SolveNCERT
SolveNCERT
Class 9 · HindiNCERT 2026 Revised Syllabus

Chapter 3: संवादहीन (0901CH03)

R1 and R2 book- Ganga

अकेली ताई और उसके पालतू तोते मिट्टू की मार्मिक कहानी — आधुनिक समाज में बुजुर्गों के बढ़ते अकेलेपन और संवादहीनता पर करुण कथा।

Chapter code: 0901ch03 · Book: R1 and R2 book- Ganga · Class 9 Hindi

Find complete NCERT solutions for Class 9 Hindi, R1 and R2 book- Ganga Chapter 3. Every question has a clear, step-by-step answer for chapter code 0901CH03.

Jump to:

रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क(5 questions)

1

कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध किस भाव को दर्शाता है? (क) परोपकार और त्याग (ख) ममता और स्नेह (ग) करुणा और क्रोध (घ) जिज्ञासा और सहायता

उत्तर:
(ख) ममता और स्नेह।तर्क – ताई इतने बड़े घर में बिल्कुल अकेली रहती थीं और मिट्टू ही उनका एकमात्र साथी था। वे मिट्टू को अत्यधिक प्रेम करती थीं। अपनी सारी ममता उस पर उड़ेलती थीं। वे उसे एक पक्षी नहीं, बल्कि अपने बच्चे की तरह मानती थीं। उसके लिए खाना बनाती थीं और उससे बातें करती थीं। यह रिश्ता केवल मालिक और पालतू का नहीं, बल्कि गहरे आत्मीय स्नेह का था।
2

जगन मास्टर द्वारा मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है? (क) अनुशासन और परंपरा (ख) उदासीनता और असावधानी (ग) आत्मगौरव और विद्रोह (घ) करुणा और नैतिकता

उत्तर:
(घ) करुणा और नैतिकता।तर्क – जगन मास्टर एक आदर्शवादी व्यक्ति थे। उन्हें लगता था कि किसी जीव को कैद में रखना पाप है। उनके द्वारा मिट्टू को कमरा बंद करके पिंजरे से बाहर निकालना उनकी 'करुणा' और 'नैतिकता' की भावना को दर्शाता है।
3

मिट्टू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है? (क) भोजन की खोज (ख) प्रेम की आकांक्षा (ग) स्वतंत्रता की चाह (घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति

उत्तर:
(ग) स्वतंत्रता की चाह।तर्क – पक्षी की स्वाभाविक प्रवृत्ति आकाश में उड़ना है। पिंजरे में उसे सारी सुख-सुविधाएँ (दाल-भात, मिर्च) मिल रही थीं, लेकिन जैसे ही उसे मौका मिला, वह उड़ गया। यह दर्शाता है कि किसी भी जीव के लिए सुख-सुविधाओं से बढ़कर उसकी 'आजादी' या 'स्वतंत्रता' होती है।
4

ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था? (क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव (ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता (घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद

उत्तर:
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव।तर्क – ताई के पास बड़ा घर और संपत्ति थी, लेकिन उनके बेटे और बेटियाँ उनके साथ नहीं थे। घर में सन्नाटा था और उनसे बात करने वाला कोई नहीं था। अपनों से बिछड़ना और किसी से बातचीत (संवाद) न होना ही उनके अकेलेपन और मानसिक दुख की सबसे बड़ी वजह थी।
5

कहानी में मानव समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है? (क) मजबूरी (ख) कर्मपरायणता (ग) अकेलापन (घ) संवादधर्मिता

उत्तर:
(ग) अकेलापन।तर्क – लेखक ने दिखाया है कि कैसे आज के समाज में बुजुर्ग अपने ही घरों में अकेले पड़ गए हैं। भौतिक रूप से संपन्न होने के बावजूद, भावनात्मक रूप से वे शून्य हैं। ताई का एक तोते पर निर्भर होना समाज में बढ़ती इसी 'अकेलेपन' की गंभीर समस्या को दर्शाता है।

मेरी समझ मेरे विचार(7 questions)

1

"भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

उत्तर:
यहाँ 'नैया' शब्द ताई के जीवन रूपी नाव का प्रतीक है। ताई का अतीत बहुत ही वैभवशाली था, लेकिन वर्तमान में उनके पति की मृत्यु हो चुकी है। बेटे शहर में जाकर बस गए और बेटियों का ब्याह हो गया। बुढ़ापे के इस पड़ाव पर वे बिल्कुल अकेली हो गईं। घर में सन्नाटा पसरा रहता था। जब वे अपनी इस दयनीय स्थिति को देखतीं, तो चिंतित होकर भगवान से पूछती हैं कि उनके जीवन के बचे हुए दिन (बुढ़ापा) कैसे कटेंगे और उन्हें इस कष्टकारी अकेलेपन से मुक्ति कैसे मिलेगी?
2

"धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।" इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर:
इस वाक्य के माध्यम से लेखक ने ताई की आर्थिक और पारिवारिक सत्ता के पतन की ओर संकेत किया है। एक समय था जब घर में ताई का रौब था, नौकरों की कतारें थीं और संपत्ति पर उनका अधिकार था। परंतु पति के देहांत के बाद और बेटों के शहर में बस जाने के कारण, घर की खेतीबाड़ी एवं कारोबार सब समाप्त हो गया। रसूख और निर्णय लेने की शक्ति दूसरों के हाथों में चली गई। यहाँ तक कि उनके अपने बच्चे भी वैचारिक रूप से उनसे दूर होकर 'पराए' हो गए, जिससे ताई अपने ही घर में अधिकारविहीन और अकेली हो गईं।
3

"ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी।" क्यों?

