क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तर:
किसी के आदेश को जबरदस्ती मानना; अपने मालिक की दुत्कार सहना, अत्याचार और डंडे सहना सरासर अन्याय है। इसका विरोध करना हर मानव का धर्म है।कारण – यदि अत्याचार सहन करके भी स्वामी को खुश करते रहे तो वह कभी सम्मान नहीं करेगा। उसका अत्याचार और अधिक बढ़ेगा।
6
"बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।" हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम-से-कम तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर:
इस कहानी में अनेक घटनाएँ ऐसी हैं जिनसे पता चलता है कि मोती और हीरा में गहरी दोस्ती थी।पहली घटना – दोनों एक साथ गाड़ी में जोते जाते थे तो यह कोशिश करते थे कि गाड़ी का अधिक भार दूसरे साथी के कंधे पर न आकर उसके अपने कंधे पर आए।दूसरी घटना – गया ने हीरा के नाक पर डंडा मारा तो मोती से सहा न गया। वह हल, रस्सी, जुआ, जोत सब लेकर भाग पड़ा। उससे हीरा का कष्ट देखा न गया।तीसरी घटना – जब मटर के खेत में मटर खाकर दोनों मस्त हो रहे तो वे सींग मिलाकर एक-दूसरे को ठेलने लगे। अचानक मोती को लगा कि हीरा क्रोध में आ गया है तो वह पीछे हट गया। उसने दोस्ती को दुश्मनी में बदलने से रोक लिया।चौथी घटना – जब उनके सामने विशालकाय साँड आ खड़ा हुआ तो उन्होंने योजनापूर्वक एक-दूसरे का साथ देते हुए उसका मुकाबला किया। साँड एक पर चोट करता तो दूसरा उसकी देह में अपने नुकीले सींग चुभा देता। आखिरकार साँड बेदम होकर गिर पड़ा।
मेरी कल्पना मेरे अनुमान(2 questions)
1
"उसने उनके माथे सहलाए और बोली- खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…" यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
उत्तर:
यदि मैं छोटी लड़की की जगह होता तो मैं भी हीरा और मोती की पीड़ा देखकर पिघल जाता। उन्हें नरम चारा खिलाता। परंतु क्या मैं उन्हें मुक्त करवाने के लिए उनकी रस्सी खोल देता यह कह नहीं सकता। सोचना अलग बात है और करना अलग।
2
"दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।" भय और संकोच इन्सान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
यह बात सही है कि लोग भय और संकोच की जंजीरों से बँधे रहते हैं। वे गुलामी के आदी हो चुके होते हैं। वे मुक्त होने की तो बात दूर, मुक्त रहने की भी नहीं सोचते। उनकी हालत काँजीहौस के लाचार गधों जैसी हो चुकी होती है, जिन पर कभी उल्लास नहीं आता। मेरे ऐसे कई मित्र हैं जो अपने बॉस या मम्मी-पापा के नाम से ही इतना डरते हैं मानो कोई ट्रंप उनकी बातें सुन रहा हो और उनके लिए बम तैयार कर रहा हो।
मेरे अनुभव मेरे विचार(3 questions)
1
"दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।" क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
उत्तर:
यह बात बिल्कुल ठीक है कि सच्ची दोस्ती में उमंग होती है। उसमें खुशी का झरना बहता है। दोनों मित्र एक-दूसरे से मिलकर ऐसे उफनते हैं मानो सोडावाटर में नमक मिला दिया हो। सच्चे दोस्त आपस में मिलकर कूकते हैं, उछलते हैं, हँसते हैं, नाचते हैं; तरंगित होते हैं। जिन मित्रों में यह नहीं होता, जो केवल शांति से हाथ मिलाकर दूर बैठ जाते हैं। कभी किसी से गले नहीं मिलते, आपस में धौल धप्पा या प्यार-भरा आलिंगन नहीं करते। वे फुस्स बम होते हैं। उनका होना-न-होना बराबर है।
2
"हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।" आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं- हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
उत्तर:
मैं स्वभाव से शांतिप्रिय हूँ। मैं किसी पर अत्याचार नहीं करता। कोई मेरे साथ गलत व्यवहार करता है तो भी मैं शांत रहता हूँ। अगर कोई दुष्टता करके मुझसे क्षमा माँग ले तो क्षमा कर देता हूँ। इस मामले में मैं हीरा जैसा हूँ। सचमुच हीरा हूँ। परंतु सहन करने की एक सीमा होती है। यदि कोई बार-बार समझाने और क्षमा करने पर और उद्दंड होता चला जाए तो फिर मैं उसे जमीन से उखड़े हुए पौधे की तरह उखाड़ कर फेंक देता हूँ। फिर मैं उस पर कोई दया नहीं दिखाता।
3
"हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?" क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
उत्तर:
मैंने सदा अपने मित्र के साथ मित्रता निभाई है। यदि मित्र किसी विपत्ति में पड़ जाए तो उसके साथ खड़ी रही हूँ। मुझे याद है, मैं इंटरव्यू देने जा रही थी। रास्ते में मेरी मित्र दुर्घटना में घायल हो गई। मेरी वार्षिक परीक्षा थी। अगले साल कॉलेज में प्रवेश लेना था। परीक्षा मेरे सिर पर सवार थी। परंतु मित्र नेहा का फूटा हुआ सिर और निकलता हुआ खून देखा न गया। मैंने टैक्सी रुकवाई और उसका इलाज करवाने के लिए हस्पताल ले गई। इस कारण मैं परीक्षा न दे सकी। परंतु मुझे इसका अफसोस न तब था, न आज है। मुझे लगा, मेरी इन्सानियत अभी जीवित है।
विधा से संवाद — कहानी की पड़ताल(1 questions)
1
कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं। कोई कहानी वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है और इसमें वास्तविक या काल्पनिक पात्र भी शामिल हो सकते हैं।आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए-
उत्तर:
शीर्षक और लेखक – कोरोना का डॉक्टर – डॉ. अशोक बत्राविषय – परोपकार की महिमा।क्रिया / कार्य – कोरोना के कारण डॉ. संदीप पिछले एक सप्ताह तक हस्पताल में थे। दिन-रात एक ही काम था – मरते हुए मरीजों की देखभाल करना। सप्ताह बाद घर गए। सोचा मेरा मकान मालिक मेरी आरती उतारेगा। पड़ोसी मेरा अभिनंदन करेंगे।घर में ताला था। घंटी बजाने पर ऊपर की मंजिल से मकान मालिक ने हाथ जोड़े-बोले- डॉक्टर साहब! मैं आपको घर आने की इजाजत नहीं दे सकता। मैं भी बाल-बच्चों वाला इन्सान हूँ। कृपा करके, आप कहीं और चले जाएँ।डॉक्टर ठगा-सा रह गया। वह मानो आसमान से गिरा। सोचा- अगर यह लाला हस्पताल आ जाए तो डॉक्टर ने ऊपर आकाश की ओर देखा मानो भगवान से कुछ कह रहा हो। परंतु तभी सामने से दो युवक आए। बोले- डॉक्टर साहब! नमस्कार! – हम हैं आपके पड़ोसी। उन्होंने डॉक्टर के पाँव छू लिए। बोले- आपका हमारे घर में स्वागत है। हम आपका ध्यान अपने से भी बढ़कर करेंगे। जो सबका ध्यान रखता है, उसके साथ यह व्यवहार! लाला ने गर्दन झुका ली।परिवेश / देशकाल और मुख्य विचार – महामारी का भय। अपने भी पराए हुए।चरित्र / पात्र – मकान-मालिक हृदयहीन, क्रूर; डॉक्टर-नरमदिल, परोपकारी।परिणाम – डॉक्टर की निराशा – परंतु एक और आशा।
कहानी का सौंदर्य(1 questions)
1
"दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोनों की पूँछें खड़ी हो गई।"इस वाक्य को पढ़कर आँखों के सामने एक दृश्य-सा बन जाता है। आप जानते हैं कि भाषा की इस विशेषता को चित्रात्मकता कहते हैं। 'दो बैलों की कथा' कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे अद्भुत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं।नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी कहानी को पढ़कर चित्रात्मकता के उदाहरणों की तालिका स्वयं पूरी करें। (दिए गए उदाहरण — चित्रात्मकता: "दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोनों की पूँछें खड़ी हो गई।")
कहानी की रचना(1 questions)
1
प्राय: कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत / बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:
'दो बैलों की कथा' सांकेतिक कहानी है। इसमें बैलों के माध्यम से गुलाम भारत की पीड़ा को कहा गया है। इस भाव को प्रकट करने के लिए कहानीकार ने शुरू में ही बैल, गधा और 'बछिया का ताऊ' कहकर भारतीय लोगों को संबोधित किया है। फिर अमरीका, यूरोप आदि देशों की शक्ति दिखाकर यह संकेत दिया है कि सम्मान से जीने के लिए शक्तिशाली होना जरूरी है।प्रेमचंद अपने समय की गुलामी से व्यथित थे। यह कहानी लिखकर उन्होंने एक प्रकार से भारत की सोई हुई भोली-भाली और सीधी-सादी जनता को संदेश दिया है।
विषयों से संवाद — कहानी का समय और समाज(1 questions)
1
'दो बैलों की कथा' कहानी जिस समय लिखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन चल रहा था। उस समय भारतवासी भी अपने-अपने ढंग से इस अंग्रेजी शासन का विरोध कर रहे थे। इस कार्य में लेखक भी किसी से पीछे नहीं थे। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित कर रहे थे।इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए-कहानी में से वाक्य: 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके।स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव: 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जागी। 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
उत्तर:
सही मिलान इस प्रकार है:1. जोर तो मारता ही जाऊँगा… → 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। → 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता → 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। → 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया।5. इतना तो हो ही गया… दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। → 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जागी।
पशुओं के लिए कानून(3 questions)
1
बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तर:
बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय भी है और अन्याय भी।न्याय – आवारा पशुओं को कोई जीने नहीं देता। कोई उनके भोजन की चिंता नहीं करता, बीमारी की चिंता नहीं करता। आवारा पशुओं की देखभाल के लिए एक आश्रय स्थल बनाना उनके लिए न्याय है।अन्याय – काँजीहाउस में पशुओं को दयनीय दशा में रखा जाता है। उन्हें बाँधकर रखा जाता है। भूखा रखा जाता है। फिर पैसे की लालच में कसाईघरों को बेच दिया जाता है। यह उनके साथ सरासर अन्याय है।
2
यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
उत्तर:
बैलों के लिए मीलोंमील लंबे उपजाऊ मैदान हों। वहाँ खेत, हरियाली और घूमने की खुली आज़ादी हो। वहाँ उनके लिए चारे, चिकित्सा और प्रजनन की व्यवस्था हो। सभी आवारा पशुओं के लिए उनकी जरूरत के हिसाब से प्रबंध हो।
3
मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए। (संकेत- "थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम… है। हमारे साथ अन्याय हुआ है… ।")
उत्तर:
सेवा में,
पशुपतिनाथ भगवान विष्णुजी!
थानाध्यक्ष
स्वर्ग आश्रमविषय – बैलों के साथ अन्यायआदरणीय महोदय! हम हीरा और मोती बैल हैं। ब्रह्माजी ने हमें जन्म दिया है। आप विष्णु हैं। हमारे पालनहार हैं। आपका कर्तव्य है कि धरती पर हमें सम्मान मिले। हमारी जरूरतों का ध्यान रखा जाए। परंतु आपने तो यह दुनिया सिर्फ मानवों के हित में बनाई है। वे हमारा जीवन हराम कर देते हैं। हमें हर तरह से जलील करते हैं।प्रिय महोदय! आप अपने स्वरूप को पहचानिए। आप दीनबंधु हैं। जरा धनुष-बाण उठाइए और काँजीहाउस चलाने वाले रावणों का वध कीजिए। आपने द्वापर में आकर वंशी बजाई थी। आपका हमारी प्रिय गऊओं से गहरा प्रेम था। हम उन गायों के कुछ लगते हैं। हमें अपना मानिए और हमें भी सम्मान का जीवन दीजिए। आशा है, आप अपनी इस मौन मूक पशु-प्रजा पर पसीजेंगे।धन्यवाद!
