Class 9 · HindiNCERT 2026 Revised Syllabus
Chapter 6: रीढ़ की हड्डी (0901CH06)
R1 and R2 book- Ganga
जगदीशचंद्र माथुर की व्यंग्यप्रधान एकांकी — शिक्षा, विवाह और समाज की रूढ़ियों पर चोट करती उमा की आत्मसम्मान से भरी कहानी।
Chapter code: 0901ch06 · Book: R1 and R2 book- Ganga · Class 9 Hindi
Find complete NCERT solutions for Class 9 Hindi, R1 and R2 book- Ganga Chapter 6. Every question has a clear, step-by-step answer for chapter code 0901CH06.
Jump to:
रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क(6 questions)
1
'रीढ़ की हड्डी' का शीर्षक किसका प्रतीक है? (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का (ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का (घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
उत्तर:
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का।क्यों – 'रीढ़ की हड्डी' में शंकर पर कटाक्ष है। शंकर में नैतिक और मानसिक बल नहीं है। लड़कियों के होस्टल के चक्कर लगाना उसकी नैतिकता की कमी पर कटाक्ष है। किसी बात में राय न दे पाना आत्महीनता पर चोट है।
2
'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है? (क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर (ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर (ग) विवाह और अशिक्षा पर (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
उत्तर:
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर।क्यों – इस नाटक में समाज की विवाह और शिक्षा संबंधी अनुचित मान्यताओं पर व्यंग्य किया गया है। लड़कियों को अनपढ़ रखना, शिक्षित लोगों का भी अनपढ़ पत्नी चाहना, विवाह संबंध में धोखा देना, देखावा करना, एक-दूसरे को छलना आदि ऐसी समस्याएँ हैं, जिनकी ओर ध्यान खींचा गया है।
3
"घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं" यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है? (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता (ख) अनुभव और विवेक की कमी (ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता (घ) उदासीनता और एकाकीपन
उत्तर:
(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता।क्यों – यह कथन शंकर की नैतिक दुर्बलता पर कटाक्ष करता है। शंकर में अनुचित परंपराओं को रोकने की इच्छा नहीं है। वह घिसी-पिटी रूढ़ियों के पक्ष में खड़ा है। साथ ही उसकी चारित्रिक दुर्बलता पर कटाक्ष है, वह विवाह से पूर्व लड़कियों के होस्टल के बाहर चक्कर काटता है।
4
"जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।" उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है? (क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना (ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना (ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
उत्तर:
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना।क्यों – उमा शिक्षा का सही अर्थ समझती है। वह जानती है कि डिग्री पाने, कॉलेज में पढ़ने या पति को रिझाने से शिक्षित नहीं कहलाते। सच्ची शिक्षा का अर्थ है — आत्मसम्मान से जीना तथा स्वतंत्र विचार रखना।
5
गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं? (क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं। (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं। (ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं। (घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
उत्तर:
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।क्यों – दोनों विवाह में दिखावे और छल का समर्थन करते हैं। रामस्वरूप अपनी बेटी को सज-धज कर आने पर जोर देता है तो गोपालप्रसाद भी लड़कियों की सुंदरता के समर्थक हैं।
6
इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है? (क) औपचारिक और शुष्क (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण (ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक (घ) भावुक और संक्षिप्त
उत्तर:
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण।क्यों – इस एकांकी की सभी घटनाएँ और पात्रों के संवाद ठीक वैसे हैं, जैसे कि हमारे मध्यमवर्गीय समाज में पाए जाते हैं। उनमें सहज हास्य-व्यंग्य और कटाक्ष के दर्शन होते हैं। सभी पात्र अपने-अपने वर्गीय चरित्र की तरह बात और व्यवहार करते हैं।
मेरी समझ मेरे विचार(4 questions)
1
बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए। (संकेत – उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)
उत्तर:
रामस्वरूप अपनी बेटी को बी.ए. पढ़ाते हैं। वे उसे उच्च शिक्षा दिलवाना अपना पवित्र कर्तव्य मानते हैं। परंतु जब उसके विवाह का समय आता है तो वे समाज की पिछड़ी मनोभावना का शिकार हो जाते हैं। लोग शिक्षित बहू को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। लड़के तथा सास-ससुर को ऐसा लगता है कि पढ़ी-लिखी बहू उनके नियंत्रण में नहीं रहेगी। वह बात-बात पर नखरे करेगी, विरोध करेगी, प्रश्न करेगी तथा उन्हें चुनौती देगी। वे इस बात को बिलकुल सहन नहीं करना चाहते। इसलिए वे कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते हैं।इस कारण रामस्वरूप और उमा की स्थिति विचित्र हो जाती है। उन्हें विवाह के लिए उमा की उच्च शिक्षा को छिपाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
2
'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
उत्तर:
'रीढ़ की हड्डी' का प्रयोग मुख्य रूप से व्यक्तित्वहीन शंकर के लिए हुआ है। उस पर व्यंग्य यह है कि —वह बिना रीढ़ की हड्डी का है, अर्थात व्यक्तित्वविहीन है। उसका कोई निजी मत, स्थान या महत्व नहीं है। वह अपने पिता के इशारों पर ही ही करने वाला बेचारा जीव है। उसे जैसा कहा जाता है, वैसा ही करता है। वह पिता की उचित-अनुचित सभी बातों पर हाँ-हाँ करता चलता है। ऐसा पति पति होने योग्य नहीं है। वह लड़कियों के पीछे लग-लगकर अपनी रीढ़ की हड्डी तुड़वा बैठा है। उसका सरेआम अपमान हो चुका है। अतः वह अपमानित, लंपट और दुश्चरित्र है। उसका शरीर कमज़ोर है, उससे सीधा तनकर बैठा भी नहीं जाता। इसलिए वह विवाह के योग्य नहीं है।'रीढ़ की हड्डी' का प्रयोग सांकेतिक रूप से रामस्वरूप के लिए भी है। वे लड़की को पढ़ाना तो चाहते हैं किंतु उस संघर्ष में डटते नहीं। वे झूठ-फरेब का सहारा लेते हैं। वे भी एक प्रकार से बिना रीढ़ के हुए।
3
"मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।" प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर:
प्रेमा उमा की माँ है। वह स्त्री-शिक्षा को फालतू की बात समझती है। वह स्वयं अनपढ़ है, उसे बस अक्षरज्ञान है। दुर्भाग्य से उसने इसी अशिक्षा और अनपढ़पन को ही स्त्री का भाग्य मान लिया है। वह 'स्त्री-सुबोधिनी' जैसी पुस्तक को ही सर्वस्व माने बैठी है। इसी से वह स्वयं को ज्ञानी तथा पढ़ी-लिखी स्त्रियों को अज्ञानी मान बैठी है।यह सरासर मोह और अबोधता है। यह अज्ञान और रूढ़िवादिता है। एक जमाना था, जब स्त्रियों को अनपढ़ रखना ही उचित माना जाता था।
4
लेखक ने 'रीढ़ की हड्डी' शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
उत्तर:
'रीढ़ की हड्डी' एकांकी का शीर्षक सार्थक, सफल और व्यंग्यात्मक है। इस नाटक की मूल समस्या है — वर का व्यक्तित्वहीन होना। यदि शंकर समझदार और व्यक्तित्वसंपन्न युवक होता तो गोपालप्रसाद की इतनी हिम्मत न होती कि वह दो सुशिक्षित वयस्कों के बीच में बैठकर अपनी फूहड़ बातें करे और अशिक्षा को प्रोत्साहन दे। कम पढ़ी-लिखी बहू चाहना गोपालप्रसाद की जरूरत हो सकती है, शंकर की नहीं। अगर शंकर अपने पिता के रोबदाब के आगे चूँ भी नहीं कर सकता, बल्कि उनकी हाँ में हाँ मिलाता है तो वह उसकी कायरता है। उस कायरता को दिखाने के लिए उसे रीढ़ की हड्डी के बिना दिखाया गया है।इस प्रकार 'रीढ़ की हड्डी' व्यंग्यात्मक, संकेतपूर्ण, सार्थक और सफल शीर्षक है।
विधा से संवाद — एकांकी की पड़ताल(1 questions)
1
