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Class 9 · HindiNCERT 2026 Revised Syllabus

Chapter 2: क्या लिखूँ? (0901CH02)

R1 and R2 book- Ganga

रामदरश मिश्र का प्रसिद्ध निबंध — निबंध-लेखन की कला, रूपरेखा, शैली और आदर्श निबंध की विशेषताओं पर मार्मिक विचार।

Chapter code: 0901ch02 · Book: R1 and R2 book- Ganga · Class 9 Hindi

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रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क(5 questions)

1

"हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।" निबंध में 'हैट' और 'खूँटी' का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है? (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत-आधारित लेखन का समर्थन करना

उत्तर:
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना।क्यों – निबंध में असली वस्तु लेखक के भाव हैं, विषय तो केवल उन्हें प्रकट करने का माध्यम है।
2

"उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है…. उसका उल्लास रहता है।" मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है? (क) शैली और स्पष्ट सहज भाषा को महत्व न देना (ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना (ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

उत्तर:
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना।क्यों – मानटेन ने जो देखा, सुना और अनुभव किया, उसे ही अपने निबंधों में लिखा।
3

"तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल….. वृद्धों के लिए अतीत सुखद…" यह तुलना किस पर आधारित है? (क) तर्क और भावना (ख) ज्ञान और शिक्षा (ग) परिश्रम और उपलब्धि (घ) अभिलाषा और अनुभव

उत्तर:
(घ) अभिलाषा और अनुभव।क्यों – तरुण भविष्य की अभिलाषाओं में जीते हैं, जबकि वृद्ध अपने अनुभवों व अतीत की सुखद स्मृतियों में।
4

निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है? (क) कविता-लेखन की कला को समझाने के लिए (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए (ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए (घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में

उत्तर:
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए।क्यों – अमीर खुसरो एक ही समय में कई विषयों पर सोच सकते थे।
5

निबंध में समाज सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है? (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। (ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव है। (ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन है। (घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।

उत्तर:
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।क्यों – इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं रहा जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।

मेरी समझ मेरे विचार(5 questions)

1

निबंध-लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?

उत्तर:
प्रसिद्ध निबंध लेखक ए. जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखना एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। जब मन में भाव आते हैं, तो अपने आप लिखने की इच्छा होती है। विषय कोई भी हो, उसमें हृदय के भावों को व्यक्त कर देते हैं। लेखन स्वाभाविक भावों से स्वतः होता है। यह स्थिति ऐसी है कि हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी इस्तेमाल हो सकती है।लेकिन लेखक के विचार भिन्न हैं। उसने ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं किया है, जिसमें भाव स्वाभाविक रूप से आ जाएँ। उसे निबंध लिखने के लिए सोचना पड़ता है और बहुत मेहनत करनी पड़ती है। उसके लिए लेखन विशेष परिश्रम है।
2

लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर:
तरुण और वृद्ध दोनों की असंतुष्टि के भिन्न कारण हैं।तरुण जीवन के वास्तविक संघर्षों से दूर होते हैं, इसलिए संसार आकर्षक लगता है। वृद्ध अपने अतीत से जुड़ाव के कारण वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं। तरुण भविष्य के उज्ज्वल सपने देखते हैं, वहीं वृद्ध अपने बीते हुए दिनों की सुखद यादों को वर्तमान में लाना चाहते हैं। तरुण भविष्य को बेहतर बनाने के लिए क्रांति लाना चाहते हैं और वृद्ध पुराने गौरव को बनाए रखना चाहते हैं। उनकी असंतुष्टि में पीढ़ियों का अंतर है। युवा तेज बदलाव चाहते हैं, वृद्ध स्थिरता को महत्व देते हैं।
3

नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?

उत्तर:
नमिता 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' विषय पर निबंध लिखवाना चाहती है। अमिता ने लेखक से समाज-सुधार विषय पर निबंध लिखने का आग्रह किया।लेखक को निबंध लिखने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पहली समस्या उपयुक्त विषय चुनने और उसे विस्तार देने की थी। दोनों विषयों पर नई और पर्याप्त सामग्री जुटाकर लंबा निबंध लिखना लेखक के लिए चुनौतीपूर्ण था। लेखक के पास समय का अभाव था। दो घंटे में दो अलग-अलग विषयों पर निबंध तैयार करने की जिम्मेदारी ने उनकी उलझन और बढ़ा दी थी। लेखक को उचित रूपरेखा और शीर्षक चुनना भी मुश्किल लग रहा था। उन्होंने माना कि आदर्श निबंध लिखने के लिए उन्हें विशेष परिश्रम करना पड़ेगा।
4

निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?

