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Class 9 · HindiNCERT 2026 Revised Syllabus

Chapter 5: आखिरी चट्टान तक (0901CH05)

R1 and R2 book- Ganga

मोहन राकेश का कन्याकुमारी का यात्रा-वृत्तांत — सूर्यास्त, सागर के विस्तार और अकेलेपन की आत्मानुभूति से जुड़ा जीवंत अनुभव।

Chapter code: 0901ch05 · Book: R1 and R2 book- Ganga · Class 9 Hindi

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रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क(5 questions)

1

लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा? (क) विवेकानंद चट्टान से (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से (ग) पच्छिमी क्षितिज से (घ) सैंड हिल से

उत्तर:
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से।क्यों – लेखक ने जिस एक ऊँचे टीले पर बैठकर सूर्यास्त देखा था, वह अरब सागर की दिशा में स्थित था।
2

"मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।" यह कथन लेखक की किन मनःस्थिति को दर्शाता है? (क) मौन हो जाना (ख) विस्मित हो जाना (ग) भ्रमित हो जाना (घ) आशंकित होना

उत्तर:
(ख) विस्मित हो जाना।क्यों – लेखक सचमुच सागर के विस्तार की शक्ति देखकर विस्मित था। दूर तक फैले समुद्र के अंतहीन विस्तार को देखकर वह चकित था।
3

"मैंने सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।" इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है? (क) करुण (ख) विनम्रता (ग) आत्मीयता (घ) संतुष्टि

उत्तर:
(घ) संतुष्टि।क्यों – पहली बार खुद कोई सफलता मिली हो तो संतुष्टि मिलती ही है।
4

"शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति" वाक्य में वर्णन है- (क) बलखाती लहरों का (ख) सागर की व्यापकता का (ग) सूर्यास्त के दृश्य का (घ) पच्छिमी क्षितिज का

उत्तर:
(ख) सागर की व्यापकता का।क्यों – पाठ में सागर की ऊँची-ऊँची लहरों की शक्ति और सागर के विस्तार की बात की गई है। लेखक को उस असीम विस्तार में शक्ति का बोध हुआ।
5

लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि- (क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है। (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है। (ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है। (घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।

उत्तर:
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।क्यों – प्रस्तुत पाठ केवल कन्याकुमारी के सौंदर्य-वर्णन अथवा लेखक के यात्रा-वृत्तांत का नहीं, अपितु लेखक की जीवंत अनुभूतियों का है। जब लेखक चट्टान पर पहुँचता है तो उसे लगता है कि उसने दुनिया जीत ली। समुद्र के विस्तार को देखकर चकित होना, लहरों के बढ़ने से घबराना — ये सब लेखक ने ऐसे व्यक्त किए हैं मानो ये हमारी अपनी अनुभूतियाँ हों।

मेरी समझ मेरे विचार(5 questions)

1

यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?

उत्तर:
जब यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था तो लेखक ने देखा कि अरब सागर की तरफ एक और ऊँचा टीला है जो उधर के विस्तार को ओट में लिए हुए है। सूर्यास्त पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में देखा जा सके, इसके लिए कुछ देर सैंड हिल पर रुककर लेखक दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। लेखक को वहाँ और भी ऊँचे टीले दिखाई दिए। इस प्रकार वह एक-के-बाद-एक कई टीले पार कर गया और अंत में एक टीले पर जाकर रुका जहाँ से उसे समुद्र का संपूर्ण विस्तार नज़र आया।
2

लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?

उत्तर:
लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में बताया कि वहाँ आठ हजार की आबादी में कम-से-कम चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक ऐसे हैं जो बेकार हैं और वे रोज़ नौकरियों के लिए अर्जियाँ देते रहते हैं। वे अपना गुजारा करने के लिए छोटे-मोटे काम जैसे- फोटो-एल्बम बेचना, बाइनाक्यूलर से सूर्य दर्शन कराना इत्यादि करते हैं। वहाँ की स्थानीय युवतियाँ टोकरियों में रखकर शंख और मालाएँ बेचती हैं। वहाँ पर बेकारी की समस्या बहुत बड़ी है। वहाँ के लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं।
3

"अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया" इस पंक्ति में 'प्रयत्न की सार्थकता' से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
प्रयत्न की सार्थकता का अभिप्राय है — सूर्यास्त को पूरे विस्तार से देखने की सफलता। लेखक ने सबसे ऊँचे टीले पर बैठकर सूर्यास्त देख लिया। यह उसके प्रयत्न की सफलता थी।
4

यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।

उत्तर:
लेखक जब 'सैंड हिल' को छोड़कर अरब सागर की तरफ के टीलों की ओर बढ़ा तो एक सबसे ऊँचे टीले पर पहुँचकर उसे संतोष हुआ। उसे लगा मानो उसने दुनिया के सबसे ऊँचे टीले को फतह कर लिया हो; परंतु वहीं लेखक को बिल्कुल नवीन अनुभव भी हुए।लेखक ने वहाँ रेत पर दूर तक बने केवल अपने पैरों के निशान देखे। रेत इस तरह चमक रही थी जैसे- अभी-अभी उसका निर्माण करके उसे वहाँ डाल दिया गया हो और वहाँ अपने पैरों के निशान देखकर लेखक को लगा जैसे रेत पहली बार उन निशानों से टूटी हो, इसलिए उसे यह सोचकर सिरहन हुई। थोड़ी ही देर में रंग-बिरंगी किरणें बिखेरने के पश्चात सूरज स्याह हो गया। लेखक के मन में धीरे-धीरे डर समाने लगा। उसे दूर पेड़ों के झुरमुट स्याह नज़र आ रहे थे। लेखक ने रेत पर सुनहरे रंग और लाल रंग के पश्चात स्याह रंग को भरते देखा जो उसके लिए नवीन अनुभव था।साथ ही उसे उन टीलों से वापस लौटने का डर भी सता रहा था क्योंकि वह वहाँ अकेला था। उसने समुद्र तट पर सुरमई, खाकी, पीली और लाल रंग की रेत देखी। उसने इससे पहले रेत के इतने रंग नहीं देखे थे। लेखक ने उस स्थान पर तट की चौड़ाई मात्र तीन-चार फुट तक महसूस की जो बहुत कम थी।
5

यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।

उत्तर:
लेखक साहसी और जिज्ञासु प्रवृत्ति का व्यक्ति था। पाठ में दो महत्वपूर्ण अंश हैं जहाँ लेखक ने अपनी मानसिक दृढ़ता और जिज्ञासु प्रवृत्ति का परिचय दिया:(i) लेखक जब सूर्यास्त देखने हेतु 'सैंड हिल' पर पहुँचा तो उसका मन और भी कुछ खोजने लगा। उसे अरब सागर की ओर एक ऊँचा टीला नज़र आया। लेखक वहीं चल दिया। वहाँ पहुँचकर उसे अन्य टीले भी नज़र आए। लेखक की टाँगे थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था और वह एक-एक को पार करता हुआ सबसे ऊँचे टीले पर चढ़कर समुद्र के विस्तार और सूर्यास्त को निहारने लगा। वहीं रेत पर अपने पदचिह्न देखकर उसे एहसास हुआ कि यहाँ वह अकेला है। उसे थोड़ी सिरहन हुई पर वह मानसिक रूप से मजबूत रहा।(ii) जब सूर्यास्त के पश्चात चारों तरफ स्याह हो गया तो लेखक के मन में एक बार डर आया कि क्या वह सभी टीलों को पार करके होटल तक पहुँच पाएगा? परंतु अगले ही पल उसने हिम्मत बटोरी और टीलों को पार करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ने लगा। वहाँ समुद्र तट की चौड़ाई मात्र तीन से चार फुट थी। तभी वहाँ लहर आकर लेखक के पैरों से टकराई। उसे लगा कि जैसे समुद्र उसे अपनी ओर खींच लेगा। वह घबराया जरूर, पर हिम्मत नहीं हारा और जूते हाथ में लेकर तेजी से टीले पर चढ़ गया क्योंकि समुद्र का पानी तेजी से बढ़ रहा था। लेखक ने हिम्मत से स्वयं को सुरक्षित किया।

विधा से संवाद — यात्रा का वृत्तांत(1 questions)

1

मोहन राकेश का 'आखिरी चट्टान तक' यात्रा-वृत्तांत केवल स्थान चित्रण नहीं है बल्कि इसमें प्रकृति का सजीव रूपांकन, मानव-जीवन और समाज की झलक तथा आत्मानुभूति का गहरा समन्वय मिलता है।नीचे यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों/विशेषताओं को कुछ प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से दर्शाया गया है:1. दृश्य वर्णन 2. आत्मानुभूति व भावनाएँ 3. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य 4. जीवन-दर्शन 5. शैलीगत विशेषताएँ 6. रोमांच व संघर्षइन्हें पढ़कर यात्रा-वृत्तांत की रचना-प्रक्रिया को समझने का प्रयास कीजिए। अपनी किसी यात्रा को इन बिंदुओं के माध्यम से समझाइए।

उत्तर:
मेरी गोवा की यात्रा1. दृश्य वर्णन अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य; अगुआड़ा किले से समुद्र का विशाल और अंतहीन विस्तार; रेत पर सूर्यास्त के विभिन्न रंग; सागर की ऊँची लहरों का विस्मय और रोमांच।2. आत्मानुभूति व भावनाएँ सागर के प्रथम दर्शन से विस्मयपूर्ण अनुभूति; लहरों की ऊँचाई से भय, पर उसके प्रति आकर्षण भी; कुदरत की खूबसूरती का एहसास; कैंडोलिम और कलागुट के तटों का अद्भुत सौंदर्य।3. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य सद्भावना युक्त संस्कृति; तुलसी पूजा और गणपति पूजन का विशेष महत्व; गिरजाघरों और मंदिरों का समान रूप से सम्मान; मिलनसार लोग।4. जीवन-दर्शन कुदरत की कलाकारी के दर्शन; सौंदर्य से लगाव पर भय से खिंचाव; आत्मसंतुष्टि; विस्मित खिंचाव; हृदय पटल पर चित्रात्मक अंकन।5. शैलीगत विशेषताएँ संगीत एवं उत्सवों की गहराई; मुख्य भाषा कोंकणी (पर लोगों ने हमसे हिंदी में बात की); रोमन लिपि का प्रचलन; इंडो-पुर्तगाली शैली की झलक; देवनागरी लिपि का प्रयोग।6. रोमांच व संघर्ष • लहरों का शोर और नारियल के पेड़ों का सौंदर्य • पानी से सफेद झाग • लहरों के साथ बह जाने का भय • समुद्र का सौंदर्य भी और उसकी गहराई का खौफ भी • समुद्र की लहरों से बचने के लिए जूते हाथ में लेकर भागनाप्रस्तुत वर्णन के अतिरिक्त छात्र स्वयं भी अपनी इच्छानुसार किसी यात्रा को प्रस्तुत बिंदुओं के आधार पर व्यक्त कर सकते हैं।

विषयों से संवाद — यात्रा और खोज(1 questions)

1

संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है। पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए।

उत्तर:
कुछ प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत एवं उनके लेखक:1. एक बूँद सहसा उछली – यूरोप – अज्ञेय 2. हिमालय यात्रा – हिमालय – काका कालेलकर 3. तिब्बत में सवा वर्ष – तिब्बत – राहुल सांस्कृत्यायन 4. सैलानी की डायरी – भारत भ्रमण – राजेन्द्र अवस्थी 5. अरे यायावर रहेगा याद – तिब्बत – राहुल सांस्कृत्यायन 6. ऋणजल धनजल – बिहार (बाढ़/सूखा क्षेत्र) – फणीश्वरनाथ रेणु 7. पार उतीर कै जान्दे – विभिन्न यात्राएँ – नागार्जुन 8. सरयूपार की यात्रा – अयोध्या – भारतेंदु हरिश्चंद्र 9. मेरी लद्दाख यात्रा – लद्दाख – राहुल सांस्कृत्यायन 10. हँसते निर्झर चहकती भट्टी – सोवियत संघ की यात्रा – विष्णु प्रभाकर 11. अप्रवासी की यात्राएँ – यूरोप और अमेरिका – डॉ. नगेंद्र 12. लखनऊ की यात्रा – लखनऊ – भारतेंदु हरिश्चंद्र 13. देश-विदेश – भारत और विदेश की यात्रा – रामधारी सिंह 'दिनकर' 14. पच्चीस साल रूस में – रूस – राहुल सांस्कृत्यायन