आप जानते ही हैं कि 'रीढ़ की हड्डी' एक एकांकी है। एकांकी में भी एक कहानी ही होती है, लेकिन एकांकी की रूपरेखा कहानी से थोड़ी अलग होती है।आगे 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी से संबंधित कुछ बिंदु दिए गए हैं। एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए:1. एकांकी का नाम 2. लेखक का नाम 3. पात्र 4. परिवेश / देश-काल 5. रंग-निर्देश / मंच-निर्देश 6. संवाद-निर्देश 7. समस्या 8. संवाद 9. मुख्य विचार 10. समाधान / परिणाम
उत्तर:
1. एकांकी का नाम – रीढ़ की हड्डी2. लेखक का नाम – जगदीशचंद्र माथुर3. पात्र – उमा, प्रेमा, रामस्वरूप, शंकर, गोपालप्रसाद, रतन4. परिवेश / देश-काल – किसी छोटे नगर का निम्न मध्यमवर्गीय परिवार। मामूली सी सजावट, एक तख्त, सोफा, हारमोनियम, हाथ से बनी पेंटिंग्स।5. रंग-निर्देश / मंच-निर्देश – मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नज़र आ रही है, वह अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं। तख्त का दूसरा सिरा रतन ने पकड़ रखा है।6. संवाद-निर्देश – रामस्वरूप – (दरी उठाते हुए) और बीबी जी के कमरे से हारमोनियम उठा ला। रामस्वरूप – (बात काटकर) चुप चुप…. (दरवाजे से झाँकते हुए) तुम्हें कतई जबान पर काबू नहीं है।7. समस्या – प्रेमा – तो मैं क्या करूँ? सारे जतन करके हार गई। तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है। मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं। रामस्वरूप – मजबूरी है। मतलब अपना है, वरना इन लड़कों और इनके बापों को ऐसी कोरी-कोरी सुनाता कि ये भी….।8. संवाद – रामस्वरूप – कहिए, शंकर बाबू, कितने दिनों की और छुट्टियाँ हैं? शंकर – जी कॉलेज की तो छुट्टियाँ नहीं हैं। 'वीकएंड' में चला आया था। रामस्वरूप – तो आपके कोर्स खत्म होने में तो अब साल भर रहा होगा? शंकर – जी, यही कोई साल-दो साल। रामस्वरूप – साल-दो साल? शंकर – हँ हँ हँ!… जी एकाध साल का 'मार्जिन' रखता हूँ।9. मुख्य विचार – क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है। अरे, मर्दों का काम तो है पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वही करने लगीं, अंग्रेजी अखबार पढ़ने लगीं और 'पॉलिटिक्स' वगैरह पर बहस करने लगीं तब तो हो चुकी गृहस्थी।10. समाधान / परिणाम – जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है। कोई पाप नहीं किया, कोई चोरी नहीं की, और न आपके पुत्र की तरह ताक-झाँक कर कायरता दिखाई है। मुझे अपनी इज्ज़त… अपने मान का ख्याल तो है।
रंग-निर्देश(1 questions)
1
एकांकी की शुरुआत कुछ इस तरह से होती है:"(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नज़र आ रही है, वह अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं। तख्त का दूसरा सिरा रतन ने पकड़ रखा है।)"इस रंग-निर्देश द्वारा एकांकी की पृष्ठभूमि की रचना की गई है। अब इस एकांकी को कक्षा में प्रस्तुत करने का समय है। अपने समूह के साथ मिलकर एकांकी के किसी एक दृश्य का चुनाव कीजिए। उसकी तैयारी कीजिए और कक्षा में उसे प्रस्तुत कीजिए।(संकेत – (i) समूह बनाइए और उचित हाव-भाव द्वारा उस दृश्य का अभिनय कीजिए। (ii) आप अपनी आवश्यकता के अनुसार दिए गए रंग-निर्देश में परिवर्तन भी कर सकते हैं।)
उत्तर:
विद्यार्थी समूह बनाकर कक्षा में नाटक खेलें।प्रस्तुति हेतु सुझाव – पहले दृश्य का चयन करें, पात्रों की भूमिकाएँ बाँटें, मंच-सज्जा और रंग-निर्देश के अनुसार अभिनय करें। आवश्यकता पड़ने पर रंग-निर्देश में अपनी सुविधानुसार परिवर्तन भी कर सकते हैं।
मेरी टिप्पणी(1 questions)
1
"जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं-यानी बैकबोन बैकबोन!"उपर्युक्त वाक्य उमा द्वारा शंकर पर की गई एक टिप्पणी है जो एक व्यंग्य की तरह है। 'टिप्पणी' किसी व्यक्ति, विषय या घटना पर व्यक्त की गई एक संक्षिप्त राय, स्पष्टीकरण या विचार होता है। टिप्पणी की कुछ विशेषताएँ हैं — संक्षिप्तता, स्पष्टता, व्यक्तिपरकता।अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई उपर्युक्त बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
बहुत सुंदर, सटीक, मारक व्यंग्य! खूब कहा। धो डाला ढोंगियों को। मुँह पर बड़ी-बड़ी बातें, व्यवहार में दकियानूस। शंकर जैसे ढुलमुल और व्यक्तित्वविहीन दूल्हे से तो कुँआरा रहना अच्छा। शाबाश उमा!
