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Class 9 · HindiNCERT 2026 Revised Syllabus

Chapter 10: भारती, जय, विजय करो! (0901CH10)

R1 and R2 book- Ganga

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता — भारतमाता को देवी के रूप में देखते हुए उनकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा की प्रशंसा।

Chapter code: 0901ch10 · Book: R1 and R2 book- Ganga · Class 9 Hindi

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रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क(5 questions)

1

"भारति, जय, विजयकरे" कविता में विशेष रूप से- (क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है। (ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है। (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है। (घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है।

उत्तर:
(ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।तर्क – कविता में केवल भूगोल ही नहीं, बल्कि 'ओंकार' के माध्यम से ज्ञान और 'कनक शस्य' के माध्यम से संपन्नता का भी वर्णन है।
2

"कनक-शस्य-कमल धरे" पंक्ति का भावार्थ है- (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता (ख) भारत की नदियों का सौंदर्य (ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता (घ) भारत की सैन्य शक्ति और औद्योगिक विकास

उत्तर:
(क) भारत की धन-धान्य संपन्नता।तर्क – 'कनक-शस्य' का अर्थ सोने जैसी मूल्यवान फसलों (अनाज) से है, जो देश की कृषि और संपन्नता को दर्शाती है।
3

समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं- (क) गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले (ख) गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल (ग) भारति, जय, विजयकरे / कनक शस्य कमलधरे! (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे!

उत्तर:
(घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे!।तर्क – यह पंक्ति भारत के अनेक विचारों, स्वरों और महान सांस्कृतिक प्रभाव के चारों दिशाओं में गूँजने का संकेत देती है।
4

कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है? (क) सरल, बोल-चाल की भाषा (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त (ग) सरस और हास्य-व्यंग्यपूर्ण (घ) संवादात्मक और विश्लेषणात्मक

उत्तर:
(ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त।तर्क – कविता में 'कनक शस्य कमलधरे' और 'ज्योतिर्जल-कण' जैसे सामासिक पदों और संस्कृत के शब्दों का बहुतायत से प्रयोग हुआ है।
5

भारत के वस्त्रों में 'तरु-तृण-वन-लता' और गले में 'गंगा-धारा' को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं? (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक (ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम (ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक (घ) सामाजिक और राजनीतिक

उत्तर:
(क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक।तर्क – प्रकृति (वन, नदी) को देवी के वस्त्रों के रूप में दिखाकर कवि ने पर्यावरण के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति की महानता को जोड़ा है।

अर्थ और भाव(2 questions)

(क)

"लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल धोता शुचि चरण युगल!" — इस पंक्ति का अर्थ समझते हुए भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
इस पंक्ति का भाव यह है कि भारत का भौगोलिक स्वरूप किसी दिव्य देवी के समान है। भारत के मानचित्र में सबसे नीचे स्थित 'श्रीलंका' भारतमाता के चरणों में रखे एक कमल के समान सुशोभित है। समुद्र की गरजती हुई लहरें निरंतर भारतमाता के पवित्र चरणों को पखारती (धोती) रहती हैं, जो इसकी भौगोलिक महानता और शुद्धता को दर्शाती हैं।
(ख)

"प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, शतमुख-शतरव-मुखरे!" — इस पंक्ति का अर्थ समझते हुए भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि भारत केवल मिट्टी का पिंड नहीं बल्कि एक चेतन सत्ता है। भारत के प्राणों में 'ओंकार' (ईश्वर का प्रतीक शब्द) की गूँज समाहित है। भारत की उदार दिशाएँ सैकड़ों प्रकार के स्वरों, महान विचारों और सांस्कृतिक विविधताओं से इस प्रकार मुखरित हैं कि पूरा विश्व इसकी ज्ञान परंपरा से आलोकित हो रहा है।

मेरी समझ मेरे विचार(4 questions)

1

कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?

उत्तर:
इस कविता में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रखर देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति अगाध आस्था की अभिव्यक्ति मिलती है। कवि भारत को केवल एक भौगोलिक भूमि न मानकर उसे एक 'चेतन सत्ता' और 'देवी' के रूप में देखता है। उसके शब्दों में राष्ट्र के प्रति गौरव, प्रकृति के प्रति सम्मान और भारत की ज्ञान-परंपरा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित देखने की तीव्र लालसा स्पष्ट रूप से झलकती है।
2

कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?

