Class 9 · HindiNCERT 2026 Revised Syllabus
Chapter 12: घर की याद (0901CH12)
R1 and R2 book- Ganga
भवानीप्रसाद मिश्र की आत्मीय भाव-कविता — स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कारावास में बैठे कवि की घर-परिवार के सदस्यों के प्रति उमड़ती ममता, अकेलेपन की पीड़ा और देश के प्रति दृढ़ संकल्प की अभिव्यक्ति।
Chapter code: 0901ch12 · Book: R1 and R2 book- Ganga · Class 9 Hindi
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रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क(8 questions)
1
भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी? (क) विदेश से मित्र के लिए (ख) युद्धभूमि से जनता के लिए (ग) जेल से परिवार के लिए (घ) यात्रा से किसी संबंधी के लिए
उत्तर:
(ग) जेल से परिवार के लिए।तर्क – कविता का सारा वातावरण जेल का है। कवि ने स्वयं लिखा है- “बँधा बैठा हूँ अभागा।”
2
लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है? (क) उत्साह और आवेग (ख) भय और क्रोध (ग) साहस और उमंग (घ) चिंता और बेचैनी
उत्तर:
(घ) चिंता और बेचैनी।तर्क – इस कविता में कवि को बारिश में घर के सदस्यों की याद आ रही है। वह बाड़े में जाकर बीज बोता था। माँ उसके साथ नए फूल देखने आती थी। बारिश ने ये यादें ताज़ा कर दीं।
3
कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है? (क) कमजोर और निष्क्रिय (ख) स्नेहमयी और दृढ़ (ग) शिक्षित और अनुशासनप्रिय (घ) सरल और उदासीन
उत्तर:
(ख) स्नेहमयी और दृढ़।तर्क – कवि की माँ ने अपने भावुक पति को ढाढ़स बँधाया होगा। उसने पति को कमज़ोर न करके दृढ़ किया होगा।
4
"वज्र – भुज नवनीत-सा उर" पंक्ति के माध्यम से पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत की गई है? (क) कर्मठ और सृजनशील (ख) साहसी और पराक्रमी (ग) दृढ़ और संवेदनशील (घ) प्रसन्नचित्त और सक्रिय
उत्तर:
(ग) दृढ़ और संवेदनशील।तर्क – भवानी के पिता का शरीर पहाड़ जैसा मज़बूत था, किंतु हृदय बहुत भावुक था।
5
"एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए" पंक्ति किस ओर संकेत करती है? (क) पिता की कठोरता (ख) पिता की भावुकता (ग) वर्षा की तीव्रता (घ) पिता की निर्बलता
उत्तर:
(ख) पिता की भावुकता।तर्क – कवि के पिता इतने भावुक हैं कि वे अपने आठ बच्चों में से किसी एक का भी वियोग सहन नहीं कर पाते। वे भावुक होकर रोने लगते हैं।
6
"बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर" पंक्ति में "परिताप" शब्द से क्या संकेत मिलता है? (क) घर का समृद्ध होना (ख) घर की सजावट (ग) घर में दुख का वातावरण (घ) घर की शांति
उत्तर:
(ग) घर में दुख का वातावरण।तर्क – कवि की बहन ने भवानी की कमी महसूस की होगी। कवि के बिना घर का समूचा वातावरण बहुत शोकमय रहा होगा।
7
"और कहना मस्त हूँ मैं" पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस ओर संकेत करता है? (क) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है (ग) घर के लोगों के प्रति उदासीन है (घ) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है
उत्तर:
(ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।तर्क – भवानी के पिता अंदर ही अंदर बहुत भावुक और तरल हैं, किंतु वे अपने आँसू दिखाकर घर के शेष सदस्यों को रुलाना नहीं चाहते।
8
इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है? (क) घर की शांति और सुरक्षा (ख) घर के सदस्यों के बीच का संबंध (ग) घर के निर्माण की प्रक्रिया (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
उत्तर:
(घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा।तर्क – इस कविता में जेल में बँधे कवि को अपने परिवार के सदस्यों की याद आती है। वे अपने पिता-माँ और भाई-बहनों को याद करके भावुक हैं।
मेरी समझ मेरे विचार(5 questions)
1
कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिनसे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।
उत्तर:
बलिष्ठ शरीर और साहसी – कवि के पिता डील-डौल में विशालकाय हैं। नित्य 260 दंड पेलना उनकी दिनचर्या है। वे बड़ी उम्र में भी दौड़ सकते हैं, खिलखिला सकते हैं। उनकी वाणी में बादलों जैसी गर्जन और काम में तूफान-सी तेज़ी है। वे निडर हैं; उनके सामने शेर या मौत भी आ जाए तो वे घबराएँ नहीं। सच तो यह है कि वे बड़ी उम्र में भी युवा हैं।उदार हृदय – कवि के पिता मन से भी विशाल और उदार हैं। वे अत्यंत सरल, भोले, सहृदय और भावुक हैं। वे अपने परिवार जनों से गहरा लगाव रखते हैं। उनके पाँच पुत्र हैं, पुत्रवधुएँ हैं, पोते हैं- परंतु वे सबसे गहरे जुड़े हुए हैं। वे किसी का रंचमात्र कष्ट भी नहीं देख सकते। वे रोज़ गीता-पाठ करते हैं। इससे स्पष्ट है कि वे शरीर, मन और बुद्धि- तीनों में सशक्त हैं।
2
"दुख डटकर ठेलता हूँ" यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?