उत्तर:
निबंधशास्त्र के आचार्यों ने निबंध लिखने के लिए कई युक्तियाँ सुझाई हैं। उनके अनुसार निबंध लेखन केवल जानकारी प्रस्तुत करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लेखक के अंतर्मन, अनुभव और भावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति है। निबंध रचना में ज्ञान के साथ-साथ सोच की स्वतंत्रता, संवेदनशीलता और भाषा की सहजता भी होनी चाहिए। विद्वानों का यह भी कहना है कि निबंध की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए। इससे निबंध लिखते समय क्रम बना रहता है और विषय से भटकाव नहीं होता। विचारों को स्पष्ट करने के लिए मुहावरों, लोकोक्तियों और अलंकारों के समावेश और उदाहरणों के प्रयोग से निबंध रोचक बनता है।मैं एक छात्रा के रूप में निबंध-रचना के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को सम्मिलित करूँगी- विषय की स्पष्टता आवश्यक है। उदाहरण के लिए यदि विषय पर्यावरण की रक्षा है तो निबंध इसी पर केंद्रित रहना चाहिए। व्यवस्थित संरचना- निबंध को तीन भागों में बाँटना- भूमिका, मुख्य भाग (विषय-वस्तु) और उपसंहार। सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली भाषा के प्रयोग से निबंध छात्रों को आसानी से समझ आ जाता है। उदाहरणों, कहावतों, सूक्ति या प्रश्नों के प्रयोग से निबंध में रोचकता लाने का प्रयास करना चाहिए।
5

मानटेन ने "जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।" निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?

उत्तर:
निबंधकार मानटेन के अनुसार निबंध लेखन प्रक्रिया में देखना, सुनना और अनुभव करना महत्वपूर्ण है। जब लेखक स्वयं देखी और अनुभव की गई बातों को लिखता है, तो निबंध जीवंत और वास्तविक लगता है। निबंध-लेखन के लिए निजी अनुभूतियों को व्यक्त करने की बहुत उपयोगिता है। इससे लेखक की सच्ची भावनाएँ पाठक तक पहुँचती हैं, जिससे वह जुड़ाव महसूस करता है। इस प्रकार निबंध-रचना मौलिक और प्रभावशाली बनती है। यही सच्ची रचनात्मकता का आधार है।

विधा से संवाद — निबंध लिखने की कला(1 questions)

1

'निबंध' का शाब्दिक अर्थ है- 'बाँधना' (नि + बंध), अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है, तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?

उत्तर:
निबंध लेखन एक कला होने के साथ-साथ एक व्यवस्थित प्रक्रिया भी है। इसमें विषय प्रेरणा, विषय का उचित चयन, आवश्यक सामग्री संग्रह, सुव्यवस्थित रूपरेखा, भाषा-शैली और प्रभावी निष्कर्ष का विशेष महत्व है।निबंध – जीवन में अनुशासन और उसका महत्त्व1. विषय चयन – अनुशासन प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को सफल, प्रसन्न और व्यवस्थित बनाने का आधार है।2. प्रेरणा – जब हम अपने आस-पास देखते हैं तो उन लोगों से प्रेरणा मिलती है, जो नियमों का पालन करते हैं और अपने समय व कार्यों को समय पर पूर्ण करने का प्रयास करते हैं। विद्यार्थी जीवन में इसका बहुत महत्व है। एक अनुशासित विद्यार्थी नियमित अध्ययन करता है, समय का सही उपयोग करता है और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर पाता है। ऐसे ही खेल के क्षेत्र में भी अनुशासन का विशेष महत्व है। महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने अपने कठोर अनुशासन, निरंतर अभ्यास और समर्पण के कारण देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान बनाई।3. सामग्री संकलन, शैली और रूपरेखा – अनुशासन सही नियमों के पालन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक व्यवस्थित कला है। अनुशासन कार्यों को ढंग से पूरा करने और अपने व्यवहार में आत्म-नियंत्रण सिखाता है। अनुशासित व्यक्ति अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ता है और किसी भी परिस्थिति में धैर्य और संयम बनाए रखता है।अनुशासन से आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। विद्यालय समय पर पहुँचना, गृहकार्य नियमित रूप से करना, बड़ों का सम्मान करना और नियमों का पालन- ये सभी अनुशासन के ही उदाहरण हैं। इस संदर्भ में एक सकारात्मक लोकोक्ति बहुत उपयुक्त है- 'नियमित कदम ही, मंजिल तक पहुँचाते हैं।' लगातार अभ्यास और अनुशासन से बड़े-से-बड़े लक्ष्य को पाया जा सकता है। इसके विपरीत, अनुशासनहीनता जीवन को अव्यवस्थित कर देती है और व्यक्ति को अपने लक्ष्य से भटकाती है। भटके हुए व्यक्ति को बाद में हाथ मलते रह जाना पड़ता है। इसलिए हमें अपने जीवन में अनुशासन अपनाकर संस्कारी और आदर्श जीवन की ओर बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।समापन – निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि अनुशासन केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं है। यह परिवार, समाज और देश की प्रगति का आधार भी है। अनुशासित लोग न सिर्फ परिवार या समाज, बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 'अनुशासन ही जीवन की सच्ची पूँजी है'- इस कथन को हर व्यक्ति अपने जीवन में अपनाकर अपने वर्तमान और भविष्य को उज्ज्वल बना सकता है।

भाव विस्तार(4 questions)

1

भाव विस्तार कीजिए – "जो तरुण संसार के जीवन संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।"