उत्तर:
मनुष्य का स्वभाव है कि उसे स्नेह देने और लेने के लिए किसी-न-किसी साथी की आवश्यकता होती है। ताई के बच्चे और नाती-पोते उनके पास नहीं थे, जिससे उनके भीतर की ममता का स्रोत सूख रहा था। जब गनपत ने उन्हें मिट्टू (तोता) लाकर दिया, तो उनके अकेलेपन को एक सहारा मिल गया। मिट्टू की नादान हरकतों और उसकी "सीताराम" की पुकार ने ताई के भीतर दबी हुई ममता को जगा दिया। उनके पास प्यार करने के लिए कोई इंसान नहीं था इसलिए उन्होंने अपनी पूरी ममता उस बेजुबान पक्षी पर केंद्रित कर दी।
4

"अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चे तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।" इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तर:
मिट्टू के आने से ताई के व्यक्तित्व में सकारात्मक और ऊर्जावान परिवर्तन दिखाई देते हैं। जो ताई पहले जीवन से निराश थीं और अपने लिए खाना बनाने तक में आलस करती थीं, वे अब सक्रिय हो गईं। वे मिट्टू के लिए नियम से दाल-भात बनाने लगीं और उसकी छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखने लगीं। यह परिवर्तन दर्शाता है कि जब जीवन में कोई जिम्मेदारी या प्रेम का आधार मिल जाता है, तो व्यक्ति की जीने की इच्छा पुनर्जीवित हो जाती है। वे अब मोहल्ले और खेत-खलिहान की बातों में भी दिलचस्पी लेने लगी थीं।
5

"जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।" जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
जगन मास्टर एक आदर्शवादी, सिद्धांतवादी और संवेदनशील व्यक्ति थे। उनके व्यक्तित्व में एक ओर जीव-दया थी, जिसके कारण वे किसी पक्षी को कैद में रखना पाप समझते थे। दूसरी ओर, वे बहुत ही सहृदय पड़ोसी भी थे। जब उनसे अनजाने में मिट्टू उड़ गया, तो वे गहरे पश्चात्ताप में डूब गए। ताई के प्रति उनकी संवेदना इतनी गहरी थी कि उन्होंने उन्हें दुख से बचाने के लिए 'एवजी मिट्टू' को तैयार करने में अपनी पूरी शक्ति लगा दी। उनका चरित्र नैतिकता और मानवीय कर्तव्य के बीच के द्वंद्व को बहुत सुंदर तरीके से दर्शाता है।
6

कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है- ताई, जगन मास्टर, मिट्टू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
यह शीर्षक सबसे अधिक ताई के लिए सार्थक है। ताई का जीवन दो स्तरों पर संवादहीन है। पहला, उनके अपने बच्चों के साथ जिनसे उनका संपर्क टूट चुका था। दूसरा, कहानी के अंत में जब मिट्टू उड़ जाता है, और गंगा स्नान से लौटी ताई एवजी तोते को अपना मिट्टू समझकर उसे पुकारती रहती है परंतु बदले में उस तोते की कोई प्रतिक्रिया नहीं होती। इस प्रकार, ताई के जीवन में शब्दों की मौजूदगी के बावजूद 'भावों का संवाद' खत्म हो जाता है, जिससे वे फिर से उसी मौन और संवादहीन दुनिया में पहुँच जाती हैं।
7

"अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।" ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

उत्तर:
किसी भी घर की जीवंतता वहाँ रहने वाले लोगों और उनके आपसी प्रेम से होती है। ताई की हवेली भौतिक रूप से बहुत विशाल थी, लेकिन वहाँ खुशियों, बच्चों की किलकारियों और आत्मीय बातचीत का नितांत अभाव था। जहाँ कभी चहल-पहल थी, अब वहाँ केवल सन्नाटा और धूल थी। अपनों की बेरुखी और अकेलेपन ने उस आलीशान भवन को एक मृत ढाँचे (खंडहर) में बदल दिया था। लेखक ने 'खंडहर' शब्द का प्रयोग ताई के उजाड़ हो चुके सामाजिक और पारिवारिक जीवन को दर्शाने के लिए किया है।

मेरे प्रश्न(4 questions)

1

उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्टू ने सहारा दिया। प्रश्न (क) : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? प्रश्न (ख) : ताई को मिट्टू किसने भेंट में दिया था? पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?