आपके ही पशुद्वय
हीरा-मोती
01-01-2027
हमारी धरोहर और संस्कृति(3 questions)
1
"वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!" कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
उत्तर:
हीरा और मोती मानो हृदय से सच्चे भारतीय मनुष्य थे। वे न तो कभी बेकार में हिंसा करते थे। न पराजित शत्रु पर आक्रमण करते थे। स्त्रियों पर सींग चलाना तो उनके लिए पाप था। वे प्रेम और अपनेपन को समझते थे। इसलिए वे झूरी और लड़की से असीम लगाव रखते थे। वे अपने स्वार्थ के कारण लड़की को संकट में नहीं देख सकते थे।
2
"गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।" हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
उत्तर:
भारतीय स्वभाव है- हारे हुओं को क्षमा करना। उन्हें भी जीने योग्य अवसर देना। भारत का एक और स्वभाव है – स्त्रियों का सम्मान करना। उनके विरुद्ध शस्त्र-अस्त्र न चलाना। यह अहिंसा, क्षमा और प्रेम का संस्कार है।
3
"दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता"(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
- a.खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
- b.भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
उत्तर:
(क) आज का युग उन्नत है। आज बैलों की जगह ट्रैक्टर और बिजली से चलने वाली मोटरें और मशीनें आ गई हैं। पहले खेतों में बैल खुदाई करते थे। आज वही काम ट्रैक्टर कर रहे हैं। पहले गुड़ निकालने के लिए बैल कोल्हू में जुतते थे। आज इस काम को बिजली से चलने वाली मोटरें कर रही हैं।(ख) भारत में पशुओं को अपने जीवन का सदस्य माना जाता रहा है। हमारी संस्कृति कृषि-संस्कृति है। किसानों के लिए बैल पूज्य हैं। पहले सारी खेती बैलों और हल से होती थी। इसलिए आजादी के बाद भारतीय कांग्रेस ने अपनी पार्टी का चुनाव-चिह्न भी दो बैलों की जोड़ी रखा था। हमारे यहाँ बड़े-बड़े पशु मेले होते हैं। उनकी प्रतियोगिताएँ होती हैं। उन्हें सजाया जाता है। उनके संग खेल खेले जाते हैं। वास्तव में भारतीय लोग बैल को पशु नहीं, अपनी संस्कृति का अनिवार्य अंग मानते थे।
अलग-अलग और साथ-साथ(5 questions)
1
"दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्यादा सहनशील था।"कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए। (संकेत – धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
उत्तर:
हीरा और मोती मानो राम-लक्ष्मण की जोड़ी है। हीरा राम की तरह धैर्यवान, संस्कारवान, अहिंसक, नारी मर्यादा का रक्षक है। वह कभी गिरे हुए को नहीं मारता, स्त्रियों का सम्मान करता है। मोती लक्ष्मण की भाँति उग्र है। वह अन्याय को देखकर क्रुद्ध हो जाता है। अनेक अवसरों पर वह रस्सी, खूँटा, पगहा सबको तोड़ डालता है। वह हमेशा शत्रु को ठिकाने लगाने के फेर में रहता है। वह क्रोधी है। सींग चलाना, दीवार तोड़ना, पटक देना उसके उग्र स्वभाव की विशेषताएँ हैं।
2
हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
उत्तर:
हीरा शांत, धीर और समझदार है। वह सहनशील है। अन्याय सहकर भी शांत रहना जानता है। इसलिए जब-जब मोती गुस्से में कुछ गलत कर बैठता है तो वह उसे समझाता है। जब मोती लड़की की माँ को उठाकर पटकने की बात करता है तो हीरा उसे समझाता है कि वह लड़की की माँ है। यह भी समझाता है कि औरतों पर हाथ नहीं उठाते।मोती उग्र, क्रोधी और अशांत है। वह अन्याय नहीं सह सकता। जब हीरा काँजीहाउस में चुपचाप बैठा रहता है तो मोती ही उसे दीवार तोड़ने की प्रेरणा देता है। सच में वे एक-दूसरे के पूरक हैं।
3
आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? (संकेत – क्या-क्या करें और क्या-क्या न करें, कैसे पढ़ाई, खेल आदि में एक-दूसरे की सहायता करें और साथ दें)
उत्तर:
मेरा मित्र सुदेश शांत, गंभीर, एकांतप्रेमी और प्रकृतिप्रेमी है। मैं चंचल, अनुशासनहीन, बातूनी और शरारती हूँ।मेरी मित्र से अपेक्षा – वह मेरे साथ खेला करे, हँसा करे। वह मेरे साथ सैर-सपाटे और गप्पबाजी में उलझा करें। वह मेरे साथ बाज़ार में घूमने चला करे।मित्र की मुझसे अपेक्षा – मित्र चाहता है कि मैं उसे घर में शांत बैठने दूँ। मैं अध्ययन के समय उससे बात न करूँ। मैं उसके साथ नदी किनारे या बगीचे में बैठा करूँ।