उत्तर:
कम अनुभव के कारण युवा अक्सर जीवन के कठोर संघर्षों, सच्चाइयों और वास्तविकताओं से अनजान रहते हैं। इस अवस्था में कल्पनाओं और सपनों से भरा संसार मनमोहक लगता है। वे अपने चारों ओर की दुनिया को सफलता, खुशियों और समृद्धि से भरा मान लेते हैं। लेकिन जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, संघर्ष और जिम्मेदारियाँ सामने आने लगती हैं।
2

भाव विस्तार कीजिए – "मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।"

उत्तर:
मानव इतिहास में हर युग में सुधारों की आवश्यकता रही है, और भविष्य में भी रहेगी। समाज लगातार विकास की प्रक्रिया में आगे बढ़ता रहता है। मानव अपनी जरूरतों और कमियों को पहचानकर, सुधारों की ओर बढ़ता है। जो आज नया है, वह कल पुराना या अप्रासंगिक हो सकता है। हमें बदलाव को स्वीकार करते हुए नए विचार और तकनीकों को अपनाते रहना चाहिए।
3

भाव विस्तार कीजिए – "आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।"

उत्तर:
जीवन का हर चरण बदलता रहता है। जो आज तरुण है, वह समय के साथ वृद्ध हो जाएगा। तब वह उन दिनों को याद करेगा जब वह सक्रिय, स्वस्थ और सफल रहा था। वह भविष्य में अपने बीते हुए समय को ही मूल्यवान और गौरवपूर्ण अनुभव के रूप में याद करेगा। इसलिए युवाओं को वर्तमान समय का उचित सदुपयोग करना चाहिए, क्योंकि आगे चलकर, वही यादों व सोच का आधार बन जाता है।
4

भाव विस्तार कीजिए – "निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।"

उत्तर:
लेखन-कला का महत्वपूर्ण गुण है कि विचारों को सरल, स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया जाए। छोटा निबंध बड़े निबंध की तुलना में अच्छा है, क्योंकि इसमें बात या विषय को सरल और स्पष्ट रूप से रखा जाता है। लंबा निबंध उलझन पैदा कर सकता है जबकि संक्षिप्तता से लेखन अधिक रोचक और प्रभावी बन जाता है। पाठक विषय को आसानी से समझ लेते हैं और उनका ध्यान भी बना रहता है। इससे समय की बचत भी होती है।

मेरा अनुभव(1 questions)

1

इस निबंध में लेखक को दो विषयों ('दूर के ढोल सुहावने होते हैं' और 'समाज-सुधार') पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?

उत्तर:
कक्षा आठवीं में हमें कई विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखने का अवसर मिला। कुछ विषयों पर लिखना सरल लगा परंतु कुछ विषय कठिन प्रतीत हुए। जिन विषयों से हमारा दैनिक अनुभव और ज्ञान जुड़ा होता है, वे सरल लगते हैं। उदाहरण के लिए 'मेरा प्रिय खेल' या 'मेरा परिवार' जैसे विषयों पर बहुत अधिक सोचने या शोध करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इन विषयों पर हम देखी, सुनी बातों, अनुभव और भावनाओं को आसानी से व्यक्त कर सकते हैं। वहीं कुछ विषयों के लिए गहन शोध सामग्री, अधिक समय और बहुत सोच-विचार की आवश्यकता होती है, इसलिए वे कठिन लगते हैं। इससे हम यह सीखते हैं कि समय के सही उपयोग, अभ्यास और पढ़ाई से हम हर विषय को सरल व सहज बना सकते हैं।

विषयों से संवाद(4 questions)

1

निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।

उत्तर:
बुद्धदेव, महावीर, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि महान सुधारकों ने समाज के कल्याण और उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।गौतम बुद्ध – इन्होंने करुणा, दया और अहिंसा का संदेश दिया और समाज कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया। अष्टांगिक मार्ग के आठ सिद्धांतों के पालन पर बल दिया। इसके माध्यम से नैतिक, संयमित और संतुलित जीवन जीने का मार्ग बताया।महावीर स्वामी – महावीर स्वामी ने हर जीव के प्रति दया और करुणा का संदेश दिया। पाँच महाव्रत (अहिंसा, सत्य, अस्तेय यानी चोरी न करना, अपरिग्रह यानी अधिक संग्रह न करना और ब्रह्मचर्य) का पालन करने का मार्ग दिखाया। आत्मशुद्धि और मोक्ष के लिए प्रेरित किया। अच्छे कर्म, सादगी, संयम और तपस्या के माध्यम से आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति के मार्ग को बढ़ावा दिया।नागार्जुन – नागार्जुन बौद्ध दार्शनिक और समाज सुधारक थे। इन्होंने शून्यवाद के सिद्धांत के माध्यम से बताया कि संसार की सभी वस्तुएँ स्थायी नहीं हैं, बल्कि परिवर्तनशील हैं। इन्होंने जटिल दार्शनिक विचारों को आम लोगों के लिए समझने योग्य बनाया। धर्म और दर्शन को अंधविश्वास से मुक्त कर तर्कसंगत बनाने का प्रयास किया।शंकराचार्य – आदि शंकराचार्य ने समाज कल्याण के लिए अद्वैत वेदांत का प्रचार किया। उन्होंने आत्मा और परमात्मा की एकता का सिद्धांत दिया। पूरे भारत में भ्रमण कर धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया। चार प्रमुख मठों (शृंगेरी, द्वारका, पुरी, ज्योतिर्मठ) की स्थापना की। जटिल धार्मिक अनुष्ठानों को सरल बनाने का प्रयास किया। भारत के विभिन्न क्षेत्रों को आध्यात्मिक रूप से जोड़कर राष्ट्रीय एकता को प्रेरित किया। वैदिक धर्म का पुनरुद्धार किया और समाज में लोगों को ज्ञान की ओर प्रेरित किया।कबीर – धार्मिक पाखंड और जातिवाद का विरोध किया। सरल भाषा में ईश्वर भक्ति और प्रेम का संदेश दिया। निर्गुण भक्ति की उपासना पर बल दिया। समाज को समानता, मानवता और एकता का संदेश दिया।गुरु नानक देव – 'एक ओंकार' का सिद्धांत देकर ईश्वर की एकता का संदेश दिया। लंगर प्रथा शुरू की। सेवा भाव, परिश्रम और ईमानदारी का महत्त्व प्रतिपादित किया। सामाजिक अन्याय का विरोध किया और प्रेम, शांति व भाईचारे का संदेश फैलाया।
2

निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।

उत्तर:
समाज में शिक्षा, स्त्री-सशक्तीकरण, पर्यावरण-संरक्षण, समानता और दिव्यांगजन के क्षेत्र में कई प्रेरणादायक व्यक्ति और संगठन सक्रिय हैं। ये लोग और संस्थाएँ जमीनी स्तर पर काम करते हुए शिक्षा का प्रसार, महिला व बाल विकास और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देते हैं।नारायण सेवा संस्थान – उदयपुर राजस्थान में स्थित एक प्रमुख गैर सरकारी संगठन (NGO) है, जो दिव्यांगों और वंचितों के पुनर्वास के लिए काम करता है। यह संस्थान जरूरतमंद बच्चों के लिए निःशुल्क दिव्यांग सर्जरी, कृत्रिम अंग वितरण (कौशल विकास, पुनर्वास) और सामूहिक विवाह जैसे मानवीय कार्य करते हुए समाज-सुधार को महत्व देता है।SEWA (स्व-रोजगार, महिला संघ) – यह अहमदाबाद, गुजरात में स्थापित संस्था है। इसका उद्देश्य अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में कार्य करने वाली महिला श्रमिकों के लिए पूर्ण रोजगार और आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। यह संस्था महिला श्रमिकों के लिए कार्य-सुरक्षा, आय-सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में प्रयास कर रही है। SEWA ने भारत के 18 राज्यों में महिला श्रमिकों को संगठित किया है।ऊर्जा और संसाधन संस्थान (TERI) – यह संस्थान ऊर्जा की बचत और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करता है।विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (CSE) – यह संस्था प्रदूषण और पर्यावरणीय विकास पर शोध करती है और सामाजिक जागरूकता फैलाती है।नवदान्या – यह संस्था जैविक खेती और किसानों के अधिकारों के लिए कार्य करती है।
3

आपको 'समाज-सुधार' करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।

उत्तर:
यदि मुझे एक विद्यार्थी के रूप में समाज-सुधार का अवसर मिले तो मैं सरल और छोटे-छोटे कार्यों से शुरुआत करूँगी।शिक्षा का प्रसार – शिक्षा के महत्व को समझते हुए, मैं अपने आस-पास छोटे और जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने में मदद करूँगी। अगर मेरे इलाके में कोई बच्चा स्कूल नहीं जा पा रहा या आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई में रुकावट आ रही है, तो मैं उसे पढ़ने के लिए प्रेरित करूँगी और उचित सहायता देने का प्रयास करूँगी।स्वच्छता और स्वास्थ्य – मैं स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान देना चाहूँगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में, लोगों को साफ-सफाई, स्वच्छ जल के उपयोग और संतुलित आहार के बारे में जागरूक करना महत्वपूर्ण कार्य है। नेशनल हेल्थ मिशन जैसी योजनाओं से जानकारी लेकर परिवार और समाज में साझा की जा सकती है। स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरणा लेकर लोगों को स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित करूँगी। मैं कचरे को गीले और सूखे रूप में अलग करने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए लोगों को समझा सकती हूँ।समाज सुधार हेतु मैं अपने विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भाग लेकर आगे बढ़ सकती हूँ। पोस्टर प्रतियोगिता, भाषण, निबंध लेखन, पर्यावरण क्लब, सामाजिक कल्याण कौशल क्लब की गतिविधियाँ समाज कल्याण का आधार बनती हैं। इसके अलावा, छात्रा के रूप में स्कूल की एन.एस.एस (नेशनल सर्विस स्कीम) या स्काउट-गाइड जैसे कार्यक्रमों में भाग लेकर एक बेहतर और जागरूक समाज बनाने में अपना योगदान देना चाहूँगी।
4

भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।

उत्तर:
भारतीय ज्ञान साहित्य बहुत समृद्ध है, जिसमें नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन से जुड़ी प्रेरणादायी बातें हैं। वेद, उपनिषद, भगवत गीता धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं। रामायण और महाभारत जैसे महान महाकाव्य, पंचतंत्र, हितोपदेश, अर्थशास्त्र, पतंजलि योगशास्त्र आदि ज्ञान साहित्य जीवन को सही तरीके से जीने की कला सिखाते हैं। हम विद्यार्थी इस साहित्य को पढ़कर नैतिकता, आत्म-नियंत्रण और व्यावहारिक बुद्धि विकसित कर सकते हैं। भारतीय ज्ञान साहित्य को समझकर हम अपनी पढ़ाई और करियर में सफल हो सकते हैं। जहाँ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार आएगा, वहीं हम समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी गहराई से समझ सकेंगे। भारतीय ज्ञान-साहित्य हमें स्वस्थ शरीर, शांत मन और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है, जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तरों पर जीवन संतुलित होता है।

सृजन(2 questions)

1

'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी- 'आम के आम गुठलियों के दाम'। अब आप इस लोकोक्ति और 'जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास' विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।

उत्तर:
लेख — 'आम के आम और गुठलियों के दाम और जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास'"आम के आम और गुठलियों के दाम" लोकोक्ति का अर्थ है- एक ही कार्य से दोहरा लाभ प्राप्त करना। यह बात आज जैविक खाद निर्माण में पूरी तरह सही साबित होती है। आज पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में यह लोकोक्ति और भी प्रासंगिक हो जाती है।कीटनाशक और रासायनिक खादों का अधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित करता है। इसलिए जैविक खेती एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर रही है। आम खाने के बाद अक्सर उसकी गुठलियों को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, परंतु यही गुठलियाँ उपयोगी संसाधन बन सकती हैं। इन गुठलियों को सुखाकर पीसकर या कम्पोस्ट प्रक्रिया में मिलाकर जैविक खाद तैयार की जा सकती है। यह प्राकृतिक खाद मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाती है और पेड़-पौधों व फसलों को पोषण प्रदान करती है। जैविक खाद रसोई के फल-सब्जियों के कचरे, सूखे पत्तों और गोबर आदि से बनाई जाती है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि घर और विद्यालय में जैविक खाद बनाकर कचरे का सही उपयोग किया जाए। पर्यावरण संरक्षण के लिए जैविक जीवनशैली अपनाना जरूरी हो गया है। जैविक खाद रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों से बचने का अच्छा विकल्प है। इस संदर्भ में आम की गुठलियों का उपयोग एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनता है। आम रसीला फल है और उसकी गुठलियाँ भी उपयोगी बन जाती हैं। यह लोकोक्ति हमारे जैविक खाद निर्मिति के प्रयास को पूरी तरह सार्थक बनाती है।
2

"जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।"आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।

उत्तर:
डायरी लेखनदिनांक: 10 अप्रैल, 2027आज का दिन मेरे लिए एक नया अनुभव लेकर आया। अक्सर कहा जाता है कि "दूर के ढोल सुहावने लगते हैं"। आज मैंने इसे अपने जीवन में सच होते देखा!मैंने अपने इलाके के पास एक नई कोचिंग संस्थान के बारे में सुना। बड़े-बड़े होर्डिंग्स और पोस्टर लगे हुए थे जिनमें शानदार परीक्षा परिणामों और टॉपर्स की तस्वीरें दिखाई गई थीं। मुझे लगा प्रचार-प्रसार में इतना पैसा खर्चा गया है तो कोचिंग बहुत ही अच्छी होगी और यहाँ पढ़ने से अंक अच्छे प्राप्त होंगे।जल्द ही मैंने कोचिंग संस्थान में दाखिला ले लिया। जब मैं पहली बार उस कोचिंग संस्थान में गया, तो सब बड़ा आकर्षक लगा। लेकिन कुछ दिनों में सच्चाई सामने आने लगी। कक्षाओं में बहुत भीड़ थी। शिक्षक छात्रों के सवालों और समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे थे। शिक्षकों का ध्यान अधिक-से-अधिक कक्षाएँ लेने में था और उनका कोचिंग का तरीका प्रभावी भी नहीं था। मेरे उत्साह में कमी आ गई थी। मुझे समझ आ गया कि जो चीज़ दूर से आकर्षक लग रही थी, वह वास्तव में भिन्न थी।मैंने सीखा कि हमें वास्तविकता को समझकर निर्णय लेना चाहिए। बाहरी दिखावे या प्रचार के आधार पर सोच नहीं बनानी चाहिए। – एक विद्यार्थी

भाषा से संवाद — व्याकरण की बात — समास(6 questions)

1

"मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा।" उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह दो पदों 'निबंध' और 'रचना' के मेल से बना है जिसका अर्थ है- निबंध की रचना। समास के बारे में बताइए।