विषयों से संवाद — तुलना और विचार(2 questions)
1
"गोपालप्रसाद: भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।"एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?
उत्तर:
गोपालप्रसाद – भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है। अरे, मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वही करने लगीं, अंग्रेज़ी अखबार पढ़ने लगीं और 'पॉलिटिक्स' वगैरह पर बहस करने लगीं तब तो हो चुकी गृहस्थी।रामस्वरूप – जी हाँ, और मर्द की दाढ़ी होती है, औरत के नहीं!मैं समझता हूँ कि लड़कों और लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा में अंतर करना सरासर अन्याय है। यह अंतर तर्कहीन है या पुरुषों की मनमानी है। इसे रोका जाना चाहिए। लड़का-लड़की दोनों को शिक्षा पाने का पूरा अधिकार है।
2
"मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।"एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी? (संकेत – शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि)
उत्तर:
उमा पढ़ी-लिखी और सजग लड़की है। वह तर्क और व्यंग्य से लड़के और उसके पिता को निरुत्तर कर देती है। वह पुरुषों की मनमानी को तार-तार करके रख देती है। विशेष रूप से वह ढोंगी, कामी, ढुलमुल और व्यक्तित्वहीन शंकर की बखिया उधेड़ देती है।उमा के पारिवारिक संस्कार उसे लड़ना नहीं सिखाते। विशेष रूप से उसकी माँ तो बिल्कुल निरीह और बेचारी है। हाँ, उस पर पिता के विचारों का प्रभाव जरूर है। पिता रामस्वरूप एक जगह गोपालप्रसाद की बखिया उधेड़ते भी हैं — "खुद तो सभा-सोसाइटियों में जाते हैं, मगर लड़की चाहते हैं ऐसी कि ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो।"उमा की इस सजगता के पीछे वास्तव में उसकी शिक्षा है। उसे आधुनिक शिक्षा ने ही जागरूक और समझदार बनाया है।
सृजन — एकांकी का विस्तार(2 questions)
1
"रतन: बाबूजी, मक्खन! (सब रतन की तरफ देखते हैं और परदा गिरता है।)"एकांकी के अंत में रतन कहता है- "बाबूजी, मक्खन…" और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा? (संकेत – हास्य, व्यंग्य, टिप्पणी आदि)
उत्तर:
"बाबूजी, मक्खन…" यह अंत दूर तक व्यंग्य करता है। यह रामस्वरूप और उसकी पत्नी के दिल में तीर की तरह चुभता है — और लगाओ मक्खन! और बोलो झूठ! और खिलाओ इन नालायकों को मक्खन, भोजन! झूठ पर बनी तुम्हारी दुनिया बेकार है। इससे कुछ नहीं होने वाला।परिस्थिति का यह व्यंग्य हँसी के साथ-साथ सारे झूठ की पोल खोल देने वाला है।
2
एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
उत्तर:
(सहसा रामगोपाल लौट पड़ते हैं!)
गोपालप्रसाद – रामस्वरूप जानते हो, मैं वकील हूँ। मैं तुम पर मानहानि का मुकदमा करूँगा। मैं तुम्हारा मकान नीलाम करवा दूँगा। और तुम्हारी यह लड़की…।
उमा – (आँखें तरेरते हुए) आप मुकदमा करेंगे? कीजिए। इससे पहले पूरे होस्टल में मैं तुम्हारे इस नालायक बेटे के पोस्टर लगवाऊँगी। इसके विरुद्ध आंदोलन चलवाऊँगी।… पुलिस से पिटते हुए और लड़कियों से लात खाते हुए इसकी फोटो मेरे पास है। तैयार रहना मिस्टर रामगोपाल!