4
"दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।" कहानी में अनेक स्थानों पर 'मूक-भाषा' का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
उत्तर:
पशुओं की भी भाषा होती है, जिसे पशु अच्छी तरह जानते और समझते हैं। हम मनुष्य भी उनकी देह-भाषा, उनकी आवाजें, उनकी चाल, गति, सुस्ती-चुस्ती से उनके मनोभाव समझते हैं।मैं समझता हूँ, जब मोती किसी अन्याय को देखता होगा तो वह सींग हिलाने लगता होगा। मुँह से हुँफ-हुँफ की आवाज़ें निकालने लगता होगा। तब हीरा शांत रहकर समझाता होगा- अरे, शांत रहो, मेरी तरह! मेरी कल्पना है कि ये पशु ऐसे ही संवाद करते होंगे।
5
आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
मैं घर में कभी कूदती-फुदकती जाती हूँ, कभी उदास और निढाल-सी। इससे मेरी माँ मेरा हाल जान लेती है। माँ भी कभी-कभी पीछे से मेरी आँखें भींचकर मुझे हैरान कर देती है। मैं माँ का प्रेम समझ लेती हूँ।मेरे पिता झूमकर मुझे उठा लेते हैं। मैं उनके दिल में उमड़े प्रेम को समझ जाती हूँ। मेरी छोटी बहन पिता के गले से लिपटकर उन्हें चूम लेती है। पिता समझ लेते हैं कि नन्हीं प्यार कर रही है।
भारतीय सांकेतिक भाषा(1 questions)
1
आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी (लिंक) पर जाकर भारतीय सांकेतिक भाषा सीख सकते हैं-
उत्तर:
https://www.youtube.com/@ISLRTC
https://islrte.nic.in/
मार्ग खोजेंगे कैसे?(3 questions)
1
"सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।"हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
उत्तर:
मैं नीदरलैंड अपनी बेटी के पास गया हुआ था। मुझे गुरुद्वारे जाना था। सामने दो रास्ते जा रहे थे। कोई बताने वाला नहीं था। न कोई निशान था, न कुछ लिखा था। मैं मैट्रो से उतरा और एक रास्ते की ओर चलने लगा। मेरी नज़र गूगल मैप पर थी। मैंने देखा मंजिल दूर होती जा रही थी। मैं समझ गया कि गलत रास्ते पर हूँ। मैं वापस मुड़ा और दूसरे रास्ते पर चल पड़ा। यह ठीक मार्ग था।
2
यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए। (संकेत – ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोडों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)
उत्तर:
हमें घर से चलते समय गंतव्य के मार्ग को समझ लेना चाहिए। इसके लिए किसी परिचित से मार्गदर्शन लेना चाहिए। शहर नया हो तो स्थानों को याद रखने की बजाय लिख लेना चाहिए।भटकने पर पुलिस कर्मचारी, दुकानदार या किसी ड्राइवर से पूछ लेना चाहिए। अगर गूगल मैप चलाना आता हो, तो उसका सहारा लेना चाहिए।
3
आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने अध्यापक से मिलकर सुरक्षित मार्ग को जानें और समझें।
सृजन(4 questions)
1
हीरा और मोती की दैनंदिनी। कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।कैसे लिखें- "आज का दिन…" से आरंभ करें। भावनाएँ लिखें (भूख, गुस्सा, दर्द)। अंत में आशा या संकल्प लिखें। (संकेत – "आज हमें काँजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा।")
उत्तर:
आज हमारे लिए दुर्भाग्य है। हमने मटर क्या खाए कि पकड़े गए। हमें बड़ी बेरहमी से काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। हमें धकिया कर एक खूँटे में बाँध दिया गया। इससे तो गया का घर ही अच्छा था।हमें भूख लगी। हम प्यास से बेहाल हैं। परंतु न कोई चारा देने वाला है, न पानी। और पशु भी मरे-मरे से हैं। सभी की गर्दन झुकी है। चेहरे मुरझाए हुए हैं। हमें कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही।सुनते हैं, भगवान सबकी सुनता है। हमें लगता है, हमारा मालिक झूरी जरूर हमारे लिए परेशान होगा। वह एकदम यहाँ जरूर आएगा – हमें ढूँढ़ते-ढूँढ़ते।
2