उत्तर:
समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है, जैसे- गंगा + जल = गंगाजल, देश + भक्ति = देशभक्ति। इस प्रकार समास वह शब्द रचना है, जिसमें दो (या दो से अधिक), अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबंध रखने वाले, स्वतंत्र शब्द रचना के अंग होते हैं।समास-रचना में प्रायः दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। जैसे- गंगाजल में 'गंगा' पूर्वपद और 'जल' उत्तरपद है। इसी तरह देशभक्ति शब्द में 'देश' को पूर्वपद और 'भक्ति' को उत्तरपद कहेंगे। समास-रचना से बने शब्द को 'समस्त पद' कहते हैं; जैसे- गंगाजल, देशभक्ति।यदि समास-रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग अलग-अलग करने हों, तो उस प्रक्रिया को समास विग्रह कहते हैं। जैसे यदि 'गंगाजल' समस्त पद के अंग अलग-अलग (समास विग्रह) करें, तो दो पद निकलेंगे। समास विग्रह इस प्रकार लिखते हैं- गंगाजल = गंगा + जल (गंगा का जल)। समास के छह प्रमुख भेद हैं।
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निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। आपकी समझ के लिए एक उदाहरण तालिका में दिया गया है। पाठ से अन्य उदाहरण चुनकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर:
पाठ से प्रमुख सामासिक शब्दों के समास विग्रह- निबंध-रचना = निबंध की रचना (संबंध तत्पुरुष समास), समाज-सुधार = समाज का सुधार (संबंध तत्पुरुष समास), भाषा-शैली = भाषा की शैली (संबंध तत्पुरुष समास)।इसी प्रकार पाठ से और भी सामासिक शब्द ढूँढ़कर उनका विग्रह करके समास का नाम लिखिए।
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उपसर्ग एवं प्रत्यय – "सेनापति ने भी अपनी कविता दुर्बोध कर दी है।" "समाज-सुधार की चर्चा अनादि काल से लेकर आज तक होती आ रही है।" दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों में मूल शब्द के पहले 'दुर्' उपसर्ग और 'आदि' के पहले 'अन' उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। उपसर्ग भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं जिनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता। ये शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं। प्रत्यय भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं जिनका प्रयोग स्वतंत्र रूप में नहीं होता और जो शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं। निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर:
'क्या लिखूँ' पाठ में प्रयुक्त उपसर्ग-युक्त शब्द- दुर्बोध (दुर् + बोध), अनादि (अन् + आदि), अपमान (अप + मान), परिश्रम (परि + श्रम), स्वाभाविक (स्व + भाविक), असंतुष्ट (अ + संतुष्ट)।पाठ में प्रयुक्त प्रत्यय-युक्त शब्द- सुधारक (सुधार + क), कठिनाई (कठिन + आई), लेखक (लेख + अक), लेखन (लेख + अन), प्रभावशाली (प्रभाव + शाली)।
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नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए- निबंध लिखना बड़ी …………… (कठिन…) की बात है। वर्तमान से दोनों को …………… (……संतोष) होता है। वाक्यों में कुछ …………… (…..स्पष्ट…..) भी चाहिए, क्योंकि यह …………… (…..स्पष्ट…..) या …………… (……बोध……) गांभीर्य ला देती है।

उत्तर:
निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है। वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है। वाक्यों में कुछ अस्पष्ट भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है।
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नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है। उदाहरण – मधुर → मधुरता, माधुर्य, सुमधुर सुधार → …………… सुंदर → …………… गति → …………… समाज → ……………

उत्तर:
सुधार → सुधारक, सुधारवादी, सुधार्यसुंदर → सुंदरता, सौंदर्यगति → प्रगति, सद्गति, दुर्गति, अधोगति, गतिशील, गतिहीनसमाज → सामाजिक, असामाजिक, समाजशास्त्र
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भाव एक शब्द अनेक – इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने-मधुर-मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
पाठ से मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द और वाक्य-प्रयोग-उमंग – स्फूर्ति – आवेग - उमंग – त्योहार पर मन नई उमंग से भर जाता है। - स्फूर्ति – व्यायाम करने से शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है। - आवेग – जूही ने आवेग में आकर कुछ-का-कुछ कह दिया।खुशी – आनंद – प्रसन्नता - खुशी – हमें सफलता मिलने पर खुशी होती है। - आनंद – त्योहार पर सबके चेहरे पर आनंद था। - प्रसन्नता – अपने बेटे का घर वापस आने का समाचार सुनकर मुझे प्रसन्नता हुई।सुहावना – मधुर – मनमोहक - सुहावना – आज मौसम बहुत सुहावना है। - मधुर – बच्चों ने बहुत मधुर आवाज में गीत गाया। - मनमोहक – वर्षा ऋतु में प्रकृति का दृश्य मनमोहक लगता है।संकोच – आशंका – विषाद - संकोच – उस बालक को अपनी बात कहने में संकोच हो रहा था। - आशंका – छात्रों के मन में परीक्षा परिणाम को लेकर आशंका बनी हुई थी। - विषाद – गणित में कम अंक आने की वजह से कई छात्रों का मन विषाद से भर गया।ध्वनि – कलरव – संगीत - ध्वनि – भजन की मधुर ध्वनि से मन प्रसन्न हो गया। - कलरव – पक्षियों का कलरव मन को शांति प्रदान करता है। - संगीत – प्रकृति के कण-कण में संगीत निहित है।