उत्तर:
(क) ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?क्योंकि उत्तर "ताई के अकेलेपन को मिट्टू ने सहारा दिया" सीधे इसी प्रश्न से मेल खाता है।
2

उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्टू उड़ गया था। प्रश्न (क) : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था? प्रश्न (ख) : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई? पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?

उत्तर:
(ख) ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?क्योंकि उत्तर में 'लौटने से पहले' उड़ जाने की बात कही गई है।
3

उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा। प्रश्न (क) : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? प्रश्न (ख) : गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश क्यों थे? पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?

उत्तर:
(क) गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?क्योंकि उत्तर में सच्चाई जानने पर सदमा लगने के डर की बात की गई है, जो वापसी से जुड़ा है।
4

उत्तर : कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' जीवन के मौन का प्रतीक है। प्रश्न (क) : कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' क्यों उपयुक्त नहीं है? प्रश्न (ख) : शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है? पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?

उत्तर:
(ख) शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है?क्योंकि उत्तर में शीर्षक के भावार्थ (जीवन के मौन का प्रतीक) की व्याख्या की गई है।

मेरे अनुभव मेरे विचार(5 questions)

1

"कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…" ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

उत्तर:
मनुष्य का स्वभाव है कि वह जिससे अत्यधिक प्रेम करता है या जो उसके जीवन के अकेलेपन का एकमात्र सहारा होता है, उसके प्रति वह बहुत अधिक संवेदनशील और सुरक्षात्मक हो जाता है। ताई के लिए मिट्टू केवल एक पक्षी नहीं था, बल्कि उनके सूने घर की इकलौती रौनक और उनके ममत्व का केंद्र था। उन्हें उनकी अनुपस्थिति में मिट्टू की चिंता सताती थी, इसीलिए वे बार-बार दरवाज़े की साँकलें टोहकर देखती थीं।अनुभव – इसी प्रकार, जब मैं अपने परिवार या किसी प्रिय वस्तु (जैसे मेरा पालतू पशु या मेरा छोटा भाई/बहन) से दूर होता हूँ, तो एक अनजाना डर मुझे भीतर से परेशान करने लगता है। मन में कई तरह की शंकाएँ उठती हैं- असुरक्षा की भावना : क्या वह सुरक्षित होगा? कहीं उसे मेरी कमी महसूस तो नहीं हो रही? एकाग्रता का अभाव : परिवार से दूर होने पर मेरा मन किसी भी बाहरी उत्सव या कार्य में पूरी तरह नहीं लग पाता। शरीर भले ही कहीं और हो, लेकिन सोच निरंतर घर की परिस्थितियों और अपनों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। जुड़ाव का अहसास : यह चिंता वास्तव में हमारे गहरे प्रेम और जुड़ाव को दर्शाती है। जैसे ताई को मिट्टू की चिंता सताती थी, वैसे ही अपनों से दूर होने पर हमें उनकी सुख-सुविधा और सुरक्षा की चिंता एक मानसिक दबाव की तरह महसूस होती है, जो हमें जल्द-से-जल्द उनके पास लौटने के लिए प्रेरित करती है।
2

"आखिर वह भी तो बोलता बतियाता प्राणी है।" क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।

उत्तर:
हाँ, मैं पूरी तरह मानता हूँ कि पशु-पक्षियों में भी गहरी संवेदनाएँ और भावनाएँ होती हैं। वे हमारी भाषा नहीं बोल सकते, लेकिन वे हमारी आवाज़ के लहजे और स्पर्श को बखूबी समझते हैं।अनुभव – मेरे पास एक पालतू कुत्ता था। जब भी मैं स्कूल से उदास होकर लौटता, वह बिना किसी के कहे मेरे पास आकर बैठ जाता और अपना सिर मेरे घुटनों पर रख देता। वह मेरी उदासी को महसूस कर सकता था। ठीक इसी तरह कहानी में मिट्टू भी ताई के दुखों को समझता था और उन्हें "कटेगी! कटेगी!" कहकर ढाँढ़स बँधाता था।
3

"गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…" ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

उत्तर:
मेरी राय में ताई को भ्रम में रखना पूरी तरह उचित था।तर्क – गनपत और जगन मास्टर का उद्देश्य नेक था। वे ताई को सदमे से बचाना चाहते थे। इसका एक ही उपाय उनके पास था कि ताई को तोते के उड़ जाने का समाचार धीरे-धीरे मिले ताकि वह उस दुख को सहन कर सके। सीधे तोते के न रहने का समाचार ताई को झटका दे सकता था, उनकी मृत्यु का भी कारण बन सकता था।
4

"ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्टू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।" क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।