आज के समाचार। मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।कैसे लिखें- शीर्षक दें। घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ)। परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया। (संकेत – शीर्षक 'दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ')
उत्तर:
शीर्षक – बैल तोड़-ताड़ कर भागेकल रात काँजीहाउस में बवंडर हो गया। हीरा-मोती नाम के दो बैलों ने खूब उत्पात मचाया। मोती ने सींग मार-मारकर काँजीहाउस की दीवार तोड़ डाली। सारे जानवर बाहर निकल भागे। घोड़े, बैल, भैंसें, साँड़ सभी भाग गए। सिर्फ गधे पड़े रहे।सुबह काँजीहाउस के मालिक को पता चला तो उसके होश उड़ गए। जनता ने सुना तो खूब खुश हुई। उन्हें लगा जैसे देश आज़ाद हो गया हो। वे काँजीहाउस की झल्लाहट की खिल्ली उड़ाते मिले।
3
कहानी का नया अंत। यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।कैसे लिखें- बैलों की नई जगह। झूरी की स्थिति। (संकेत- "हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।")
उत्तर:
काँजीहाउस से छूटे हीरा-मोती एक पार्क में जाकर ठहर गए। वहाँ पहले से कुछ आवारा पशु खड़े थे। वे भी खड़े हो गए। इतने में एक वृद्ध सज्जन आए। उन्होंने हीरा-मोती को रोटियाँ खिलाई। हीरा-मोती खुश हुए। वे गर्दन हिलाकर उसका धन्यवाद करने लगे। वृद्ध खुश हुए। उन्होंने आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ जोड़े और वापस चले गए। मोती ने हीरा को इशारा किया- बंदा अच्छा है। हीरा ने सिर हिलाया – लगता तो मुझे भी है। मोती – तो चलें उसके घर? हीरा – पता नहीं, इसके घर हमारे लिए जगह होगी कि नहीं। मोती – पर चलने में हमारा जाता क्या है?हीरा-मोती वृद्ध के पीछे-पीछे चल पड़े। कोई एक मील चलने के बाद वृद्ध महोदय का अहाता आया। वृद्ध ने देखा हीरा-मोती तो पीछे-पीछे चले आ रहे हैं। वे वृद्ध भी घर में अकेले थे। उनके बच्चों ने उन्हें अकेला छोड़ दिया था। वृद्ध उनकी दशा को समझ गए। बोले- तुम भी अकेले, मैं भी अकेला! उन्होंने दरवाजा खोल दिया। हीरा-मोती शान से उसके अहाते में चले गए। वे खुश थे- झूरी न सही, झूरी जैसा झुरझुर करता मालिक सही।
4
चित्रकथा लेखन। नीचे 'दो बैलों की कथा' की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए।कैसे लिखें- हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए। दृश्य का क्रम – बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी। (संकेत – चित्र 4: "अब हम आजाद हैं।")
उत्तर:
1. घटना – इसमें काँजीहाउस में बंद पड़े लाचार पशुओं का दृश्य है। हीरा और मोती उदास हैं।
संवाद – हीरा – "अब तो रहा नहीं जाता मोती!" मोती – (सिर लटकाए हुए) – "मुझे तो मालूम होता है, प्राण निकल जाएँगे।"2. घटना – काँजीहाउस से बाहर निकलने की योजना सोच रहे हैं हीरा-मोती।
संवाद – हीरा – यहाँ से भागने का कोई उपाय निकालना चाहिए। मोती – आओ दीवार तोड़ डालें।3. घटना – हीरा और मोती ने सींग मार-मारकर दीवार तोड़ डाली। परंतु हीरा के गले में रस्सी थी।
संवाद – हीरा – "तुम जाओ, मुझे यहीं पड़ा रहने दो। शायद कहीं भेंट हो जाए।" मोती – "तुम मुझे इतना स्वार्थी समझते हो हीरा!"4. घटना – दीवार टूटते ही सारे पशु भाग गए।
संवाद – "अब हम आजाद हैं!"
भाषा से संवाद — व्याकरण की बात — मेरे शब्द(1 questions)
1
कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। उसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर:
पगहिया – पाँवों की रस्सी (यह ठीक निकला)बेतहाशा – अंधाधुंध (कोश में बहुत तेजी से)बूते – बल, जोर (यह ठीक है)उन्मत्त – पागल (कोश में नशे में चूर)अख्तियार – अपनाना (कोश में- अधिकार, हक)
भाषा गढ़ते मुहावरे(8 questions)
1
"झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।" इस वाक्य में मुहावरे को पहचानकर रेखांकित कीजिए और नया वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
मुहावरा – दाँतों पसीना आना = बहुत अधिक संघर्ष करना।नया वाक्य – भीम पहलवान ने जरासंध को पटककर मार तो डाला किंतु उसे भी दाँतों पसीना आ गया।