गतिविधियाँ(2 questions)

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"खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।"पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।

उत्तर:
अमीर खुसरो द्वारा रचित अनमेलियों, पहेलियों और मुकरियों के उदाहरण निम्नलिखित हैं-अनमेलियाँ पथिक प्यासा क्यों? गधा उदास क्यों? घर अंधियारा क्यों? फकीर बिगड़ा क्यों?पहेलियाँ एक जानवर रंग रंगीला, बिना मारे वह रोवे। उसके सिर पर तीन तिलाके, बिन बताए सोवे। एक थाल मोतियों से भरा, सबके सर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।मुकरियाँ रात समय वह मेरे आवे, भोर भये वह घर उठि जावे, यह अचरज है सबसे न्यारा, ऐ सखि साजन? ना सखि तारा! लिपट लिपट के वा के साई। छाती से छाती लगा के रोई। दाँत से दाँत बजे तो ताड़ा, ऐ सखि साजन? ना सखि जाड़ा।
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कक्षा में 'युवा और वृद्ध-दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर' पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।

उत्तर:
वाद-विवाद विषय- 'युवा और वृद्ध- दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर'नियम – प्रत्येक वक्ता को 2 मिनट का समय मिलेगा। भाषा शिष्ट और सरल होनी चाहिए। पहले पक्ष और फिर विपक्ष अपनी बात रखेंगे। अंत में शिक्षक (निर्णायक) परिणाम घोषित करेंगे।संचालक – आदरणीय शिक्षकगण और प्रिय सहपाठियों! आप सभी का आज कक्षा वाद-विवाद गतिविधि में स्वागत है। आज का विषय है- 'युवा और वृद्ध पीढ़ियों के बीच पीढ़ीगत अंतर'। अब मैं, पक्ष के वक्ता को मंच पर प्रस्तुतीकरण के लिए आमंत्रित करती हूँ।वक्ता (समर्थन) – आदरणीय शिक्षकगण और प्यारे सहपाठियो! मैं इस विषय के समर्थन में विचार प्रस्तुत करना चाहती हूँ। पीढ़ीगत अंतर आवश्यक है। युवा नई सोच और क्रांति यानी बदलाव लाते हैं। वृद्धजन अनुभव व ज्ञान देते हैं। दोनों के विचारों का मेल समाज/देश को आगे बढ़ाता है। युवा तकनीकी प्रगति और नए विकास में विश्वास रखते हैं, वहीं वृद्धों, बड़े-बुजुर्गों का मार्गदर्शन सही दिशा प्रदान करने में सहायक है। यह संतुलन जरूरी है।वक्ता (विपक्ष) – आदरणीय शिक्षकगण और मेरे साथियो! मैं इस विषय के पक्ष में नहीं हूँ। आशा है आप मेरे विचार समझेंगे। पीढ़ीगत अंतर से दूरियाँ बढ़ती हैं। युवा भविष्य की बातें करते हैं तो वृद्ध अपने अतीत में जीते हैं। यह संघर्ष का कारण बनता है। कई बार युवा और वृद्ध एक-दूसरे की बात समझ नहीं पाते। इससे दूरी बढ़ती है। युवा परंपराओं को रुकावट मान लेते हैं और वृद्ध आधुनिक सोच को स्वीकार नहीं कर पाते।निष्कर्ष – संचालक दोनों पक्षों के विचार सुनने के बाद हम कह सकते हैं कि हमें इस अंतर को समझदारी और धैर्य से संभालना चाहिए। हमें उज्ज्वल भविष्य और गौरवशाली अतीत दोनों का सम्मान करना चाहिए। तभी समाज में संतुलन व विकास बना रहेगा। अब मैं निर्णायक मंडल से परिणाम घोषित करने का अनुरोध करती हूँ। धन्यवाद।

भाषा संगम(1 questions)

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"निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।"नीचे 'निबंध' शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। इनके अतिरिक्त यदि आप 'निबंध' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए। उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

उत्तर:
निबंध (हिंदी); निबंध: (संस्कृत); निबंध (पंजाबी); मजमून (उर्दू); मजमून (कश्मीरी); मज्मूनु, निबंधु (सिन्धी); निबंध (मराठी); निबंध (गुजराती); निबंध (कोंकणी); निबंध (नेपाली); निबंध, प्रबंध (बांग्ला); निबंध-रचना (असमिया); निबंध, वाड्ङ् (मणिपुरी); प्रबंध, रचना (ओड़िआ); व्यासमु (तेलुगु); कटटुरै (तमिल); उपन्यासम् (मलयालम); लेख, प्रबंध (कन्नड़)।निबंध शब्द का विदेशी भाषाओं में प्रयोग अंग्रेजी – Essay, फ्रेंच – Essai, स्पेनिश – Ensayo, रूसी – Esse, जापानी – Essei, चीनी – Jiuowen"निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।" इस वाक्य को पंजाबी (गुरुमुखी लिपि) में लिखिए।

झरोखे से(1 questions)

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पाठ में आदर्श निबंध लेखन के विषय में विस्तार से बताया गया है। अब आप सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' का लेख "मैं क्यों लिखता हूँ?" पढ़िए।