उत्तर:
ताई अपनी तीर्थयात्रा के दौरान कल्पना कर रही थीं कि उनका प्रिय मिट्टू उन्हें देखते ही खुशी से चहकने लगेगा, लेकिन वास्तव में नया तोता उनके प्रति उदासीन रहा। मेरे साथ भी ऐसा एक बार हुआ-अनुभव – पिछले साल मेरा जन्मदिन था। मुझे पूरा विश्वास था कि मेरे माता-पिता मुझे वह साइकिल उपहार में देंगे, जिसकी मैं हफ्तों से माँग कर रहा था। मैंने मन ही मन सोच लिया था कि मैं शाम को साइकिल चलाकर अपने दोस्तों को दिखाने जाऊँगा। लेकिन जब शाम को उपहार खुला, तो उसमें साइकिल के बजाय किताबों का एक सेट और एक घड़ी थी। शुरू में मैं बहुत निराश हुआ, क्योंकि मैंने 'सोचा कुछ और था और हुआ कुछ और'। लेकिन बाद में जब मैंने उन किताबों को पढ़ना शुरू किया, तो मुझे अहसास हुआ कि वे मेरे ज्ञान के लिए साइकिल से कहीं अधिक उपयोगी थीं। इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि जीवन हमेशा हमारी उम्मीदों के अनुसार नहीं चलता, और हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।
5

"मिट्टू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।" क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

उत्तर:
हाँ, यह एक मनोवैज्ञानिक सच्चाई है कि जब किसी प्राणी को लंबे समय तक एक ही सीमित वातावरण या पिंजरे में रखा जाता है, तो वह अपनी स्वाभाविक आज़ादी और हिम्मत खो देता है। इसे 'पराधीनता का अभ्यास' कहा जा सकता है।कारण – प्राणी को लगता है कि पिंजरा ही उसका संसार है और उसे बिना मेहनत किए वहाँ भोजन और सुरक्षा मिल रही है। बाहर की दुनिया उसे डरावनी और असुरक्षित लगने लगती है।आसपास से उदाहरण - पालतू पक्षी : मैंने अपने पड़ोस में देखा है कि एक तोता कई सालों से पिंजरे में था। एक बार पिंजरे का दरवाज़ा गलती से खुला रह गया, लेकिन वह तोता बाहर नहीं उड़ा। वह बस दरवाज़े पर बैठकर बाहर देखता रहा। उसे आज़ाद उड़ान से ज्यादा पिंजरे की सुरक्षा की आदत हो गई थी। - सर्कस के जानवर : हाथी जैसे शक्तिशाली जानवर को बचपन से ही एक पतली रस्सी या साँकल से बाँधा जाता है। बड़ा होने पर वह उस रस्सी को आसानी से तोड़ सकता है, लेकिन वह कोशिश ही नहीं करता, क्योंकि उसे आदत हो जाती है और वह बँधा रहना ही पसंद करता है।निष्कर्ष – शारीरिक पिंजरे से भी ज्यादा खतरनाक 'मानसिक पिंजरा' होता है, जो प्राणियों की स्वतंत्र चेतना को मार देता है।

विधा से संवाद — कहानी का सौंदर्य(1 questions)

1

कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। चित्रात्मकता (दृश्य बिंब), संवादात्मकता, पुनरुक्ति, अतिशयोक्ति, लोकधर्मी भाषा और प्रश्नोत्तर शैली — इन विशेष बिंदुओं के एक-एक उदाहरण कहानी से खोजकर लिखिए।

उत्तर:
1. चित्रात्मकता (दृश्य बिंब) – ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, 'आ मिट्टू आ! मिट्टू आ' पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे।2. संवादात्मकता – ताई – जीते रहो बेटा, जुग जुग जिओ।' मिट्टू – खुश रहो! खुश रहो!3. पुनरुक्ति – सीताराम! सीताराम!4. अतिशयोक्ति – जगन मास्टर के घर में महाकुंभ हो गया।5. लोकधर्मी भाषा – "मेरी जान खाने को आ गया, मर जा…।"6. प्रश्नोत्तर शैली – भगवान! नैया कैसे पार लगेगी?

कहानी का अंत(1 questions)

1

किसी कहानी का अंत अनेक प्रकार से हो सकता है जैसे- सुखांत, दुखांत, मुक्त अंत, अप्रत्याशित अंत, यथार्थवादी अंत, प्रेरणात्मक अंत, व्यंग्यात्मक अंत।आपके अनुसार 'संवादहीन' कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?

उत्तर:
निश्चित रूप से यह दुखांत कहानी है। कहानी का अंत संवादहीनता के गहरे दर्द से होता है। ताई के जीवन की असली पीड़ा है – किसी को अपनाना, किसी के लिए जीना, उससे बोलना-रूठना-मनाना, संवाद करना। वह है तो जीवन है, वरना जीवन बोझ है।इस कहानी का अंत उस अकेलेपन के त्रास पर होता है। मानो ताई फिर से मौन और संवादहीनता की गहरी गुफा में समाने वाली है।इस कहानी का अंत यथार्थवादी भी है। परंतु इस यथार्थ में दुख ही दुख है। इसलिए मूलतः इसे दुखांत कहानी कहेंगे।कहानी का एक नया और सकारात्मक अंत – एक दिन ताई अकेली बैठी मिट्टू के बारे में सोच रही थी कि अचानक उनके पैरों पर किसी ने सरसराहट की और उन्होंने देखा कि मिट्टू उनके कदमों में बैठा था। ताई ने देखा पुराना मिट्टू वापस आ गया था। उसने चहक कर कहा- 'राम-राम ताई!' और ताई की संवादहीन दुनिया फिर से चहक उठी।

विषयों से संवाद(2 questions)

1

"अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।" कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं 'मास्टराइन', तो कहीं 'जगन मास्टर की घरवाली' कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?