2
"उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।" इस वाक्य में मुहावरे को पहचानकर रेखांकित कीजिए और नया वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
मुहावरा – दिल काँपना = भयभीत हो जाना।नया वाक्य – आँखों के सामने गिरते पहाड़ को देखकर मेरा दिल काँप गया।
3
"झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।" इस वाक्य में मुहावरे को पहचानकर रेखांकित कीजिए और नया वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
मुहावरा – जल उठना = ईर्ष्या से भर जाना।नया वाक्य – भारत को विश्वकप जीतते देखा तो पड़ोसी देश जल उठा।
4
"मोती दिल में ऐंठकर रह गया।" इस वाक्य में मुहावरे को पहचानकर रेखांकित कीजिए और नया वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
मुहावरा – ऐंठकर रह जाना = अपने क्रोध पर संयम रखने को मजबूर होना।नया वाक्य – दिल तो करता था कि उस दुष्ट गुंडे को वहीं ठोक दूँ, परंतु पत्नी के बार-बार रोकने पर मैं ऐंठकर रह गया।
5
"आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है।" इस वाक्य में मुहावरे को पहचानकर रेखांकित कीजिए और नया वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
मुहावरा – खबर लेना = कठोरता से पेश आना।नया वाक्य – मैं दस घंटे घूम-घामकर घर पहुँचा तो पिताजी ने मेरी खूब खबर ली।
6
"जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।" इस वाक्य में मुहावरे को पहचानकर रेखांकित कीजिए और नया वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
मुहावरा – जी तोड़कर काम करना = बहुत परिश्रम करके काम करना।नया वाक्य – भारतीय उद्यमी विदेशों में जाकर आराम से नहीं बैठते। वे जी तोड़कर काम करते हैं।
7
"अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।" इस वाक्य में मुहावरे को पहचानकर रेखांकित कीजिए और नया वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
मुहावरा – ईंट का जवाब पत्थर से देना = कठोरता से बदला लेना।नया वाक्य – जब भी मेरा शत्रु मुझ पर आक्रमण करता है तो मैं ईंट का जवाब पत्थर से देता हूँ।
8
"तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ दो ग्यारह होता है।" इस वाक्य में मुहावरे को पहचानकर रेखांकित कीजिए और नया वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
मुहावरा – नौ दो ग्यारह होना = भाग जाना।नया वाक्य – पुलिस को देखते ही सारे गुंडे वहाँ से नौ-दो ग्यारह हो गए।
गतिविधियाँ(3 questions)
1
कविता (गीत) और अभिनंदन पत्र। "बाल सभा ने निश्चय किया, दोनों पशुवीरों को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।"(क) मान लीजिए कि बाल सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए। (ख) हीरा और मोती के लिए 'अभिनंदन-पत्र' लिखिए।
- a.मान लीजिए कि बाल सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए।
- b.हीरा और मोती के लिए 'अभिनंदन-पत्र' लिखिए।
उत्तर:
(क) गीत –
स्वागत है हे वीर तुम्हारा, स्वागत है हे वीर!
मोती में है गुस्सा ज्यादा, पर हीरा है धीर!
मोती सबको मज़ा चखा दे, अकडू खाँ को धूल चटा दे,
पर हीरा है सचमुच हीरा, समझे सबकी पीरा।(ख) अभिनंदन पत्र –
हम सभी ग्रामवासी हीरा और मोती का अभिनंदन करते हैं। आप दोनों पशु नहीं हैं, देवता हैं। आपमें प्रेम है, स्वामिभक्ति है, वीरता है और संघर्ष की शक्ति है। आपने दोस्ती का उदाहरण प्रस्तुत किया है। भगवान करे, सबको ऐसी दोस्ती मिले। तभी आपने पहाड़-जैसे साँड़ को बेदम कर दिया और काँजीहाउस की दीवारें तोड़ दीं।आप दोनों वीर और मुक्तिदाता हैं। आपके कारण कितने बेचारे दीनहीन पशुओं को मुक्ति मिली। आप अपने स्वामी के प्रेम को समझते हैं। आप दोनों मिल जाएँ तो एक और एक ग्यारह हो जाते हैं।आपसे सभी मनुष्यों को सीखना चाहिए। आप हमारे आदर्श हैं। आपकी जय हो। पूरा गाँव आपके वापस लौटने पर आपका अभिनंदन करता है। आप इसी तरह लोकप्रिय बने रहें। भगवान आपको सुखी रखे।– ग्राम बाल सभा