उत्तर:
मैं क्यों लिखता हूँ?मैं क्यों लिखता हूँ? यह प्रश्न बड़ा सरल जान पड़ता है पर बड़ा कठिन भी है, क्योंकि इसका सच्चा उत्तर लेखक के आंतरिक जीवन के स्तरों से संबंध रखता है। उन सबको संक्षेप में कुछ वाक्यों में बाँध देना आसान तो नहीं ही है, न जाने संभव भी है या नहीं? इतना ही किया जा सकता है कि उनमें से कुछ का स्पर्श किया जाए- विशेष रूप से ऐसों का जिन्हें जानना दूसरों के लिए उपयोगी हो सकता है।एक उत्तर तो यह है कि मैं इसीलिए लिखता हूँ कि स्वयं जानना चाहता हूँ कि क्यों लिखता हूँ। लिखे बिना इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल सकता है। वास्तव में सच्चा उत्तर यही है। लिखकर ही लेखक उस आभ्यंतर विवशता को पहचानता है जिसके कारण उसने लिखा और लिखकर ही वह उससे मुक्त हो जाता है। मैं भी उस आंतरिक विवशता से मुक्ति पाने के लिए तटस्थ होकर उसे देखने और पहचान लेने के लिए लिखता हूँ। मेरा विश्वास है कि सभी कृतिकार- क्योंकि सभी लेखक कृतिकार नहीं होते, न उनका सब लेखन ही कृति होता है- इसीलिए लिखते हैं। यह ठीक है कि कुछ ख्याति मिल जाने के बाद कुछ बाहर की विवशता से भी लिखा जाता है- संपादकों के आग्रह से, प्रकाशक के तकाजे से, आर्थिक आवश्यकता से। पर एक तो कृतिकार हमेशा अपने सम्मुख ईमानदारी से यह भेद बनाए रखता है कि कौन-सी कृति भीतरी प्रेरणा का फल है, कौन-सा लेखन बाहरी दबाव का, दूसरे यह भी होता है कि बाहर का दबाव वास्तव में दबाव नहीं रहता, वह मानो भीतरी उन्मेष का निमित्त बन जाता है।- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'

खोजबीन(1 questions)

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पाठ में आए साहित्यकारों बाणभट्ट, श्रीहर्ष, अमीर खुसरो, सेनापति, महात्मा गांधी, ए. जी. गार्डिनर, शेक्सपीयर, मानटेन के विषय में पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।

उत्तर:
बाणभट्ट – सातवीं शताब्दी के प्रसिद्ध संस्कृत गद्यकार और कवि थे। उनके द्वारा रचित दो प्रमुख ग्रंथ हैं- हर्षचरितम् तथा कादम्बरी। वे राजा हर्षवर्धन के आस्थावान कवि थे।श्रीहर्ष – 12वीं सदी के संस्कृत के प्रसिद्ध कवि तथा दार्शनिक। उनमें उच्चकोटि की काव्यात्मक प्रतिभा थी और वे अलंकृत शैली के कवि माने जाते हैं। महान कवि होने के साथ-साथ बड़े दार्शनिक भी थे। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- पियादासिका, रत्नावली और नागानंद।अमीर खुसरो – खड़ी बोली हिंदी के प्रसिद्ध कवि। उन्होंने खड़ी बोली का सूत्रपात 'हिंदवी' के रूप में किया था। उन्होंने पहेलियाँ, मुकरियाँ, दोहे और गजलें लिखीं।सेनापति (1616) – हिंदी साहित्य के भक्ति काल और रीतिकाल के संधिकाल के एक महान कवि थे, जो अपनी उत्कृष्ट ब्रजभाषा रचनाओं विशेषकर प्रकृति चित्रण के लिए प्रसिद्ध हैं। इनका प्रसिद्ध ग्रंथ 'कवि रत्नाकर' है।ए. जी. गार्डिनर – 20वीं सदी के प्रारंभ के एक प्रसिद्ध अंग्रेज निबंधकार और संपादक थे। इनकी लेखन शैली अत्यंत स्पष्ट, सरल और मानवीय थी। ये गंभीर सामाजिक मुद्दों को आम भाषा में समझाने की क्षमता रखते थे।मानटेन – मानटेन का निबंध साहित्य पर प्रभाव वैश्विक है। उन्हें निबंध-विधा का जनक और आधुनिक संशयवाद का संस्थापक माना जाता है।शेक्सपियर – ये अंग्रेजी भाषा के महान कवि, नाटककार और अभिनेता माने जाते हैं। इन्होंने रोमियो जूलियट, हैमलेट और मैकबेथ जैसे प्रसिद्ध नाटक और सॉनेट लिखे, जो मानवीय भावनाओं और प्रेम पर आधारित हैं।महात्मा गांधी – एक ओजस्वी लेखक, पत्रकार और विचारक थे। अपनी सरल और प्रभावकारी भाषा-शैली के माध्यम से सत्य, अहिंसा के दर्शन को दुनिया भर में फैलाया। 'यंग इंडिया', 'नवजीवन' जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-जागरण का कार्य किया।

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