मेरे देश की धरती(5 questions)

1

कन्याकुमारी भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित एक तटीय शहर है। भारत के समुद्री तट पर स्थित अन्य राज्यों के नाम तथा उनकी अवस्थिति को भारत के मानचित्र पर चिह्नित कीजिए।

उत्तर:
भारत के तटीय राज्य इस प्रकार हैं:1. गुजरात 2. महाराष्ट्र 3. गोवा 4. कर्नाटक 5. केरल 6. तमिलनाडु 7. आंध्र प्रदेश 8. ओडिशा 9. पश्चिम बंगाल 10. पुडुचेरी 11. चेन्नई 12. दादरा नगर हवेली
2

यात्रा करना सभी को अच्छा लगता है। आपके मन में भी कुछ जगहों को देखने की इच्छा अवश्य हुई होगी। अपनी पसंद की उन जगहों की सूची नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार बनाइए।

उत्तर:
पर्यटन स्थलों की सूची1. किन्नौर – हिमाचल प्रदेश – पर्वतीय – ठंडी – अप्रैल से जून 2. महाकाल – मध्य प्रदेश – मैदानी – गर्म – अक्टूबर से मार्च 3. मनाली – हिमाचल प्रदेश – पर्वतीय – ठंडी – मार्च से जून 4. जगन्नाथपुरी – ओडिशा – मैदानी/समुद्री – गर्म और आर्द्र – अक्टूबर से फरवरी 5. सियाचीन ग्लेशियर – लद्दाख – पर्वतीय – अत्यधिक ठंड – मई से सितंबर
3

कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल एवं जन-जीवन का वर्णन करते हुए बताइए कि वहाँ की स्थिति आपके राज्य अथवा शहर/गाँव से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर:
कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, पर्यटन स्थल एवं जन-जीवनभौगोलिक स्थिति कन्याकुमारी भारत के दक्षिण में तमिलनाडु में स्थित है। यह अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के संगम पर स्थित है। इसे भारत के दक्षिणी क्षेत्र का अंतिम स्थान माना जाता है। (दिल्ली उत्तर भारत में स्थित है; यहाँ यमुना नदी बहती है और यह भारत की राजधानी है।)परिवेश समुद्री स्थान होने के कारण यहाँ का वातावरण नमी वाला और शांत होता है। नारियल के पेड़ इस क्षेत्र को और सुंदर बनाते हैं। यहाँ एक ही स्थान से सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य देखने को मिलता है। (दिल्ली में शहरी और अत्यधिक आधुनिक जीवन है, जहाँ बड़ी-बड़ी इमारतें, पुल, सड़कें और बाजार हैं।)पर्यटन-स्थल कन्याकुमारी में तिरूवल्लुवर प्रतिमा, कन्याकुमारी मंदिर, विवेकानंद रॉक मेमोरियल तथा सूर्योदय और सूर्यास्त के लिए विशेष दर्शनीय स्थल हैं। (दिल्ली में इंडिया गेट, लाल किला, कुतुब मीनार, अक्षरधाम, लोटस टेम्पल, जंतर-मंतर, डॉल म्यूज़ियम, नेहरू तारामंडल आदि हैं।)जन-जीवन कन्याकुमारी का जीवन प्राकृतिक एवं शांत व सरल है। यहाँ के लोग सीप व मालाएँ बेचते हैं, मछली पकड़ने तथा पर्यटन पर निर्भर रहते हैं। यहाँ के लोग तमिल भाषा बोलते हैं और दक्षिण भारतीय संस्कृति अपनाते हैं। (दिल्ली का जीवन भागदौड़ वाला है; अनेक राज्यों से आए लोग व्यापार करते हैं तथा ऊँची कंपनियों में कार्य करते हैं।)विशेष – कन्याकुमारी एक शांत स्थल है और दिल्ली व्यस्त और विकसित। कन्याकुमारी में रोजगार के अभाव के कारण बेरोजगारी है; दिल्ली में भरपूर रोजगार है।
4

इस यात्रा-वृत्तांत में कन्याकुमारी में स्थित चट्टान को आखिरी चट्टान कहा गया है। पुस्तकालय या अन्य स्रोतों तथा समाज विज्ञान के अपने शिक्षक से बातचीत करके पता लगाइए कि वर्तमान समय में भारत का अंतिम छोर (दक्षिणतम बिंदु) किसे माना जाता है। उस स्थान के विषय में लिखिए।

उत्तर:
वर्तमान समय में भारत का दक्षिणतम बिंदु 'इंदिरा पॉइंट' को माना जाता है। यह भारत का सबसे अंतिम भू-भाग है:• यह ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित है। • यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आता है। • यह भूमध्य रेखा के बहुत निकट है। • यहाँ एक प्रसिद्ध लाइट हाउस भी है, जिसका समुद्री मार्ग दर्शन के लिए उपयोग होता है। • इसका पुराना नाम पिग्मेलियन पॉइंट था, जिसे बाद में बदलकर इंदिरा पॉइंट किया गया। • 2004 में महासागर सुनामी में यह क्षेत्र 4 से 5 मीटर तक समुद्र में धँस गया। • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग के पास स्थित होने के कारण इसका बहुत महत्व है। • यह भारत की समुद्री सीमा और समुद्री सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। • यहाँ सामान्य नागरिकों के लिए जाना आसान नहीं क्योंकि यह एक संवेदनशील क्षेत्र है।
5

इंटरनेट या अन्य किन्हीं माध्यमों से पता लगाइए कि आखिरी चट्टान में वर्णित कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक चट्टान के स्वरूप में किस प्रकार का विस्तार हुआ है? (संकेत – तिरुवल्लुवर की प्रतिमा इत्यादि)