उत्तर:
हाँ, यह पूर्णतः सत्य है कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का एक अनिवार्य रूप है। कवि ने भारत के अंगों के रूप में वृक्ष, वन, नदी और हिमालय का वर्णन किया है। यदि हम अपने देश की नदियों को प्रदूषित होने से बचाते हैं या वनों का संरक्षण करते हैं, तो हम वास्तव में अपनी भारतमाता के उस स्वरूप की रक्षा कर रहे होते हैं, जिसका वर्णन इस कविता में किया गया है। प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना राष्ट्र की संपन्नता और भविष्य को सुरक्षित करना है।
3

"कनक-शस्य-कमलधरे!" पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?

उत्तर:
'शस्य' शब्द का अर्थ उपज या फसल होता है। भारत की बहुभाषिकता इसे और समृद्ध बनाती है, जहाँ इसे संस्कृत में 'शस्यम्', पंजाबी में 'उपज', मराठी में 'पीक' और बांग्ला में 'फसल' जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। यह विविधता दर्शाती है कि भारत के हर कोने में कृषि और श्रम का महत्व समान है, जो 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को बल देता है।
4

"मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?

उत्तर:
हिमालय को भारत का मुकुट इसलिए बताया गया है क्योंकि वह भारत के सिर (उत्तरी भाग) पर स्थित है और अपनी शुभ्र बर्फीली चोटियों के कारण सफेद मुकुट के समान प्रतीत होता है। यह भारत की उत्तरी सीमा की रक्षा करता है और प्राकृतिक सौंदर्य एवं दिव्यता का प्रतीक है।

विधा से संवाद — कविता का सौंदर्य(1 questions)

1

नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए-"भारति, जय, विजयकरे! कनक-शस्य-कमलधरे!"इन पंक्तियों में कवि ने चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए भारतभूमि का मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है। इस कविता की कुछ अन्य विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता में से उन विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए- प्रकृति का मानवीकरण, आलंकारिक प्रयोग, समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग, संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग

उत्तर:
प्रकृति का मानवीकरण – "धोता शुचि चरण युगल / स्तव कर बहु-अर्थ-भरे!" (यहाँ सागर को एक जीवित इकाई के रूप में दिखाया गया है जो भारत माता के चरण धो रहा है।)आलंकारिक प्रयोग – "अंचल में खचित सुमन" (यहाँ धरती के वनों और फूलों की तुलना आँचल में जड़े हुए रत्नों/फूलों से की गई है – रूपक अलंकार)समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग – "कनक-शस्य-कमलधरे!" या "तरु-तृण-वन-लता-वसन" (निराला जी ने कई शब्दों को जोड़कर सामासिक पदों का सुंदर प्रयोग किया है।)संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग – "मुकुट शुभ्र हिम-तुषार, प्राण प्रणव ओंकार" (पूरी कविता तत्सम प्रधान है, जहाँ 'शुभ्र', 'तुषार', 'प्रणव' जैसे संस्कृत शब्दों का प्रयोग है।)

विषयों से संवाद(4 questions)

1

स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक/परिचायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान संदर्भ में यदि आपको भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप भारत की किन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?

उत्तर:
वर्तमान संदर्भ में भारत को नए रूप में प्रस्तुत करते समय मैं निम्नलिखित विशेषताओं को सम्मिलित करना चाहूँगा-तकनीकी प्रगति – भारत की सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान (जैसे इसरो की उपलब्धियाँ) में वैश्विक पहचान।आधुनिक बुनियादी ढाँचा – देश में निर्मित हो रहे आधुनिक एक्सप्रेस वे, डिजिटल भुगतान प्रणाली और स्मार्ट शहरों का नेटवर्क।युवा शक्ति और नवाचार – भारत के नए-नए व्यापारों, पारिस्थितिकी तंत्र और युवाओं के नए विचारों को एक नई शक्ति के रूप में दिखाना।वैश्विक नेतृत्व – 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के साथ विश्व शांति और मानवता की सेवा में भारत की भूमिका।
2

"शतमुख-शतरव-मुखरे!" पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को साकार करते हैं?