उत्तर:
कवि भावुक है। वह अपने घर के सभी सदस्यों से बहुत गहरे जुड़ा हुआ है। इसलिए उसे अपनी माँ, बहनों, भाइयों और पिता की बहुत याद आती है। वह जेल में अकेलेपन की वेदना सह रहा है। ऐसे समय में बड़े-बड़े क्रांतिकारी हार जाते थे। परंतु कवि वियोग-वेदना को सहकर भी देश की आज़ादी के लिए दृढ़ रहा। उसने एक बार भी माफ़ी माँगकर घर जाने की बात मन में नहीं आने दी। इससे पता चलता है कि कवि संघर्षशील और दृढ़ है।
3
कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?
उत्तर:
इस कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन आया है। वास्तव में वर्षा का बरसना कवि के आँसुओं से जुड़ा हुआ है। वर्षा कवि के हृदय में छिपी ममता, वात्सल्य और स्नेह को जगाती है। बारिश कवि को अपने आत्मीय जनों की याद दिलाती है। उसे अपने पिता-माता के साथ बिताए आत्मीय क्षण याद आते हैं। इधर पानी बरसता है, उधर कवि की आँखें बरसती हैं। उसका अपने घर के सदस्यों के बीच रहने का मन होता है।कवि ने बारिश और सावन को अपना अंतरंग साथी बना लिया है। वे वर्षा से कहते हैं- तुम बरस लो, वे न बरसें।
4
कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिनसे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।
उत्तर:
माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय देने वाली पंक्तियाँ- “और माँ बिन, पढ़ी मेरी दुख में वह गढ़ी मेरी, माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर।” और जिन पंक्तियों में माँ पिता को ढाढ़स बँधाती है- “पिताजी को ढाढ़स बँधाती।”भाव – इन पंक्तियों में माँ भावनात्मक रूप से अत्यंत मजबूत दिखाई गई है। जब कवि के भावुक पिता पुत्र-वियोग में टूट जाते हैं, तब माँ ही उन्हें ढाढ़स बँधाकर संभालती है। कवि की माँ अपनी गोद में सिर रखने वाले के दुख को मिटा देने वाली ममतामयी छवि में प्रस्तुत हुई है। वह स्वयं दुख सहती हुई भी पूरे घर को संभाले रखती है; यही उसकी भावनात्मक मजबूती है।
5
कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?