उत्तर:
विवेकानंद स्मारक चट्टान पहले एक प्राकृतिक चट्टान थी, लेकिन आज इसके स्वरूप में निम्न प्रकार का विस्तार हुआ है:भौतिक विस्तार – वर्तमान में चट्टान पर भव्य स्मारक निर्मित हो चुका है। यहाँ एक पूर्ण स्थापत्य परिसर बन गया है। यहाँ अनेक मंडप और संरचनाएँ बन गई हैं।संरचनात्मक विस्तार – चट्टान पर स्थायी मंदिर का निर्माण किया गया है। चट्टान को मजबूत और सुरक्षित बनाने हेतु आधार-संरचना विकसित की गई।आध्यात्मिक विस्तार – यहाँ ध्यान करने के लिए विशेष ध्यान मंडप बना है। यहाँ एक आध्यात्मिक केंद्र भी विकसित किया गया है।सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय विस्तार – यह स्मारक अब राष्ट्रीय गौरव और एकता का प्रतीक बन गया है। यह पूरे देश के लिए एक प्रेरणा-स्थल है।उपयोग की दृष्टि से – यहाँ तक पहुँचने के लिए फेरी सेवा उपलब्ध हैं। पर्यटकों के लिए सुविधाएँ विकसित हो गई हैं।

हस्तशिल्प कौशल(4 questions)

1

"दो स्थानीय नवयुवतियाँ उन्हें अपनी टोकरियों से शंख-मालाएँ दिखला रही थीं।"उपर्युक्त पंक्ति में स्थानीय युवतियों द्वारा यात्रियों को दिखाए जाने वाली शंख-मालाओं का उल्लेख है। यह भारतीय हस्तकला उद्योग के एक पारंपरिक रूप को दर्शाता है। शिक्षक की सहायता से हस्तकला और कुटीर उद्योग के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।

उत्तर:
भारतीय हस्तकला एवं कुटीर उद्योगहस्तकला – हस्तकला वे वस्तुएँ होती हैं जिन्हें कारीगर अपने हाथों से बिना मशीनी सहायता से बनाता है। ये भारत की संस्कृति और कला को दर्शाती हैं। उदाहरण — मिट्टी के बर्तन, लकड़ी के बर्तन व खिलौने, कढ़ाई-बुनाई संबंधी हस्तनिर्मित वस्तुएँ, जूट के थैले इत्यादि।कुटीर उद्योग – कुटीर उद्योग वे उद्योग होते हैं जो घर या छोटे स्तर पर चलाए जाते हैं। 'कुटीर' का अर्थ होता है 'घर'। ऐसे उद्योगों को घर पर प्रायः घर के सभी सदस्यों द्वारा मिलकर किया जाता है। इस उद्योग में पूँजी कम लगती है। उदाहरण — खादी उद्योग, हस्तकरघा, अचार-पापड़, अगरबत्ती, पतंग बनाना तथा लिफाफे बनाना इत्यादि।महत्व – यह उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण है और वहाँ की आय का एक महत्वपूर्ण जरिया है। ये पारंपरिक कला को सुरक्षित रखते हैं। ये देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं और निर्यात बढ़ाते हैं। ये महिलाओं और छोटे कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाते हैं।
2

किसी भी स्थानीय शिल्पकार से बात करके निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी संगृहीत कीजिए:• शिल्प का नाम • यह कार्य कब से कर रहे हैं? • इसका प्रशिक्षण कहाँ से लिया? • शिल्प निर्माण में घर की महिलाओं की साझेदारी • प्रयुक्त सामग्री, तकनीक, लागत और विपणन • औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण

उत्तर:
शिल्पकार के साक्षात्कार द्वारा प्रस्तुत जानकारी• शिल्पकार का नाम – रामलाल वर्मा • शिल्प का काम – मिट्टी के फूलदान बनाना • कार्य कब से कर रहे हैं? – पिछले 20 वर्षों से • कार्य का प्रशिक्षण कहाँ से लिया? – शुरुआत में अपने दादा और पिता से सीखा। बाद में सरकारी कुटीर प्रशिक्षण केंद्र से 6 महीने का औपचारिक प्रशिक्षण लिया। वैसे यह पारंपरिक व्यवसाय है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। • शिल्प निर्माण में महिलाओं की भागीदारी – घर की महिलाओं की इस कार्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। वे मिट्टी के फूलदानों को सुंदर रंग में रंगती हैं और उस पर विभिन्न प्रकार के बेल-बूटों की सजावट करती हैं। यहाँ तक कि महिलाएँ फूलदान के लिए मिट्टी भी तैयार करती हैं। • प्रयुक्त सामग्री, तकनीक और लागत – एक साधारण मिट्टी का फूलदान बनाने में 50-100 रुपये की लागत आती है और इसे बनाने में 1-2 दिन लग जाते हैं। फिर सूखने के पश्चात इस पर रंगाई और सजावट का कार्य किया जाता है। • औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण – मुझे इस शिल्प का मूल ज्ञान परिवार से ही मिला लेकिन कौशल को और बेहतर बनाने के लिए सरकारी कुटीर उद्योग प्रशिक्षण केंद्र से 6 महीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वहाँ से पारंपरिक के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का ज्ञान, नए-नए डिज़ाइन बनाना, उत्तम गुणवत्ता के साथ कार्य, पैकिंग करना, कीमत तय करना आदि व्यापारिक जानकारियाँ तथा ऋण, सब्सिडी व अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी सीखी।इस प्रकार प्रस्तुत शिल्पकार बहुत ही आत्मविश्वासी और संतोषी व्यक्ति लगे। इनसे बातचीत का अनुभव बहुत ही अच्छा और यादगार रहा।
3

डिजिटल खरीदारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने में किस प्रकार उपयोगी है?