उत्तर:
"शतमुख-शतरव-मुखरे!" पंक्ति का अर्थ है- सौ मुखों से निकलने वाली सैकड़ों ध्वनियाँ। यह भारत की बहुभाषिकता और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। भारत के अलग-अलग राज्यों के पर्व (जैसे दीवाली, पोंगल, ओणम, ईद) और रीति-रिवाज भले ही भिन्न हों, लेकिन वे सभी भारतीयता के एक ही सूत्र में बँधे हैं। जब वे विविध स्वर एक साथ मिलकर भारतमाता की वंदना करते हैं, तो वे एक शक्तिशाली सामूहिक चेतना का निर्माण करते हैं, जो 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को जीवंत बनाती है।
3

भारत को सुदृढ़ करने में इसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के महत्व को बताते हुए संक्षिप्त लेख लिखिए।

उत्तर:
भारत की सुदृढ़ता के आधार – भारत की शक्ति उसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के त्रिकोण पर टिकी है। यहाँ की प्रकृति (नदियाँ, हिमालय, वन) न केवल संसाधन प्रदान करती है, बल्कि देश के सुरक्षा कवच और पहचान के रूप में भी कार्य करती है। हमारी संस्कृति हमें 'उदारता' और 'विविधता में एकता' सिखाती है, जो समाज को आपस में जोड़े रखती है। वहीं, भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, जिसका प्रतीक 'ओंकार' है, हमें वैचारिक स्पष्टता और आध्यात्मिक गहराई प्रदान करती है। ये तीनों तत्व मिलकर एक ऐसे सुदृढ़ आधार का निर्माण करते हैं, जो भारत को विश्व पटल पर एक अद्वितीय और शक्तिशाली राष्ट्र बनाता है।
4

कविता में गंगा को भारत के स्वच्छ और श्वेत हार एवं हिमालय को मुकुट के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?

उत्तर:
कविता में गंगा को 'श्वेत हार' और हिमालय को 'मुकुट' कहा गया है, लेकिन आज की स्थिति चिंताजनक है।हिमालय पर प्रभाव – जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे बर्फ़ की शुभ्र चादर कम हो रही है और भविष्य में जल संकट का खतरा बढ़ गया है।नदियों पर प्रभाव – बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण और कचरे के कारण गंगा जैसी नदियों का 'ज्योतिर्जल' (प्रकाशमयी जल) प्रदूषित हो रहा है, जिससे उनकी पवित्रता और जलीय जीवन दोनों संकट में हैं।

विविध रंग भारत के(1 questions)

1

आप अपने कक्षा-समूह में मिलकर भारत की सांस्कृतिक विविधता पर आधारित एक पावरपॉइंट प्रस्तुति/पोस्टर/चार्ट/कोलाज तैयार कीजिए और इसे अपनी कक्षा में दिखाइए। आप भारत के विभिन्न राज्यों पर केंद्रित पावरपॉइंट प्रस्तुति/पोस्टर/चार्ट/कोलाज भी बना सकते हैं।

उत्तर:
इस गतिविधि के लिए छात्र निम्नलिखित बिंदुओं को अपने पोस्टर या प्रस्तुति में शामिल कर सकते हैं-पोशाक – उत्तर भारत का कुर्ता-पायजामा, दक्षिण की लुंगी-कमीज और पूरब-पश्चिम की क्षेत्रीय वेशभूषा।नृत्य – कत्थक, भरतनाट्यम, भांगड़ा और बिहू जैसे विविध नृत्यों के चित्र।खान-पान – विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध व्यंजन (जैसे- दाल-बाटी, डोसा, सरसों का साग)।वास्तुकला – दक्षिण के भव्य मंदिर और उत्तर के ऐतिहासिक स्मारक।

सृजन(3 questions)

1

मान लीजिए, आपको भारत को एक मनुष्य के रूप में कल्पित करते हुए सुसज्जित करने का अवसर मिले तो आप अपने राज्य के किन सांस्कृतिक, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, चिह्नों, पुष्पों आदि का प्रयोग कर उसकी साज-सज्जा करेंगे?

उत्तर:
यह प्रश्न विद्यार्थियों के स्वयं करने योग्य है। उदाहरण के लिए, यदि हम उत्तर प्रदेश (निराला जी का मूल निवास) के संदर्भ में भारत को सुसज्जित करें तो-वेशभूषा – लखनऊ की प्रसिद्ध 'चिकनकारी' वाले मलमल के अंगरखे या कुर्ते से सजाऊँगा।आभूषण – सिर पर बनारसी रेशमी पगड़ी और गले में गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाने वाले पारंपरिक आभूषण पहनाऊँगा।पुष्प – उत्तर प्रदेश के राजकीय पुष्प 'पलाश' (जिसे 'कनक' भी कहा जाता है) का प्रयोग करूँगा।प्रतीक – हाथ में ज्ञान के प्रतीक के रूप में एक प्राचीन पांडुलिपि दूँगा, जो हमारी शिक्षा-परंपरा को दर्शाएगी।
2

भारत पर आधारित एक डाक टिकट, पोस्टर या पुस्तक के लिए आवरण पृष्ठ बनाइए और बताइए कि आप उसमें किन-किन प्रतीकों को सम्मिलित करेंगे और क्यों?

उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी अपनी योग्यतानुसार देंगे। उदाहरण के लिए डाक टिकट में हिमालय, गंगा, तिरंगा, अशोक चक्र और पलाश जैसे प्रतीक शामिल किए जा सकते हैं।
3

नदी की यात्रा — गंगा नदी की अपने उद्गम स्रोत से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की पूरी यात्रा के बीच में आने वाली प्राकृतिक, सांस्कृतिक, भाषिक आदि विशेषताओं का वर्णन करते हुए एक रोचक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।(संकेत – पर्वतीय सौंदर्य से लेकर गंगासागर तक की संस्कृति इत्यादि)

उत्तर:
यात्रा-वृत्तांत शीर्षक – गंगा नदी का हिमालय से सागर तक गमन।गंगा की यात्रा केवल एक नदी का बहना नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की यात्रा है। इसकी शुरुआत हिमालय की ऊँची और ठंडी चोटियों में गंगोत्री से होती है। यहाँ इसका रूप बहुत ही चंचल और शुद्ध होता है।जैसे ही गंगा पहाड़ों से उतरकर ऋषिकेश और हरिद्वार के मैदानों में आती है, नजारा पूरी तरह बदल जाता है। यहाँ शाम को होने वाली आरती और गूँजते मंत्र एक अलग ही शांति देते हैं। आगे बढ़ते हुए, गंगा प्रयागराज पहुँचती है। यहाँ 'संगम' पर यह यमुना से मिलती है। यहाँ की संस्कृति में मेल-जोल की एक अद्भुत झलक दिखती है।वाराणसी पहुँचते-पहुँचते गंगा गहरी और शांत हो जाती है। यहाँ के घाटों पर भारत की प्राचीन परंपराएँ, संगीत और भाषा के विविध रूप देखने को मिलते हैं। अंत में, बिहार और बंगाल के उपजाऊ मैदानों को सींचती हुई, यह विशाल रूप धारण कर लेती है और गंगासागर में जाकर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है।"गंगा का यह सफ़र हमें सिखाता है कि कैसे रास्ते की बाधाओं को पार करते हुए अपनी मंजिल तक पहुँचना चाहिए।"

भाषा से संवाद — बहुभाषी देश हमारा(1 questions)

1

भारत की एक विशेषता उसकी बहुभाषिकता है। यदि आपको एक सचेत नागरिक के रूप में भारत से अपनी मातृभाषा में संवाद का अवसर मिले तो आप किन विषयों पर और क्या-क्या संवाद करना चाहेंगे? इन संवादों को अपनी मातृभाषा और हिंदी में लिखिए।(संकेत – समाज, पर्यावरण, संस्कृति आदि।)

उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए विद्यार्थी अपने क्षेत्र की किसी भी भाषा का प्रयोग करके उसका अनुवाद हिंदी में लिख सकते हैं। उदाहरण-स्वरूप यहाँ क्षेत्रीय हिंदी और शुद्ध हिंदी का प्रयोग किया गया है-विषय – सामाजिक एकतारवि (मातृभाषा) : भाई, देख रहे हो आजकल लोग छोटी-छोटी बातों पर झगड़ने लगते हैं। रवि (मानक हिंदी) : मित्र, क्या तुम देख रहे हो कि आजकल लोग तुच्छ बातों पर विवाद करने लगते हैं।अमित (मातृभाषा) : हाँ भाई, हमें समझना होगा कि मिल-जुलकर रहने में ही सबकी भलाई है। अमित (मानक हिंदी) : हाँ, हमें यह समझना चाहिए कि मिल-जुलकर रहने में ही समाज का कल्याण है।

भाषा से संवाद — मातृभाषा और भाव(1 questions)

1

"स्तव कर बहु-अर्थ-भरे" — उपर्युक्त पंक्ति में भारत की प्रशंसा विविध अर्थों में की गई है। आप भी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता की रचना कीजिए और उसका भावार्थ हिंदी में भी लिखिए।

उत्तर:
कविता – मेरी प्यारी भाषा"जन-जन की जो आशा है, वह हमारी हिंदी भाषा है, संस्कृति की पहचान है, हर भारतीय की शान है। सरल, सुबोध और मीठी वाणी, इसमें बसी है भारत की जान, साहित्य का यह मान बढ़ाती, प्रेम का हमें पाठ पढ़ाती।"भावार्थ – इस कविता का अर्थ है कि हिंदी भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि भारत के प्रत्येक नागरिक की आशा और हमारी संस्कृति की असली पहचान है। यह भाषा बहुत ही सरल और सुनने में मीठी है। इसमें हमारा गौरवशाली इतिहास और महान कहानियाँ रची गई हैं। यह भाषा न केवल साहित्य को समृद्ध करती है, बल्कि सभी को आपस में प्रेम और भाईचारे से रहना सिखाती है।