उत्तर:
मुझे कविता का अंतिम अंश सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है। कवि सावन से कहता है- “कह न देना मौन हूँ मैं, खुद न समझैं कौन हूँ मैं, देखना कुछ बक न देना, उन्हें कोई शक न देना, हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें।”क्यों – इन पंक्तियों में कवि की भावुकता और पारिवारिक स्नेह तो उमड़ता ही है, उसका संयम, त्याग और दृढ़ता भी प्रकट होती है। सावन के माध्यम से कही गई यह बात बहुत प्रभावशाली बन गई है।
विधा से संवाद — कविता का सौंदर्य और संरचना(2 questions)
1
"गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर, बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर" – इन पंक्तियों में शब्दों का चयन और संयोजन इस प्रकार किया गया है कि कविता में ध्वन्यात्मकता और नाद-सौंदर्य की सृष्टि हुई है। नीचे दी गई विशेषताओं वाली पंक्तियों को कविता से ढूँढ़कर लिखिए।विशेषताएँ – स्मृति और दृश्य बिंब, लोकभाषा की सहजता, पंक्तियों का दोहराव, आलंकारिक प्रयोग, प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन, संबोधनात्मकता
उत्तर:
स्मृति और दृश्य बिंब – “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह, बड़े बाड़े में कि जाता, बीज लौकी के लगाता।” – युवक भवानी के वर्षा में नहाते हुए दृश्य की स्मृति का चित्र आँखों के सामने आ जाता है।लोकभाषा की सहजता – “और माँ बिन, पढ़ी मेरी दुख में वह गढ़ी मेरी, माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर।”पंक्तियों का दोहराव – “आज पानी गिर रहा है बहुत पानी गिर रहा है रात भर गिरता रहा है प्राण मन घिरता रहा है।”आलंकारिक प्रयोग – “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए, एक हल्की चोट लग ले, दूध की नद्दी उमग ले।” – यहाँ पत्ता टूटना, धारा फूटना प्रतीक हैं। इनके बहाने कवि अपने पिता के कोमल हृदय का वर्णन कर रहे हैं। “दूध की नद्दी” में रूपक अलंकार है। साथ ही पिता के फफक-फफक कर रोने का भी चित्रण है।प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन – “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन, तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें।” – इसमें सावन का मानवीकरण किया गया है। “हरे और सजीले” शब्दों से सावन की सुंदरता और तरलता दोनों प्रकट होती हैं। साथ ही कवि की भावुकता भी प्रकट हुई है।संबोधनात्मकता – उपर्युक्त अंश में कवि सावन को मित्र मानकर उसे संबोधित कर रहा है।
2
कविता की संरचना – "घर की याद" कवि के भीतर उठते भावों की यात्रा है। कविता में प्रकृति के माध्यम से व्यक्त इस यात्रा के प्रमुख चरणों का वर्णन करें। (संकेत – पानी का गिरना, सबेरा होना)
उत्तर:
कवि की भावना निम्नलिखित चरणों से होती हुई पूरी हुई है-1. पानी का गिरना
2. घर के सदस्यों की याद आना
3. माँ का स्नेह और दृढ़ता
4. पिता का बलिष्ठ शरीर
5. पिता की भावुकता
6. माँ का पिता को ढाढ़स बँधाना
7. भाई-बहनों की भावुकता
8. झरा-झर पानी का बरसना
9. फिर से पिता की याद
10. घर में अपनी कुशलता का संदेश देना
विषयों से संवाद(4 questions)
1
कविता में चित्रित "घर" एक भौतिक स्थान से बढ़कर भावनाओं और संबंधों के केंद्र के रूप में चित्रित हुआ है। वर्तमान में एकल परिवारों के बढ़ते चलन के संदर्भ में संयुक्त परिवार और एकल परिवार की तुलना कीजिए और कारण सहित लिखिए कि दोनों की कौन-कौन-सी बातें आपको पसंद हैं और कौन-कौन-सी नापसंद?
उत्तर:
इस कविता में संयुक्त परिवार का अत्यंत भाव-भरा चित्रण हुआ है। घर मानो बरगद का पेड़ है जिस पर सभी पंछी विहार कर रहे हैं। सबमें आपसी लगाव और स्नेह है।संयुक्त परिवार – सचमुच रस की खान है। इसमें रहने से मनुष्य कभी अकेला, उदास और निराश नहीं होता। एक के दुख में सभी सम्मिलित हो जाते हैं। दुख का दंश समाप्त हो जाता है और सुख उत्सव में बदल जाते हैं। ये विशेषताएँ अब गायब हो गई हैं।एकल परिवार – इसमें पति-पत्नी और अविवाहित बच्चे होते हैं; विवाह हुआ कि बच्चे अलग। ऐसे परिवारों में एक ओर स्वतंत्रता का सुख है, किंतु दूसरी ओर अकेलेपन की उदासी और भय है। एकल परिवारों के बच्चे उदास, निराश और भयभीत रहते हैं। वे आशंका और अकेलेपन से त्रस्त हैं। उनके चेहरों पर कभी उत्सव जैसा भाव नहीं आता।
2
कविता में बार-बार पानी गिरने का वर्णन है। लगातार बारिश होती रहे तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
उत्तर:
वर्षा हमारे लिए जीवन है और लगातार वर्षा मौत। जब बारिश लगातार होती है तो शहर की सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। लोगों के वाहन उसके बीच फँस जाते हैं। न दूध वाला आ पाता है, न लोग ऑफिस जा पाते हैं। अत्यधिक बारिश शहरों को जाम कर देती है।अत्यधिक बारिश गाँवों में बाढ़ ला देती है। खेत, कच्चे मार्ग, सड़कें सब पानी से लबालब भर जाते हैं। कभी-कभी तो वहाँ से पलायन करना पड़ता है। लोगों को नावों से सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। जब तक पानी सूख न जाए, गाँव वालों को विस्थापित होकर नरक जैसी स्थिति झेलनी पड़ती है। तभी कवि अशोक बत्रा ने लिखा है- “कौशल्या को शाम है बारिश राधा को घनश्याम है बारिश पर जो डूबे, रोकर बोले हाय-हाय कोहराम है बारिश!”