उत्तर:
वर्तमान में डिजिटल के माध्यम से खरीदारी और ई-वाणिज्य का चलन बढ़ा है। ये कुटीर उद्योग के लिए बहुत महत्वपूर्ण साधन बन गए हैं। ये छोटे शिल्पकारों और कारीगरों को स्थानीय स्तर से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने में मदद करते हैं।आज डिजिटल खरीदारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योग के लिए निम्न प्रकार से उपयोगी हैं:बाजार हेतु व्यापकता – पहले के समय में कुटीर उद्योग केवल स्थानीय बाजारों तक ही सीमित था। कारीगर सामान बनाते और बाजार में जाकर बेचते थे, परंतु वर्तमान में ऑनलाइन शॉपिंग के चलते अब ये सामान एक स्थान से दूसरे स्थान — यहाँ तक कि देश-विदेश में बेचे जाते हैं। इस प्रकार कारीगरों की पारंपरिक संस्कृति और बेजोड़ कला का प्रचार व विस्तार दूर-दूर तक हो गया।सीधे उपभोक्ता से संबंध – ई-वाणिज्य के कारण अब बिचौलियों की दखल से कारीगरों को जहाँ एक तरफ राहत मिली, वहीं दूसरी तरफ सीधे व्यापार के कारण उन्हें अधिक मुनाफा भी होने लगा। कारीगरों को अपनी मेहनत का पूरा पैसा मिलने लगा।कम लागत और मुनाफा अधिक – ई-व्यापार के चलते अब कारीगरों को किसी दुकान अथवा सामान बेचने हेतु किसी स्थान की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में कुटीर उद्योग से जुड़े लोग अपने घर में सामान तैयार करते हैं (जैसे जूट से बनी सामग्री, अचार-मुरब्बे इत्यादि) और सीधे ऑनलाइन के जरिए बेचकर मुनाफा कमाते हैं।डिजिटल भुगतान की सुविधा – इस प्रकार के व्यापार से आसानी से चीजें देखी भी जा सकती हैं और उनका भुगतान भी ऑनलाइन हो जाता है; जिससे ग्राहकों को बहुत आसानी होती है।
4

"हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी इकट्ठा कीजिए और अपनी कक्षा में उस पर चर्चा कीजिए।

उत्तर:
सरकार द्वारा शिल्प कलाओं विशेषकर हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने हेतु अनेक महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे-विभिन्न योजनाओं का संचालन – सरकार द्वारा (नेशनल हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम) जैसी योजनाएँ शुरू की गई हैं जिनके द्वारा शिल्पकारों को प्रशिक्षण, डिजाइन, विकास व तकनीकी सुविधाएँ मुहैया कराई जाती हैं।क्लस्टर (सामूहिक) विकास – इसके अंतर्गत शिल्पकारों के समूह बनाए जाते हैं जिससे उन्हें सामूहिक उत्पादन, आधुनिक उपकरण और बेहतर बाजार मिलते हैं।आर्थिक सहायता और सब्सिडी – सरकार कुटीर उद्योगों को ऋण, सब्सिडी और वित्तीय सहायता देती है।कौशल विकास प्रशिक्षण – शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक सिखाने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।विपणन (Marketing) में सहायता – सरकार द्वारा प्रदर्शनियों, मेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनों द्वारा हस्तशिल्प कला के कारीगरों को बाजार मिलता है और ई-व्यापार के जरिए सीधे ग्राहकों से जोड़ा जाता है।सामाजिक सुरक्षा व बीमा – कारीगरों को बीमा, स्वास्थ्य योजनाएँ और पेंशन की सुविधा दी जाती है।महिलाओं को विशेष प्रोत्साहन – विशेष योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण और रोजगार दिया जाता है।पुरस्कार एवं सम्मान – सम्मान के द्वारा शिल्पकारों को प्रोत्साहन दिया जाता है और आगे बढ़ने हेतु प्रेरित किया जाता है।

मिलकर चलें(4 questions)

1

आपकी कक्षा में कुछ विशेष आवश्यकता वाले साथी भी होंगे जिन्हें अपने दैनिक जीवन में अनेक तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता होगा। ऐसे साथियों को अगर किसी यात्रा पर जाना हो तो उनके समक्ष किस प्रकार की चुनौतियाँ आ सकती हैं?

उत्तर:
मेरी कक्षा में 'अमीना' नाम की छात्रा है। वह दृष्टिबाधित है, शायद जन्मांध है। मैं चाहती हूँ कि वह भी यात्रा में हमारे साथ चले। परंतु उसके सामने बाधाएँ ही बाधाएँ हैं। उसका बस/गाड़ी पर चढ़ना या पैदल चलना, भोजन करना, प्राकृतिक दृश्य देखना — सब कुछ ही बाधित है। उसे एक सहायक अवश्य चाहिए। वह सहायक भी उसकी हमउम्र कोई लड़की हो तो अच्छा है। वह सहायिका पूरा समय उसके साथ रहे। वह उसकी सहेली हो तो अच्छी बात है, वरना कोई सहायक कर्मचारी साथ होना चाहिए।उसका संकट यह है कि वह दृश्य कैसे देखेगी? उसके बिना खुश कैसे होगी? किलकारी कैसे मारेगी? सब बच्चे मज़ा ले रहे होंगे — वह गुमसुम बैठी और उदास तो नहीं होगी।
2

विशेष आवश्यकता वाले साथियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कुछ ऐसे सुझाव दीजिए जो उनकी यात्रा को सहज बनाने में उपयोगी हों।

उत्तर:
मेरा सुझाव है कि ऐसे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए उनके सहायक और प्रशिक्षक साथ होने चाहिए। वे उन्हें वाहन पर चढ़ाएँ, बिठाएँ, उठाएँ, उतारें, पैदल चलते हुए साथ रहें। भोजन हाथ में दें। जो-जो दृश्य सामने आएँ, उस बारे में उन्हें बताएँ, उन्हें अनुभव कराएँ।यदि वह दृष्टिबाधित विद्यार्थी कविता, भाषण, कहानी, चुटकला, नाटक आदि कर सकता है तो उसे अवसर दिलवाएँ। इससे उसका मन बहलेगा। उसका विश्वास बढ़ेगा। वह स्वयं को सबके बराबर समझेगा और संतुष्ट होगा।
3

अपने द्वारा दिए गए सुझावों पर विद्यालय के विशेष शिक्षा शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए और समझिए कि आपके द्वारा सुझाए गए उपाय कितने प्रभावी हैं तथा उनमें और क्या बदलाव किए जा सकते हैं?