भाषा से संवाद — समास-समस्त पद एवं विग्रह(1 questions)

1

"कनक शस्य कमलधरे" — उपर्युक्त पंक्ति में 'कनक शस्य' का अर्थ है- कनक के समान शस्य (सोने जैसी फसलें) और कमलधरे का अर्थ है- हे कमल को धारण करने वाली! ये शब्द समास शब्द कहलाते हैं।कविता में से चुनकर कुछ सामासिक पद (शब्द) नीचे दिए गए हैं। उनके समास-विग्रह अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए- शतदल, ज्योतिर्जल, शतमुख, सागरजल

उत्तर:
शतदल – शत (सौ) दलों (पंखुड़ियों) का समूह – द्विगु समासज्योतिर्जल – ज्योतित जल – कर्मधारय समासशतमुख – शत (सौ) मुखों का समूह – द्विगु समाससागरजल – सागर का जल – तत्पुरुष समास

भाषा से संवाद — अलंकार-समझ और प्रयोग(2 questions)

(क)

"शतमुख-शतरव-मुखरे!" — उपर्युक्त पंक्ति के 'शतमुख' और 'शतरव' में 'श' वर्ण की पुनरावृत्ति हो रही है, इसीलिए यहाँ अनुप्रास अलंकार है।कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।

उत्तर:
अनुप्रास अलंकार वहाँ होता है जहाँ एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है। कविता में इसके उदाहरण निम्नलिखित हैं-"धवल धार हार गले।" (यहाँ 'ध' और 'र' वर्ण की आवृत्ति है)"शतमुख-शतरव-मुखरे।" (यहाँ 'श' वर्ण की आवृत्ति है)"तरु-तृण-वन-लता वसन," (यहाँ 'त' वर्ण की आवृत्ति है)
(ख)

"मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" — उपर्युक्त पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट कहा गया है। यहाँ गुण की अत्यंत समानता के कारण उपमेय में उपमान का अभेद स्थापित किया गया है, इसीलिए यहाँ रूपक अलंकार है।कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही यह भी बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है?

उत्तर:
रूपक अलंकार में उपमेय (जिसकी समानता की जाए) और उपमान (जिससे समानता की जाए) को एक ही मान लिया जाता है।पंक्ति – "मुकुट शुभ्र हिम-तुषार" – चित्रण: हिमालय की बर्फ़ (हिम-तुषार) को भारत माता के सिर के 'मुकुट' के रूप में चित्रित किया गया है।पंक्ति – "धवल धार हार गले" – चित्रण: गंगा की 'धवल धार' (सफ़ेद धारा) को भारत माता के गले के 'हार' के रूप में चित्रित किया गया है।पंक्ति – "तरु-तृण-वन-लता वसन" – चित्रण: भारत की प्राकृतिक हरियाली (पेड़, तिनके, वन और लताएँ) को भारत माता के 'वसन' (वस्त्र/कपड़े) के रूप में चित्रित किया गया है।पंक्ति – "लंका पदतल शतदल" – चित्रण: भारत के दक्षिण में स्थित लंका को भारत माता के चरणों के नीचे स्थित 'शतदल' (कमल) के रूप में चित्रित किया गया है।निष्कर्ष – कवि ने भारत को एक देवी (भारतमाता) के रूप में देखा है, जहाँ हिमालय उनका मुकुट है, नदियाँ उनका हार हैं और हरियाली उनके वस्त्र हैं।

गतिविधियाँ — मिलकर लें शपथ(1 questions)

1

"तरु-तृण-वन-लता वसन / अंचल में खचित सुमन" — वन, लता, पुष्प आदि भारत के अमूल्य प्राकृतिक संसाधन हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियमों के बारे में सूचना एकत्रित कीजिए और वन संरक्षण के लिए बनाए नियमों पर विचार कीजिए।

उत्तर:
विद्यार्थी वन संरक्षण के लिए सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियमों जैसे — वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980; वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 — के बारे में सूचना एकत्रित करें। साथ ही राष्ट्रीय वन नीति के तहत वनों की सुरक्षा, पेड़ों की कटाई पर नियंत्रण और वृक्षारोपण के नियमों पर चर्चा करें।

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