3
कविता में सावन के बादल का प्रयोग एक संचार माध्यम के रूप में किया गया है जिसके द्वारा कवि अपने परिवार तक संदेश भेज रहा है। कक्षा में संचार के नए-पुराने माध्यमों में अंतर बताते हुए चर्चा कीजिए और लिखिए।
उत्तर:
मनुष्य संचार और संवाद के माध्यम खोजता रहा है। पुराने समय में, जब तकनीकी साधन नहीं थे, वह कबूतर, घोड़े आदि तीव्रगामी पशु-पक्षियों का सहारा लेता था। फिर युग बदला तो रेडियो, तार, टेलीफोन, दूरदर्शन और अब मोबाइल-इंटरनेट आदि साधन आ गए हैं। ये सभी साधन अधिक-से-अधिक कुशल होते जा रहे हैं। अब तो संदेश भेजने में समय नहीं लगता। इधर ट्विटर पर लिखा, उधर पूरे संसार ने जान लिया।वर्तमान संचार साधन तकनीकी साधनों पर आधारित हैं। इनके प्रयोग में समय नहीं लगता। पहले कबूतरों, घोड़ों पर संदेश भेजने में घंटे और दिन नहीं, महीने लग जाते थे।
4
भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कारावास में लिखी थी। अपने शिक्षक और पुस्तकालय की सहायता से "भारत का स्वतंत्रता संग्राम" विषय पर लेख लिखिए।
उत्तर:
भारत का स्वतंत्रता संग्रामभारत का स्वतंत्रता संग्राम 1857 से शुरू हुआ। भारतवासी अंग्रेजों से मुक्ति चाहते थे, किंतु वे स्वयं संगठित नहीं थे। अतः वह आंदोलन असफल हुआ। उसके बाद भारतीय जनता ने स्वराज्य-प्राप्ति के लिए संघर्ष तेज़ किया। इसमें दो प्रकार के क्रांतिकारी थे। एक गरमदल के क्रांतिकारी जो बंदूक के बल पर अंग्रेज़ों को बाहर खदेड़ना चाहते थे। तिलक, सुभाष, भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सावरकर उन क्रांतिकारियों में थे। उन्होंने आज़ादी के लिए गोलियाँ खाईं, कारावासों में जवानी बिताई और अन्यायी अंग्रेज़ों से लोहा लिया।नरमदल के नेताओं में गाँधी, नेहरू आदि नेता थे, जिन्होंने अहिंसक आंदोलन चलाए। ये मारना नहीं, मरना जानते थे। इन्होंने सत्याग्रह किया, जेल भरी, अंग्रेज़ी शासन का बहिष्कार किया। 1942 में “भारत छोड़ो आंदोलन” आज़ादी का महत्वपूर्ण आंदोलन था, जिसमें कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने भी भाग लिया था।
सृजन(3 questions)
1
कल्पना कीजिए कि कवि की माँ को पत्र लिखना आता है। कविता में वर्णित उनकी छवि और अनुमान के आधार पर लिखिए कि वे कवि के लिए पत्र में क्या-क्या लिखतीं?