उत्तर:
जब मैंने अपनी कक्षा अध्यापिका से बात की तो वे बहुत खुश हुई। उन्होंने महिला-सहायिका की विशेष ड्यूटी लगवाई। वह हमेशा अमीना के साथ रहेगी। अध्यापिका ने मुझसे कहा — "सरला! तुम बहुत अच्छी हो, करुणावान हो। तुम अपनी सहेली के साथ रहना। उसे हर अनुभव सुनाना। उससे बातें करना, गप्पें मारना। अगर कोई उसे परेशान करे तो आगे आना।"
4

प्राप्त सुझावों के विषय में कक्षा के विशेष आवश्यकता वाले साथियों से भी चर्चा कीजिए और उनकी राय जानने का प्रयास कीजिए।

उत्तर:
मैंने स्वयं अमीना से बात की। वह मेरी बात सुनकर बहुत खुश हुई। उसने मुझे गले से लगा लिया। बोली — "तुम मेरी पिछली जन्म की साथी हो। सुनो! मैं तुम पर कम-से-कम बोझ बनूँगी। मुझे जहाँ बिठा दोगे, बैठ जाऊँगी। मैं गाना गाऊँगी, सबका मनोरंजन करूँगी। और सरला! इनते साथियों के बीच समुद्र के किनारे कभी गई नहीं हूँ। मुझे बहुत खुशी मिलेगी। बस मुझ पर दया न करना! मुझे अपनी सहेली समझना।"

सृजन — प्रकृति की ओर(1 questions)

1

क्या आपने कभी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का दृश्य देखा है? एक दिन सुबह जल्दी उठकर उगते सूरज की लालिमा को देखिए और अस्त होते सूर्य के साथ शाम का भी आनंद लीजिए। अब इन दोनों दृश्यों की तुलना करते हुए अपने अनुभव का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मैंने सूर्यास्त का दृश्य तो अनेक बार देखा था। कभी कार से जाते हुए सड़क पर सामने लाल और नारंगी सूरज, जो आकर्षक तो होता पर बिल्कुल शांत-सा। उसके आस-पास आसमान भी लाल और नारंगी रंग की परतों से घिरा रहता। पक्षी भी चीं-चीं करते काले-काले से नज़र आते, जो अपने घोंसलों की तरफ लौट रहे होते और धीरे-धीरे सूरज डूब जाता और अँधेरा हो जाता। ऐसा ही दृश्य मैंने अनेक बार अपनी छत से भी देखा है। जब बादल अनेक रंगों से आसमान को सजा देते हैं। कभी-कभी तो सारा वातावरण इतना पीला हो जाता है मानो किसी ने उसे हल्दी से रंग दिया हो। फिर अगले ही पल अँधेरा हो जाता है।एक दिन जब माँ ने कहा कि कल हम प्रातः छह बजे ही हरिद्वार के लिए निकलेंगे, तब उस दिन पहली बार मैंने प्रातः उठकर सूर्योदय अपनी छत से देखा। मैं तो मंत्रमुग्ध-सा देखता रहा क्योंकि हमारा घर पूर्व दिशा की तरफ है। घर के बाहर एक बड़ा-सा विशाल पीपल का पेड़ है। प्रातः काल जब सूरज उदित हुआ तो वह पत्तों से छनकर दिख रहा था। वह भी लाल और नारंगी था, परंतु किसी तेज चमकते बल्ब की तरह गरमाहट लिए हुए। उसकी आभा से पेड़ का पत्ता-पत्ता नारंगी रंग में रंगा हुआ था। आकाश में एक चमक आ गई थी। पक्षी चहचहाते हुए उड़ रहे थे और धीरे-धीरे दिन निकल आया। चारों तरफ उजाला फैल गया।सूर्योदय के इस अनुपम सौंदर्य ने मेरा मन मोह लिया। सूर्यास्त का सूरज भी लाल था परंतु सूर्योदय का सूरज चमकीला लाल और ताजगी भरा था जो मन में उल्लास भर रहा था।

अनुभव की साझेदारी(1 questions)

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विधा से संवाद के अंतर्गत आपने दिए गए बिंदुओं के माध्यम से यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों के विषय में जाना और समझा। इन तत्वों को ध्यान में रखकर आप भी अपने घूमे हुए किसी प्रिय स्थान के अनुभवों पर एक यात्रा संस्मरण लिखिए।

उत्तर:
एक बार मैं अपने माता-पिता के साथ ऋषिकेश से ऊपर एक स्थान 'रानी-चोरा' गया। मुझे नाम थोड़ा-सा अजीब लगा। वहाँ पहुँचने के रास्ते बहुत सँकरे और पगडंडीनुमा थे। पहाड़ी रास्तों पर हमारी गाड़ी धीरे-धीरे उछलती हुई आगे बढ़ रही थी। मैं कुछ घबरा रहा था परंतु फिर भी हिम्मत से बैठा रहा। थोड़ी देर की कठिन चढ़ाई के पश्चात हम ऊपर पहुँच गए। वहाँ का नज़ारा देखकर मैं अचंभित था। वहाँ करीब 15 टेंट लगे थे जिनमें हमें ठहरना था। उन सभी टेंटों के बाहर सेब के पेड़ थे जिन पर कुछ हरे और कुछ लाल सेब लगे हुए थे। सामने इतने बादल तैर रहे थे मानो हम बादलों के ऊपर हों। चारों तरफ पहाड़ों पर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष मानो आकाश तक पहुँचने का रास्ता हों।मैं तो चारों तरफ घूमकर उस सौंदर्य को निहार रहा था कि तभी पापा ने टेंट की ज़िप खोलकर अंदर चलने के लिए कहा। वह टेंट बहुत सुंदर सजा था। अंदर दो कुर्सी और एक मेज रखी थी, बहुत सुंदर बिस्तर बिछा था और पीछे की तरफ बाथरूम बना था। मैंने पहली बार टेंट अंदर से देखा था। तभी छोटी बहन चीख पड़ी। उसके इशारे पर हमने देखा कि टेंट की छत पर और कोनों में बहुत बड़ी-बड़ी मकड़ियाँ चिपकी हुई हैं जिन्हें देखकर मैं भी डर गया। तभी वहाँ का संचालक आया और बोला कि ये जंगल की मकड़ियाँ हैं, काटेगी नहीं! पर हमें बहुत डर लग रहा था।खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे थे कि संचालक फिर आया। कहने लगा कि टेंट की ज़िप अंदर से अच्छे से बंद कर लें तथा लाइट भी बंद कर लें क्योंकि यह जंगल का क्षेत्र है, रोशनी देखकर अक्सर टाइगर आ जाता है। यह सुनते ही हमारे शरीर में झुरझुरी-सी दौड़ गई। हमने झटपट लाइट बंद की और धीमी रोशनी में मोबाइल को तकिए की ओट में चलाया। जैसे-तैसे हमने वहाँ रात काटी परंतु अगली सुबह नाश्ते के बाद हम वहाँ से दूसरे स्थान की ओर चल दिए क्योंकि हम अब दूसरी रात वहाँ काटने के कतई भी मूड में नहीं थे। यह यात्रा मुझे हमेशा एक रोमांच की याद दिलाती है।