उत्तर:
ग्रामीण परिवेश और पुराने समय की कहानियों में अक्सर महिलाओं की पहचान उनके पति के नाम या व्यवसाय से जोड़ी जाती थी। लेखक ने शायद ऐसा इसलिए किया ताकि कहानी का ग्रामीण और पारंपरिक प्रभाव बना रहे। दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि कहानी का मुख्य केंद्र 'ताई' और 'मिट्टू' का संबंध है, इसलिए सहायक पात्रों के नाम के बजाय उनके पद (मास्टराइन) या रिश्ते पर जोर दिया गया।
2

"गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे"(क) 'कुंभ-स्नान' एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए- इसका आयोजन क्यों किया जाता है? पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था? अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?(ख) मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए। (संकेत – कहाँ से कहाँ तक की यात्रा, टिकट, यात्रा के साधन, संगी-साथी, खान-पान, ठहरना आदि।)(ग) आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाजें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे? (संकेत – उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों-देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)

उत्तर:
(क) पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय ही जब अमृत कलश निकला था, तो उसकी कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों (हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक) पर गिरी थीं। माना जाता है कि कुंभ के दौरान इन स्थानों की नदियों में स्नान करने से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष (जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति) प्राप्त होता है। यह श्रद्धा, आस्था और भारतीय संस्कृति के मिलन का प्रतीक है।- पिछला आयोजन : 'महाकुंभ' वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित हुआ था। - अगला आयोजन : अब आगामी वर्षों में नासिक और उज्जैन में आयोजित होने की संभावना है।(ख) ताई पारंपरिक विचारों को मानने वाली महिला थीं, इसलिए उनकी यात्रा कुछ इस प्रकार रही होगी- (नोट – कहाँ से कहाँ तक की यात्रा और टिकट आदि विद्यार्थी अपने रहने के स्थान के आधार पर लिखेंगे।)यात्रा की तैयारी : ताई ने कई दिन पहले से ही अपनी पोटली तैयार की होगी, जिसमें गंगा स्नान के लिए नए वस्त्र, रास्ते के लिए घर के बने लड्डू और आवश्यकतानुसार छोटा-मोटा सामान रखा होगा।साधन और साथी : वे मोहल्ले की अन्य वृद्ध महिलाओं के साथ रेलगाड़ी से गई होंगी। स्टेशन पर भारी भीड़ के बीच अपनी सहेलियों का हाथ थामे "गंगा मैया की जय" के नारे लगाते हुए वे अपनी बोगी तक पहुँची होंगी।अनुभव : ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए वे बार-बार मिट्टू के बारे में सोचती होंगी। प्रयागराज पहुँचकर उन्होंने त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाई होगी। पंडा जी से पूजा करवाई होगी। किसी धर्मशाला के एक छोटे से कमरे में रुककर सादा भोजन किया होगा।(ग) (नोट – इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र के आधार पर लिखना चाहिए।) हमारे यहाँ प्रतिवर्ष 'बैसाखी' (या स्थानीय मेला) का मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।दृश्य और आवाजें : मेले का वातावरण रंगों और खुशियों से भरा होता है। ढोल की थाप, बच्चों के खिलौनों की पीं-पीं और बड़े झूलों की चरमराहट से पूरा आसमान गूँज उठता है।खान-पान और गंध : हवा में ताजी जलेबियों और समोसों की खुशबू तैरती रहती है। मिट्टी के खिलौनों की सोंधी महक वातावरण को और भी जीवंत बना देती है। जब नदी में स्नान करते हैं तो तन-मन में झुरझुरी-सी उठती है। पेड़े और लस्सी का स्वाद लार टपका देता है और एक-एक खिलौने को छूने का स्पर्श-सुख हमेशा याद रहता है।

सृजन(4 questions)

1

"बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।" अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?

उत्तर:
घर छोड़ने का कारण : ताई के बेटों ने बेहतर रोजगार, बच्चों की उच्च शिक्षा और आधुनिक सुख-सुविधाओं की तलाश में गाँव छोड़ा होगा। शहर की चकाचौंध और आर्थिक उन्नति की चाह अक्सर युवाओं को अपनी जड़ों से दूर ले जाती है।गाँव छोड़ते समय के विचार : गाँव छोड़ते समय उनके मन में एक तरफ़ भविष्य को लेकर उत्साह रहा होगा, तो दूसरी तरफ अपनी माँ (ताई), बचपन की यादों और पुश्तैनी हवेली को पीछे छोड़ने का गहरा दुख और अपराधबोध भी रहा होगा। उन्होंने सोचा होगा कि शहर जाकर जल्द ही कारोबार अच्छा हो जाएगा और ताई को भी वहाँ बुला लेंगे।तैयारी : उन्होंने शहर जाने के लिए अपना ज़रूरी सामान, दस्तावेज और शहर में शुरुआती खर्चों के लिए पूँजी जुटाई होगी। मानसिक रूप से उन्होंने खुद को नए माहौल में ढालने के लिए तैयार किया होगा, हालांकि वे अपनी माँ के अकेलेपन का पूरी तरह अंदाजा नहीं लगा पाए होंगे।
2