आप यशस्वी हों।
2
बाल सभा में भाषण। मान लीजिए कि आपको बाल सभा ने हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के लिए बुलाया है। भाषण का विषय है- 'पशुओं के अधिकार'। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
मित्रो! मेरा सौभाग्य है कि आपने मुझे हीरा और मोती की वापसी पर बोलने के लिए बुलाया है। ये हीरा-मोती बैल नहीं हैं, बड़े वीर और महात्मा हैं। यह राम-लक्ष्मण की या युधिष्ठिर और अर्जुन की जोड़ी है। हीरा शांत और समझदार है। मोती वीर और बहादुर। ये दोनों मिलकर एक और एक ग्यारह हो जाते हैं। इनकी दोस्ती से सारे गाँववालों को सीखना चाहिए।दोस्तो! हम भी इनसे बहुत प्यार करते हैं। ये तो हैं ही हमारे दोस्त, मित्र, हमजोली और सुख-दुख के साथी। हम इन दोनों का अभिनंदन करते हैं। आज उनकी खुशी में हम नाचेंगे, कूदेंगे, खाएँगे और अपने साथ इन बैलों को भी खिलाएँगे।
3
शीर्षक – इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
कहानी के निम्नलिखित पाँच भाग किए जा सकते हैं-भूमिका – बैल, गाय, गधे और ताकतवर देशों की बात शुरू करना। यह आने वाली घटनाओं की भूमिका है।हीरा-मोती का घर छूटना – गया को झूरी के घर से हीरा-मोती को ले जाना। हीरा-मोती का नाराज़ और उदास रहना।असहमति और संघर्ष – हीरा-मोती का पगहे तुड़वाकर झूरी के पास वापस आना। गया का दोबारा हीरा-मोती को ले जाना। उन पर अत्याचार करना। हीरा-मोती का फिर से भागना।क्रांति और बलिदान – हीरा-मोती का साँड़ से लड़ना, काँजीहाउस में पहुँचना, वहाँ दीवार तोड़कर सब पशुओं को मुक्त करना चरम अवस्था है।घर-वापसी – हीरा-मोती का नीलाम होना। फिर झूरी के घर के रास्ते पहचानना और झूरी के घर पहुँचकर शेर हो जाना अंत है। झूरी की पत्नी का प्रेम पाना सुखांत दृश्य है।
मेरी पहेली(1 questions)
1
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों- हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी
उत्तर:
हीरा – यारों का वो यार है, साथ निभाता मौन! साथी को गलती से रोके, तुम्हीं बताओ कौन?झूरी – प्यार है मन में, चाह है मन में, पर रह जाता मौन! अपने साथी से डरता है, तुम्हीं बताओ कौन?मोती – डीलडौल में लंबा-चौड़ा, हर पल है तैयार हथौड़ा, जुल्म सहे न मौन! यारो तुम ही बतलाओ, वो ऐसा प्राणी कौन?गया – प्यार की भाषा नहीं जानता, जोर-जबर की राह ठानता, फिर बोलो ऐसे स्वामी को अपनाएगा कौन? बोलो, रहो न मौन!बैल – हम खेती उपजाने वाले, अपनी जान लगाने वाले, अपने स्वामी की भक्ति में जीने वाले, मरने वाले, फिर भी रहते मौन? बतलाओ हम कौन?मटर – हरी-भरी सूरत वाला, मैं सबको हूँ ललचाता। नर की छोड़ो, पशु भी मुझको देखके है चर जाता। मुझको खाकर मस्त न हो जो, ऐसा प्राणी कौन? बूझो भैया, गोल-गोल दानों वाला मैं कौन?रस्सी – चुपके-चुपके आ जाती, वो गले में आके पड़ जाती, वो फिर छोड़े न कितना चाहो, कर देती बेचैन? कब छोड़ेगी बंधन अपना, सोच रहा दिन रैन!रोटी – मेरे पीछे सारी दुनिया, मैं हूँ धन अनमोल! मेरे बिन ये धन वाले भी नहीं सकेंगे बोल। मैं सबकी जीवनदाता! मेरा सबसे है नाता।
भाषा संगम(2 questions)
1
"कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।" नीचे 'बैल' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।बैल (हिंदी); वृषभ: (संस्कृत); बओलद, बल्द (पंजाबी); बैल (उर्दू); दोंद (कश्मीरी); ढ़गो (सिंधी); बैल (मराठी); बळद (गुजराती); बैल (कोंकणी); गोरु (नेपाली); बलद (बांग्ला); षाँड़, बलध (असमिया); शन लाबा (मणिपुरी); बलद (ओड़िआ); एंददु (तेलुगु); एरिदु/काळैमाहु (तमिल); काळ (मलयालम); एत्तु (कन्नड़)।इनके अतिरिक्त यदि आप 'बैल' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर:
अन्य कोई नहीं।
2
उपर्युक्त वाक्य ("कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।") को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर:
हरियाणवी – कदै-कदै अड़ियल बलद भी देखण में आ ज्य सै।सिरायकी – कडी-कडी अड़ियल बैल वी डिक्खण कूँ मेल वेंदे।