चर्चा-परिचर्चा(3 questions)

1

'यात्राएँ हमें समृद्ध करती हैं' विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा आयोजित कीजिए।

उत्तर:
अध्यापक – बच्चो! ऋषिकेश की यात्रा कैसी रही? अमन – श्रीमान! इस यात्रा ने मेरा जीवन बदल दिया। पहाड़ों की ठंडक और गंगा की निर्मल धारा देखकर मन प्रसन्न हो गया। स्मिता – और श्रीमान! नहाने का जितना सुख बहती गंगा में मिला, इतना सुख न शॉवर में मिला, न पूल में, न बाथरूम में और न बारिश में। स्नेहा – श्रीमान! अब पता चला, लोग हजारों मील दूर से हरिद्वार और ऋषिकेश में क्या करने जाते हैं। अमन – ऋषिकेश के ढाबे, होटल, बाज़ार, भोजन भी कितना स्वादिष्ट और सस्ता था। स्मिता – हाँ, शुद्ध और स्वादिष्ट! स्नेहा – मुझे तो झूलों में बहुत आनंद आया। अमन – लक्ष्मण झूला, राम झूला। स्मिता – गंगा में तैरने वाली मछलियों का क्या कहना। मैंने उन्हें खूब खिलाया। अमन – और श्रीमान! वहाँ के बाज़ार कितने आकर्षक और सस्ते थे। स्मिता – और ठहरने के लिए कितने होटल थे, धर्मशालाएँ थीं। स्नेहा – और वहाँ पूरा भारत उमड़ा पड़ा था। किसी को भारत के दर्शन हों तो ऋषिकेश-हरिद्वार चला जाए। अध्यापक – देखा, यात्राएँ हमें कितना समृद्ध करती हैं। अमन और स्मिता – हम फिर कब चलेंगे श्रीमान!
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"एक लहर मेरे पैरों को भिगो गई तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ।"यात्रा के दौरान कई बार ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियाँ सामने आ जाती हैं। ऐसी किसी स्थिति का सामना करने के लिए व्यक्ति में किन गुणों का होना आवश्यक है? अपने सहपाठियों के साथ मिलकर इस विषय पर चर्चा कीजिए।

उत्तर:
यात्रा के दौरान अनेक बार ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियाँ सामने आ जाती हैं जैसे- रास्ता भटकना, स्वास्थ्य बिगड़ना, सामान खो जाना, कोई दुर्घटना हो जाना इत्यादि। उस समय हमें समझ और धैर्य से काम लेना चाहिए क्योंकि घबराने से समस्या दुगनी हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में शांत भाव से वक्त का जायज़ा लेना चाहिए और धैर्य के साथ परिस्थिति से बाहर निकलने हेतु उचित निर्णय लेना चाहिए। ऐसी परिस्थिति में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है:धैर्य – सबसे ज्यादा यही गुण हमें कठिन समय में स्थिर रखता है और उचित निर्णय की दिशा में अग्रसर करता है।समझदारी से निर्णय – परेशानी या मुसीबत में पड़ने पर हमें शांत भाव से पूरी परिस्थिति को जाँचना चाहिए और फिर समयानुसार उचित निर्णय लेकर कठिनाई से बाहर आने का प्रयास करना चाहिए।सतर्कता – यात्रा में यदि व्यक्ति सतर्क रहेगा तो निश्चय ही वह परेशानी में नहीं फँसेगा। इसलिए आसपास के वातावरण के प्रति सजगता रखें।
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यदि आपके पास भी कोई ऐसा अनुभव हो तो उसे अपने सहपाठियों के साथ साझा कीजिए।