शंकर – पापा… पापा…! चलिए।
गोपालप्रसाद – नालायक तूने क्या-क्या कारनामे कर रखे हैं?
उमा – इसके कारनामे तो कल पूरे कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर मैं लगवाऊँगी। फिर पुलिस पहुँचेगी इसके कॉलेज में भी। आप तैयार रहना।
गोपालप्रसाद – देखो बेटी! बात न बढ़ाओ। वरना…।
उमा – वरना क्या?
गोपालप्रसाद – लड़कों का इस दुनिया में कुछ नहीं बिगड़ता। जो भी बिगड़ेगा, तुम्हारा बिगड़ेगा। तुमसे कोई शादी नहीं करेगा।
रामस्वरूप – बहुत हुआ गोपालप्रसाद! उमा ठीक कह रही है। तुमने बहुत धमका लिया। अब हमारी बारी है।
उमा – पापा! अगर आपने मुझे शौक से पढ़ाया है, तो एक बार इनकी खबर लेने दीजिए। मैं इनकी रीढ़ न तोड़ दूँ तो!
(शंकर और गोपालप्रसाद खिसियानी बिल्ली की तरह चले जाते हैं।)
(पीछे से एक कुत्ते के भौंकने की आवाज़ आती है।)
परदा गिरता है।
व्याकरण की बात — मेरे शब्द(1 questions)
1
एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर:
1. कलसा – घड़ा (शब्दकोश में गगरा, कलश और घड़ा)2. अधेड़ – बूढ़ा (ढलती जवानी वाला व्यक्ति)3. फितरती – मनमौजी (चालबाज, शरारती)4. तल्लीनता – डूबना (मग्न होना)5. तकल्लुफ – तकलीफ, कष्ट (शिष्टाचार, बाहरी दिखावा)
भाषा में मुहावरे(1 questions)
1
एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए:1. "उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है – खाली हाथ।" 2. "लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।" 3. "और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?" 4. "तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।" 5. "मगर तुम तो अभी से सब कुछ उगले देती हो।" 6. "यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।" 7. "बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?" 8. "लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।"
उत्तर:
1. तुम भीगी बिल्ली की तरह नहीं, चुस्ती से बेधड़क होकर चला करो।2. आजकल के बच्चे जरा-सी बात सुनकर मुँह फुलाकर बैठ जाते हैं।3. गरीबों की देखभाल सरकार नहीं करेगी, तो कौन करेगा? फिर सरकार किस मर्ज की दवा है?4. तुम्हीं ने मोहन की प्रशंसा कर-करके उसे सिर पर चढ़ा रखा है।5. राज की बात को छुपाना सीखो। उसे किसी के सामने यों ही न उगल दिया करो।6. तुम मुझे इस झगड़े से दूर रखो। यों ही मुझे काँटों में न घसीटो।7. उमा ने बड़बोले गोपालप्रसाद को ऐसी खरी-खरी सुनाई कि उनकी इज्जत उतार कर रख दी।8. जब मैंने उस लंपट की पोल खोलना शुरू की तो वह मुँह छिपाकर भाग गया।
संदर्भ में शब्द(1 questions)
1
"बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।"एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
हरिवंशराय बच्चन जाने-माने कवि थे, किंतु उनका बेटा अमिताभ पूरे संसार पर राज करने वाला अभिनेता है। सच कहा है — बाप सेर तो बेटा सवा सेर।
आप भी संवाददाता(2 questions)
1
मान लीजिए कि आप एक संवाददाता हैं और आपको उमा की कहानी का पता चलता है। अब आप उमा तथा अन्य पात्रों का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष दर्शकों के सामने प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
उमा से साक्षात्कारपत्रकार – नमस्कार उमा जी! सुना है, आपने शहर के मशहूर वकील के बेटे को घर में बेइज्ज़त कर दिया।
उमा – मैंने कुछ नहीं किया। उन्होंने घर में आकर जो करतूतें कीं, उससे उन्होंने बेइज्ज़त महसूस किया।
पत्रकार – उन्होंने ऐसा क्या किया?