"वहाँ बैठे एवजी मिट्टू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की" ताई सोच रही थीं कि मिट्टू 'राम राम सीताराम' कहेगा, लेकिन एवजी मिट्टू चुप था। कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्टू वापस आ गया। मिट्टू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए। (संकेत – प्रारंभ कीजिए- "एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके …")

उत्तर:
एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके और पुराने मिट्टू की चिर परिचित 'सीताराम सीताराम' की आवाज़ हवेली के सन्नाटे को चीरती हुई गूँज उठी। असली मिट्टू उड़कर सीधे ताई के कंधे पर जा बैठा। अपनी चिर-परिचित जगह पर एक दूसरे तोते को शांत बैठे देख वह पहले तो ठिठका, फिर अपनी तिरछी आँखों से उसे देखते हुए बोला- "अरे भाई! तुम यहाँ मौन क्यों बैठे हो? क्या तुम्हें नहीं पता कि इस घर में शब्दों से ज्यादा भावनाओं की जरूरत है?"नया तोता उसे देख हैरान रह गया। असली मिट्टू ने ताई की आँखों में छलकती खुशी देखी और समझ गया कि उसकी गैर-मौजूदगी में इस 'एवजी' ने ताई के घर को केवल सुरक्षा दी थी, संवाद नहीं। ताई ने काँपते हाथों से असली मिट्टू को चूमा। अब हवेली में दो तोते थे- एक जो बोलता था और दूसरा जिसने अब असली मिट्टू को देखकर बोलना सीखना शुरू कर दिया था। ताई की संवादहीन दुनिया में अब दोगुना संगीत लौट आया था।
3

"अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।" आप घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए – "आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे?" उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर:
आज मैंने अपने दादाजी से बात की। उन्होंने बताया कि जब वे मेरी उम्र (14-15 वर्ष) के थे, तब उनके पास मोबाइल या टी.वी. नहीं था। वे अपना समय खेतों में काम करने, पेड़ों पर चढ़ने और दोस्तों के साथ कबड्डी खेलने में बिताते थे। शाम को सभी गाँव के बड़े-बुजुर्ग बरगद के पेड़ के नीचे बैठते थे और किस्से-कहानियाँ सुनाते थे। उस समय लोगों के पास एक-दूसरे के लिए बहुत समय था और 'संवादहीनता' जैसा कोई शब्द उनके जीवन में नहीं था।इसके अलावा गाँव में कोई भी काम लोग मिल-जुलकर किया करते थे- जैसे खेती करना या कोई छोटा-मोटा उद्योग। उसमें भी सभी आपस में बातचीत किया करते थे। अगर किसी घर में कोई अकेला व्यक्ति होता था तो सारा गाँव उसका साथी बन जाता था। उसकी पूरी सुख-सुविधा का ध्यान रखा जाता था।
4

"मिट्टू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!" मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्टू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।

उत्तर:
मिट्टू की खोजएक प्यारा-सा हरे रंग का तोता जिसका नाम "मिट्टू" है, दिनांक 10.04.2026 को सायं 4 बजे के आसपास से लापता हो गया है।उसकी पहचान रंग : हरा चोंच : लाल नाम : मिट्टूयदि किसी को यह तोता मिले या कोई जानकारी हो, तो कृपया नीचे दिए गए पते या मोबाइल नंबर पर संपर्क करें। मकान नंबर-560 लाजपत नगर नई दिल्ली संपर्क करें : XXXXXXXXXXसूचना देने वाले को उचित इनाम दिया जाएगा।

भाषा से संवाद — व्याकरण की बात(5 questions)

1

'मिट्टू' शब्द का अर्थ होता है- मधुरभाषी, मीठा बोलनेवाला या तोता। यह शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है- 'अपने मुँह मियाँ मिट्टू बनना' जिसका अर्थ है 'अपनी प्रशंसा आप करना' या 'अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना'।आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे इस वाक्य में है- "अकेले मिट्टू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।"