उत्तर:
मेरे जीवन में भी यात्रा का एक ऐसा अनुभव है जब हमें भी समस्या का सामना करना पड़ा। एक बार हम सपरिवार हिमाचल की यात्रा पर थे। हम कुल आठ लोग थे। सभी यात्रा में गीत गाते हुए आनंद ले रहे थे कि तभी ड्राईवर ने घबराकर सूचित किया कि गाड़ी के ब्रेक फेल हो गए हैं। इतना सुनते ही हम सबके होश उड़ गए। एक तरफ पहाड़ तो दूसरी तरफ गहरी खाई में बहती व्यास नदी। ऐसा लगा कि अब बचना मुश्किल है। हमारी गाड़ी में दो छोटे बच्चे भी थे जिन्होंने रोना शुरू कर दिया। घबरा तो मैं भी गया परंतु पापा ने इशारे से शांत किया। मेरे पापा बहुत साहसी और समझदार थे। उन्होंने सबको धैर्य बँधाया।हमारी गाड़ी सरपट दौड़ी चली जा रही थी कि तभी सामने से एक और गाड़ी आई। सामने से आती सभी गाड़ियों को स्थिति का अंदाज़ा हो गया। उन्होंने दूर से ही खतरे को भाँपकर गाड़ियाँ पीछे ही रोक लीं। तभी पापा ने कहा कि खतरा बहुत है पर एक आखिरी कोशिश अवश्य करनी है। आगे जैसी ईश्वर की मर्जी। उन्होंने ड्राईवर से कहा — आगे मोड़ पर जहाँ चौड़ाई है, वहाँ गाड़ी को ज़ोर से पहाड़ में दे मारे। सब घबरा गए, परंतु और किसी के पास कोई रास्ता न था। तब ड्राईवर ने पापा की बात मानकर ऐसा ही किया, जिससे हमारी गाड़ी सड़क पर पलट गई और रुक गई।पापा और ड्राईवर ने गाड़ी के आगे का शीशा तोड़ा और सभी को गाड़ी से बाहर निकाला। तब तक पीछे रुकी गाड़ियों ने बचाव दल को सूचित कर दिया था। थोड़ी देर में बचाव दल पहुँचा। सबको थोड़ी-थोड़ी चोटें आईं थीं परंतु सबकी जान बच गई। सबने पापा के धैर्य और सूझबूझ की प्रशंसा की। मुझे अपने पापा पर बहुत गर्व अनुभव हो रहा था।

व्याकरण की बात — क्रिया-विशेषण की पहचान(1 questions)

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"समुद्र में पानी बढ़ रहा था। तट की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।"उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित पद 'धीरे-धीरे कम होना' क्रिया की विशेषता बता रहा है। जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द 'विशेषण' कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द 'क्रिया-विशेषण' कहलाते हैं।नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनमें क्रिया-विशेषण पदों की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए:(क) बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं। (ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं। (ग) मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।

उत्तर:
वाक्य (क) – बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं। क्रिया-विशेषण: कटती हुई (रीतिवाचक); क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है: 'आती थीं' क्रिया की विशेषता।वाक्य (ख) – यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं। क्रिया-विशेषण: उस दिशा में (स्थानवाचक); क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है: 'जा रही थीं' क्रिया की विशेषता।वाक्य (ग) – मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा। क्रिया-विशेषण: देर तक (कालवाचक); क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है: 'देखता रहा' क्रिया की विशेषता।

आओ नए वाक्य बनाएँ(1 questions)

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पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे तालिका में दिए गए हैं। इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों का अर्थ बताते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए:क्षितिज, झुरमुट, ढलान, श्रृंखला, बीहड़

उत्तर:
1. क्षितिज – (अर्थ) जहाँ धरती और आकाश मिलते प्रतीत हों। वाक्य – हवा धीरे-धीरे चल रही थी। दूर क्षितिज तले सूर्य डूबने को था।2. झुरमुट – (अर्थ) पेड़-पौधों या झाड़ियों का घना समूह। वाक्य – पक्षी पेड़ों के झुरमुट में अपना घोंसला बना लेते हैं।3. ढलान – (अर्थ) ऊँचाई से नीचे की ओर झुका हुआ स्थल। वाक्य – बच्चे पहाड़ी की ढलान पर खेल रहे थे।4. श्रृंखला – (अर्थ) क्रम या कड़ी। वाक्य – सभी बच्चे श्रृंखलाबद्ध होकर बैठे थे।5. बीहड़ – (अर्थ) कठिन, निर्जन, घना और खतरनाक स्थान। वाक्य – डाकू लोग बीहड़ इलाकों में छिपकर रहते हैं।

गतिविधियाँ(2 questions)

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कल्पना कीजिए कि आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गए हैं। वहाँ आपकी भेंट एक ऐसे यात्री से होती है जिसे आपकी सहायता की आवश्यकता है लेकिन आप दोनों एक-दूसरे की भाषा से अपरिचित हैं। ऐसे में उस अनजान यात्री की सहायता आप कैसे करेंगे?

उत्तर:
कल्पना के आधार पर यदि मैं अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गया हूँ और वहाँ मेरी मुलाकात एक ऐसे यात्री से होती है जिसे मेरी सहायता की आवश्यकता है लेकिन हम दोनों एक-दूसरे की भाषा नहीं समझते, तब मैं उसके हाव-भाव पहचानकर उसकी मदद का प्रयास करूँगा। मैं उसे संकेतों के माध्यम से अपनी बात समझाऊँगा। यदि संभव हो तो कुछ-कुछ अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग करूँगा क्योंकि अंग्रेजी के शब्द प्रायः विभिन्न भाषा के लोग भी समझते हैं। यदि ऐसा न भी हुआ तो मैं इशारे, संकेत और नक्शे के माध्यम से उसे समझाना चाहूँगा।
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पधारो म्हारे देश — अपने क्षेत्र के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की एक सूची बनाइए और उनकी विशेषताओं को ध्यान में रखकर एक विवरणिका (ब्रॉशर) तैयार कीजिए।

उत्तर:
मेरा क्षेत्र: दिल्लीमहत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल एवं उनकी विशेषताएँ:1. लाल किला – मुगल कालीन, शाहजहाँ द्वारा निर्मित; स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण; यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।2. जामा मस्जिद – भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक; भव्य वास्तुकला और विशाल प्रांगण।3. कुतुब मीनार – विश्व की सबसे ऊँची ईंट की मीनार; यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।4. लोटस टेम्पल – कमल के आकार का अद्भुत मंदिर; शांति और ध्यान का केंद्र; सफेद पत्थर से निर्मित।5. इंडिया गेट – शहीद सैनिकों की स्मृति में बना स्मारक; पर्यटकों का विशेष आकर्षण।6. अक्षरधाम मंदिर – भव्य मंदिर परिसर; सांस्कृतिक प्रदर्शनी और लाइट शो।7. जंतर-मंतर – प्राचीन खगोलीय वेधशाला; विज्ञान और वास्तुकला का अद्भुत संगम; महाराज सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित।(छात्र चित्र सहित प्रस्तुत सूची से आकर्षक ब्रॉशर स्वयं बनाएँ।)

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