उत्तर:
प्रिय भवानी!तुझे मेरा ढेर सारा प्यार!तुझे मैं पल-पल याद करती हूँ। तू मेरी आँखों से बहकर निकलना चाहता है। पर मैं रोक लेती हूँ आँसुओं को। मैं रोऊँगी तो तेरे पिता का क्या होगा? वे बहुत नरमदिल के हैं। किसी भी बच्चे का जरा-सा भी दर्द नहीं सह पाते। फिर तू तो उनका सबसे लाड़ला और होनहार बेटा है।भवानी! तेरे पिता तुझ पर गर्व करते हैं। तूने उनका नाम ऊँचा किया है। मुझे भी गर्व है कि तू मेरा बेटा है। तूने मेरा दूध पिया है। तू जो जेल में है, तो समझना मैं भी तेरे साथ हूँ। तू अकेला कहाँ है? मैं 24 घंटे तेरे दिल में रहती हूँ। मुझे तुझ पर बहुत ममता है। संतान हो तो ऐसी!बेटे भवानी! तू यहाँ की चिंता न करना। तू भी अकेला नहीं है। सारा परिवार तेरे साथ है। कल तेरी बहन घर आई थी। तेरे जेल में जाने का समाचार सुनकर वह रुक नहीं सकी। भागी आई। उसके आने पर घर में जो माहौल बना, उसमें तू न होकर भी तू ही तू था। तब मेरे मन में बहुत ममता जागी।मेरे बेटे! सुखी रह, खुश रह, जीता रह! देश की चिंता तू नहीं करेगा तो कौन करेगा? हम हमेशा तेरे साथ हैं।तुम्हारी माँ
2
कविता में माँ और पिताजी के बीच कवि के विषय में की जाने वाली बातचीत का वर्णन है। उनकी इस बातचीत को संवाद लेखन के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
पिता (सुबकते हुए) – आज भवानी यहाँ होता तो… (फिर रुलाई)माँ – आप इस तरह क्यों रो रहे हैं?पिता – (आँख पोंछते हुए) नहीं…माँ – भवानी वहाँ ठीक है। आप चिंता न करो।पिता – (रोते हुए) मैं रो कहाँ रहा हूँ?माँ – देखो, वह आपका मन समझकर ही जेल गया है। आपकी ही इच्छा थी। आपकी ही तो सीख थी कि देश के लिए कुछ करो।पिता – (आँसू पोंछते हुए, परंतु आँसू फिर उमड़ पड़ते हैं) हाँ, तुम ठीक…माँ – देखो, आप इस तरह रोएँगे तो और बच्चे भी रो पड़ेंगे। आप खुद को संभालिए। सोचो, अगर वह कारावास से डरता तो मेरी कोख को भी लजाता। उसने तो मेरी भी लाज रख ली। अब मेरा माथा गर्व से ऊँचा हो गया है।पिता – (भावुक होकर) हाँ! बहुत ऊँचा हो गया है मस्तक। (फिर रोना) मैं रो नहीं रहा हूँ। मुझे आज की बारिश में भवानी की बहुत याद आ रही है। यदि वह यहाँ होता…माँ – छोड़ो यह बात! वह वहाँ ठीक है, और एक आप हैं…पिता – यदि आज भवानी यहाँ होता तो नंगे बदन वर्षा में भीगता! बड़े बाड़े में जाकर लौकी के बीज रोपता। तुझे आकर बताता – माँ, देखो नए फूल खिल आए हैं। फिर तू उसके साथ देखने जाती। मुझे तो बस… (रुलाई फूट पड़ती है)माँ – आप बस करो!पिता – नहीं, मैं रो कहाँ रहा हूँ। मैं नहीं रोऊँगा।
3
इस कविता में कवि ने सावन के बादल को संदेशवाहक बनाया है। अगर आपको किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से अपने घर, मित्र या किसी संबंधी व्यक्ति को कोई संदेश भेजना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
उत्तर:
मुझे हवा बहुत पसंद है। यदि मुझे किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से संदेश देना होता तो मैं अवश्य हवा को संदेशवाहक बनाता। जब ठंडी हवा चलती है तो मुझे अपने प्रिय के साथ घूमने का मन करता है। उस समय मेरे मन में तड़प उठती है, छटपटाहट होती है। मैं अपनी उस वेदना को हवा के माध्यम से प्रकट करता।
भाषा से संवाद — व्याकरण की बात(2 questions)
1