उत्तर:
जीव-जंतुओं पर आधारित मुहावरे- कोल्हू का बैल होना – दिन-रात कड़ी मेहनत करना। वाक्य : सोहन अपनी पढ़ाई और नौकरी के चक्कर में कोल्हू का बैल बना रहता है। - ऊँट के मुँह में जीरा – ज़रूरत से बहुत कम चीज़ मिलना। वाक्य : इस पहलवान के लिए दो रोटियाँ तो ऊँट के मुँह में जीरे के समान है। - भीगी बिल्ली बनना – डर के मारे दुबक जाना। वाक्य : कक्षा में शरारत करने वाला रोहन प्रधानाचार्य को देखते ही भीगी बिल्ली बन गया। - गधे को बाप बनाना – अपना काम निकालने के लिए मूर्ख की खुशामद करना। वाक्य : आजकल की दुनिया में अपना काम सिद्ध करने के लिए लोग गधे को भी बाप बना लेते हैं। - मगरमच्छ के आँसू बहाना – दिखावटी दुख प्रकट करना। वाक्य : जब विकास की नौकरी छूटी, तो उसके शत्रुओं ने उसके सामने मगरमच्छ के आँसू बहाए। - बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद – एक अज्ञानी या मूर्ख व्यक्ति गुणवान या मूल्यवान वस्तु की कद्र नहीं जानता। वाक्य : उसे शास्त्रीय संगीत पसंद नहीं आया। बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद। - साँप सूँघ जाना – अचानक सहम जाना या चुप हो जाना। वाक्य : पुलिस को अपने घर के बाहर देखकर चोर को साँप सूँघ गया। - बंदर बाँट करना – किसी चीज़ का सही बँटवारा न करके बेईमानी करना। वाक्य : कंपनी के मुनाफ़े में अधिकारियों ने बंदर बाँट कर ली और कर्मचारियों को कुछ नहीं मिला। - कलेजे पर साँप लोटना – ईर्ष्या या जलन होना। वाक्य : देवांग ने जब नया घर लिया तो उसके भाई के कलेजे पर साँप लोटने लगा।
2

"जगन मास्टर का ध्यान अचानक 'गीतारहस्य' से हटकर मिट्टू के पंखों की 'फड़फड़ाहट' पर गया।" पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि 'फड़फड़ाहट' कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।

उत्तर:
अनुच्छेद में पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि को 'फड़फड़ाहट' कहा गया है। अन्य शब्द और वाक्य-- चहचहाहट : सुबह होते ही पक्षियों की चहचहाहट से पूरा आँगन गूँज उठा। - भिनभिनाहट : गंदी जगहों पर मक्खियों की भिनभिनाहट बढ़ जाती है। - गड़गड़ाहट : आसमान में बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर मोर नाचने लगे। - सरसराहट : सूखी पत्तियों पर किसी के चलने की सरसराहट सुनाई दी।
3

"अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।" उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द-युग्म हैं। वे शब्द जो जोड़े में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है। शब्द-युग्म मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं- पुनरुक्त शब्द-युग्म (बार-बार), सजातीय शब्द-युग्म (उठना-बैठना), समानार्थक शब्द-युग्म (दिन-प्रतिदिन), विपरीतार्थक शब्द-युग्म (दिन-रात)।पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए-

उत्तर:
शब्द-युग्मों के अर्थ एवं वाक्य- वक्त-बेवक्त – अर्थ : कोई भी समय; निर्धारित समय से हटकर कभी भी। वाक्य : ताई वक्त-बेवक्त मिट्टू को पुकारती रहती थीं। - नियम-सिद्धांत – अर्थ : नियम, कानून, नैतिक मूल्य। वाक्य : जगन मास्टर अपने नियम-सिद्धांत पर अड़े रहे। - शादी-ब्याह – अर्थ : शादी और शादी जैसे सुखद उत्सव। वाक्य : ताई के घर में अब शादी-ब्याह जैसी चहल-पहल नहीं थी। - तीज-त्योहार – अर्थ : तीज तथा अन्य त्योहार। वाक्य : गाँव में तीज-त्योहार बड़े चाव से मनाए जाते हैं।
4

"ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, 'मिट्टू आ! मिट्टू आ!!' पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्टू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।"उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए- ऐसा शब्द जो 'तंग' का विपरीतार्थक है; ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा है; ऐसा शब्द जो एक क्रिया है; ऐसा शब्द जो एक संज्ञा है; ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम है; ऐसा शब्द जो एक विशेषण है; ऐसा शब्द जो एक कारक है; ऐसा शब्द जो एक कर्ता है।

उत्तर:
- 'तंग' का विलोम : ढीली - मुहावरा : 'पसीना-पसीना होना' - क्रिया : संभालते रहे, तौलने - संज्ञा : मिट्टू, बाग, पेड़, पंख - सर्वनाम : वह, उसे - विशेषण : एक, दूसरे - कारक : हाथों से, बाग में, पेड़ के पास - कर्ता : मिट्टू (या 'वह')
5

आप जानते ही हैं कि अर्थ के आधार पर वाक्यों के कई भेद होते हैं जैसे- विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक (विधिवाचक), इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक। अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।