उमा – वे शादी के लिए मुझे देखने आए थे।
पत्रकार – फिर?
उमा – कोई ढंग और सलीका चाहिए कि नहीं! उनका अपना लड़का लड़कियों के होस्टल के चक्कर लगाता फिरता है और मुझे वे गऊ की तरह देखना चाहते हैं।
पत्रकार – वे आपसे नाराज़ क्यों हुए?
उमा – वे मुझसे एक-एक काम ऐसे करवाकर देख रहे थे, जैसे सब्जीमंडी में सब्जी खरीदने आए हों। मुझे बुरा नहीं लगेगा?
पत्रकार – आपने घर में ही बेइज्ज़त कर दिया?
उमा – वे भी मुझे मेरे घर में ही अपमानित कर रहे थे।
पत्रकार – बहुत निडर और बेधड़क हैं आप!
उमा – क्या यह मेरी कमज़ोरी है?
पत्रकार – नहीं उमा जी! मैं आपको बधाई देता हूँ। आप नारी शक्ति की प्रतीक हैं। धन्यवाद!गोपालप्रसाद से साक्षात्कारपत्रकार – गोपालप्रसाद जी! सुना है, आपके साथ बहुत बुरा हुआ?
गोपालप्रसाद – क्या बताएँ! जना ही खराब है।
पत्रकार – ऐसा क्या हुआ? उमा ने आपको क्या कह दिया?
गोपालप्रसाद – मैंने उसे कुछ बोलने के लिए कहा तो यह मुझ पर टूट पड़ी।
पत्रकार – आपको क्या लगता है, उसने ऐसा क्यों किया?
गोपालप्रसाद – आजकल की पढ़ी-लिखी लड़कियों का दिन खराब ही होता है।
पत्रकार – सुना है, वह आपके बेटे शंकर को देखकर चिढ़ गई थी?
गोपालप्रसाद – नहीं नहीं! वह तो भीगी बिल्ली है। वह तो चुपचाप बैठा था।
पत्रकार – तो क्या उमा बदतमीज़ है?
गोपालप्रसाद – और क्या कहूँ! कुछ तो सलीका, तरीका, ढंग और सहनशीलता होनी चाहिए। लड़कियों को तो दबकर रहना ही पड़ता है।
पत्रकार – और आप कुछ भी करते रहें!
गोपालप्रसाद – भाई! तुम्हारा कसूर नहीं है। आज की इसी आज़ादी ने ही सत्यानाश कर रखा है।
2
मान लीजिए कि आप उमा के घर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं जब उसके घर में शंकर आया था। इस पूरे घटनाक्रम को जीवंत प्रसारण (लाइव रिपोर्ट) की तरह प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
आज हम आपको कॉलेज की सबसे होनहार लड़की उमा के घर लेकर चल रहे हैं। यह देखिए उसका घर… और यह रहा ड्राइंगरूम, जहाँ उमा अपने होने वाले रिश्तेदारों पर टूट पड़ी थी। आइए आपको मिलवाते हैं उमा से…पत्रकार – उमा जी! सुना है, आपने घर में ही हलचल मचा दी!
उमा – जब घर में बदतमीज़ी की जाए तो वहीं उत्तर देना पड़ेगा न!
पत्रकार – ऐसा क्या हो गया था उमा जी!
उमा – देखिए! हम पढ़ी-लिखी लड़कियाँ हैं। हमने पढ़-लिखकर पाप तो नहीं किया है! हमसे कहा जा रहा है अनपढ़ बनकर रहो, केवल सजो-सँवरो और हमारी सेवा करो। मैं पूछती हूँ क्यों?
पत्रकार – बात तो आप ठीक कह रही हैं। इसमें तो कोई बुराई नहीं है।
उमा – फिर कोई मेरे ही घर आकर मुझसे अनपढ़ों जैसे सवाल-जवाब करेगा और उसका अपना दामन दागी होगा तो आपको गुस्सा नहीं आएगा?
पत्रकार – हाँ, वो तो है।
उमा – बस इतना ही हुआ! मैंने कोई लक्ष्मीबाई की तरह तलवार नहीं उठाई थी।
तो यह थी उमा! आपको उसके विचार और व्यवहार कैसा लगा? आप सोचिए।