"आज सबका मन चुआ होगा" – उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द कवि की क्षेत्रीय/स्थानीय भाषा का शब्द है। कविता में स्थानीय भाषा के शब्दों का सहज प्रयोग हुआ है। कविता से कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उनमें रेखांकित शब्दों (छिन, फलानी, भौजी, बड़) का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।
उत्तर:
छिन (छन) – क्षण/थोड़ा समय – वाक्य: मछली जल के बिना एक छन भी जीवित नहीं रहती।फलानी – कोई अनिर्दिष्ट/निश्चित व्यक्ति – वाक्य: माँ मुझे रोज़ बताती है कि उसे मेरी फलानी सहेली मिली थी।भौजी – भाई की पत्नी/भाभी – वाक्य: मैंने भैया और भौजी के पाँव छुए।बड़ – बरगद (वट) – वाक्य: मेरे घर के सामने जो छायादार पेड़ है, वह बड़ है।
2
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में आए शब्दों की व्याकरणिक पहचान लिखिए।(क) "बहुत पानी गिर रहा है" – पानी (संज्ञा), बहुत (विशेषण), गिर रहा है (क्रिया)(ख) "पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा" – बुढ़ापा, व्यापा, जिनको(ग) "खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह" – खुले, वह, बदन, फिरता(घ) "एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए" – एक, फूट जाए, पत्ता(ङ) "हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन" – सजीले, मेरे, सावन
उत्तर:
(क) पानी – संज्ञा; बहुत – विशेषण; गिर रहा है – क्रिया(ख) बुढ़ापा – संज्ञा (भाववाचक); व्यापा – क्रिया; जिनको – सर्वनाम(ग) खुले – विशेषण; वह – सर्वनाम; बदन – संज्ञा; फिरता – क्रिया(घ) एक – विशेषण; फूट जाए – क्रिया; पत्ता – संज्ञा(ङ) सजीले – विशेषण; मेरे – सार्वनामिक विशेषण; सावन – संज्ञा
गतिविधियाँ(2 questions)
1
कवि ने कविता में अपने परिवार का उल्लेख किया है। आप भी अपना एक परिवार वृक्ष तैयार कीजिए और प्रत्येक सदस्य के व्यक्तित्व के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
मेरे घर में दादा-दादी, माता-पिता और एक बहन हैं। उनकी विशेषताएँ-दादा – मेरे दादा मानो बरगद की छाँव हैं। मैं उनके कंधों पर कैसे भी झूल सकता हूँ।दादी – मेरी दादी मिश्री वाला जल हैं। वे कभी नाराज नहीं होतीं। उनके आशीषों की छाया मेरे लिए बादल जैसी है।पिता – मेरे पिता छत के समान मजबूत हैं, छायादार, जिसकी छाया में मैं आराम से रहता हूँ और जिसके साथ रहकर मैं आकाश छू सकता हूँ।माँ – मेरी माँ मेरे पोर-पोर में हैं। मुझे लोग कहते हैं- तू अपनी माँ पर गया है। मैं हँसता भी माँ जैसा हूँ और बोलता भी वैसा ही हूँ।बहन – मेरी बहन छोटी है। मुझसे अक्सर झगड़ती है। उसे मेरी हर चीज़ चाहिए। हर बात में तेरी-मेरी पर मेरे बिना पल भर भी नहीं रह सकती।
2
कविता में प्रयुक्त ध्वनि-आधारित शब्दों (जैसे – झरा-झर, थर-थर, सर-सर) को पढ़कर एक छोटी-सी ऑडियो रिकॉर्डिंग या मौखिक पाठ तैयार कीजिए। बताइए कि ये शब्द कविता में कैसा वातावरण का निर्माण करते हैं?
उत्तर:
विद्यार्थी कक्षा के बच्चों के साथ मिलकर कविता की ध्वनि-आधारित पंक्तियों (झरा-झर, थर-थर, सर-सर) का ऑडियो रिकॉर्डिंग या मौखिक पाठ तैयार करें।ये अनुकरणात्मक शब्द कविता में लगातार बरसते पानी, बहती हवा और काँपते प्राणों का जीवंत वातावरण निर्मित करते हैं। इन ध्वनियों से पाठक के सामने वर्षा का दृश्य, प्रकृति का सौंदर्य और कवि के भीतर उठती भावुकता एक साथ साकार हो उठती है।