उत्तर:
- विधानवाचक वाक्य (सरल जानकारी देने वाला) : "ताई जिस घर में रहती थीं, वह एक विशाल हवेली थी।" - निषेधवाचक वाक्य (नकारात्मक) : "मिट्टू ने बाहर आने की कोई इच्छा प्रकट नहीं की।" - प्रश्नवाचक वाक्य (सवाल पूछना) : भगवान! नैया कैसे पार लगेगी? - विस्मयादिबोधक वाक्य (आश्चर्य या गहरा भाव) : "अरे! यह मिट्टू तो एकदम बदल गया है।" - आज्ञावाचक वाक्य (निर्देश या प्रार्थना) : "राम-राम कहो, सीताराम कहो।" - इच्छावाचक वाक्य (शुभकामना या इच्छा) : "जुग-जुग जियो मिट्टू!" - संदेहवाचक वाक्य (शंका या संभावना) : "शायद ताई को इस नए तोते और पुराने मिट्टू के बीच का अंतर समझ आ गया था।" - संकेतवाचक वाक्य (शर्त या कारण प्रभाव) : "यदि जगन मास्टर रोशनदान खुला न छोड़ते, तो मिट्टू कभी न उड़ता।"

गतिविधियाँ(3 questions)

1

कहानी के रंग – समूहों को अलग-अलग भावनाएँ (दुख, स्नेह, आजादी) दीजिए और इसे मूक अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर:
यह प्रश्न विद्यार्थी अपनी योग्यता अनुसार स्वयं करेंगे। इस हेतु संकेत बिंदु-मूक अभिनय – इसमें आपको बिना बोले भावनाओं को व्यक्त करना है। - दुःख : कंधों को झुकाकर और चेहरे पर उदासी लाकर। - स्नेह : प्यार भरी मुस्कान या गले लगाने के हाव-भाव से। - आजादी : बाहें फैलाकर और गहरी साँस लेकर, जैसे आप खुले आसमान के नीचे हों।
2

पंखों की योजना – छोटे समूहों में सोचें कि अगर आपको मिट्टू की तरह उड़ने का मौका मिले तो आप कहाँ जाते और क्यों?

उत्तर:
यह कल्पनाशीलता का प्रश्न है। इसका उत्तर आप इस प्रकार सोच सकते हैं-कहाँ जाते? – आप कह सकते हैं कि आप हिमालय की चोटियों पर जाते या नीले समुद्र के ऊपर उड़ते, या शायद किसी घने जंगल की सैर करते।क्यों? – क्योंकि ऊँचाई से दुनिया बहुत सुंदर और शांत दिखती है। वहाँ कोई सीमाएँ नहीं होतीं और आप अपनी मर्जी से कहीं भी आ-जा सकते हैं।
3

"पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही" यह वाक्य बताता है कि ताई ने भोजन संबंधी अपनी आवश्यकताओं पर कभी ध्यान नहीं दिया अथवा उन्हें महत्वपूर्ण नहीं माना। हमारे परिवेश में ऐसी बहुत-सी महिलाएँ हैं जो परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती हैं और अपनी आवश्यकताओं की अनदेखी करती हैं। अपने घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों के विषय में जानिए और समझिए कि उनकी पसंद का भोजन माह में कब-कब बनता है।

उत्तर:
यह प्रश्न विद्यार्थी स्वयं अपनी योग्यता अनुसार देंगे।संकेत बिंदु – यह भाग एक बहुत ही महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे की ओर इशारा करता है – कैसे घर की महिलाएँ (माताएँ, ताई, दादी) अपनी पसंद को पीछे रखकर पूरे परिवार की पसंद का ध्यान रखती हैं।इसे पूरा करने के लिए आप यह कर सकते हैं- अपनी माँ, दादी या ताई से पूछें कि उनकी पसंदीदा डिश क्या है? अक्सर हमें पता ही नहीं होता कि उन्हें क्या पसंद है क्योंकि वे हमेशा वही बनाती हैं जो हमें पसंद होता है। यह देखें कि महीने में कितनी बार उनकी पसंद का खाना बनता है?एक सुझाव : आप आने वाले रविवार को उनकी पसंद का कोई विशेष भोजन बनवा सकते हैं या खुद बनाने में मदद कर सकते हैं।

मेरी पहेली(1 questions)

1

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों- तोता, ताई, कुंभ, पिंजरा, कमरा, गंगा।

उत्तर:
1. तोता पहेली : पिंजरे में ही पला-बढ़ा मैं पाकर दाना-पानी। हरा-भरा मिट्टू मैं जपता, राम-राम की बानी।2. ताई पहेली : हुई अकेली दुनिया में मैं कई बच्चों की माई। बोलूँ किससे कोई तो हो, कहे जो मुझको ताई।3. कुंभ पहेली : लोग करोड़ों गंगा जी के तट पर करते मेला। दुनिया भर के नर-नारी साधु-संतों का रेसा।4. पिंजरा पहेली : लोहे की जाली वाला मैं जलवायु भंडार। तोते जैसे मधुर पंछियों का मैं ही संसार।5. कमरा पहेली : मैं मानव का सुखद बसेरा चार दीवारों वाला। मुझमें बसकर ही कहलाता है कोई घरवाला।6. गंगा पहेली : पावन जल वाली सरिता मैं महाकुंभ रचवाती। हर-हर गंगे कहकर दुनिया मुझमें खूब नहाती।

Other Chapters