Class 9 · HindiNCERT 2026 Revised Syllabus
Chapter 4: ऐसी भी बातें होती हैं (0901CH04)
R1 and R2 book- Ganga
लता मंगेशकर का साक्षात्कार — स्वाभिमान, सादगी और संगीत के प्रति समर्पण से सिंचित महान गायिका के जीवन-संघर्ष की प्रेरक कहानी।
Chapter code: 0901ch04 · Book: R1 and R2 book- Ganga · Class 9 Hindi
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रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क(7 questions)
1
लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा? (क) अनुशासन और नियम के साथ जीना (ख) भय और संशय के साथ जीना (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना (घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
उत्तर:
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना।तर्क – यह उत्तर पूर्णरूप से सटीक है क्योंकि लता जी के पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर हमेशा स्वयं भी स्वाभिमान से जीते थे और उन्होंने अपने बच्चों को भी सच्चाई और स्वाभिमान के मार्ग पर चलने के संस्कार दिए। वे कहते थे — जो बात तुम्हें सही लगती है, उसे करो और किसी के आगे मत झुको।
2
पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन मूल्य का द्योतक है? (क) संघर्ष (ख) निराशा (ग) भौतिकता (घ) कर्तव्यनिष्ठा
उत्तर:
(घ) कर्तव्यनिष्ठा।तर्क – जब तक लता जी के पिताजी जीवित रहे, तब तक उनका पूरा परिवार बड़े शान से रहता था। परंतु उनके निधन के बाद उन्हें बुरे हालातों में जीना पड़ा। तब उन्हें अपने परिवार के प्रति कर्तव्यबोध हुआ। बाद में भी उनके दिमाग में बस यही बात रहती थी कि ज्यादा से ज्यादा कमाकर परिवार की जरूरतें पूरी करें।
3
"बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…" 'मंगलागौर' के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है? (क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव (ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी (ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
उत्तर:
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका।तर्क – समाज में मनाए जाने वाले अनेक त्योहार संगीत पर आधारित होते हैं। मंगलागौर का उत्सव शादी के बाद मनाया जाता है। स्त्रियाँ नाचती-गाती, नौटंकी और तमाशा की तरह भी कुछ प्रस्तुत करती हैं और संगीत से यह त्योहार सुंदर बन जाता है।
4
"गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन" — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है? (क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है। (ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है। (ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है। (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
उत्तर:
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।तर्क – यह बात बिल्कुल उचित है क्योंकि दुनिया से सभी इन्सान चले जाते हैं, परंतु उनके द्वारा किए गए सभी प्रकार के कर्म यहीं यादगार बनकर रह जाते हैं और उनका फल उस मनुष्य के साथ जाता है। जो बुरे कर्म होते हैं उसे दुनिया भुला देती है परंतु अच्छे कर्म हमेशा अमर हो जाते हैं और उस व्यक्ति का नाम भी सदैव जीवित रहता है।
5
कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे? (क) औपचारिक (ख) कामकाजी (ग) आत्मीय (घ) प्रतिस्पर्धात्मक
उत्तर:
(ग) आत्मीय।तर्क – लता जी कोरस गाने वाली लड़कियों के साथ बहुत आत्मीयपूर्ण तथा प्रेमपूर्वक व्यवहार करती थीं। वे लड़कियाँ उनके साथ 1960 से 1980 तक रहीं। जब कभी वे लड़कियाँ ज़मीन पर बैठतीं तो लता जी भी उनके साथ ज़मीन पर बैठ जातीं और उनसे बातें करतीं।
6
लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? (क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं। (ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है। (ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं। (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
उत्तर:
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।तर्क – यह बात बिल्कुल सत्य है। लता जी ने तानसेन और बाबा हरिदास को देखा नहीं था, परंतु वे जानती थीं कि उनके संगीत में अदृश्य शक्ति का वास था जो दीपक राग से दिये जला देते थे। इसके साथ उन्होंने उस्ताद अली अकबर खाँ का वादन भी देखा था कि किस प्रकार शुद्ध स्वर के आघात से उनके सरोद के तार टूट गए थे।
7
पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है? (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की (ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध (ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति (घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
उत्तर:
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की।तर्क – लता जी सादगी, सरलता और समर्पण की मूर्ति थीं। वे सदैव बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनती थीं और अपने परिवार के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहती थीं। उन्हें हमेशा लगता था कि अधिक धन कमाकर परिवार की जिम्मेदारी पूरी करें।
मेरी समझ मेरे विचार(4 questions)
1
"पिताजी उस समय पूछते थे, 'समझ गए न?''… इसके बाद वे कहते थे कि 'अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।" यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत – यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
उत्तर:
यह प्रसंग सचमुच पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है, जिसमें बच्चे अपने पिता के हाव-भाव से ही समझ जाते हैं कि उनका पिता उनसे क्या चाहता है। पिता भी बच्चों की शरारत पर उन्हें ज्यादा कुछ न कहकर बस सब बच्चों को एक साथ बुलाकर केवल इतना कहते थे — "समझ गए न?" और बच्चे इतनी-सी बात पर ही सहम जाते और उन्हें समझ आ जाता था कि उन्हें शरारत नहीं करनी है।यहाँ अनुशासन में डर नहीं, बल्कि पिता के प्रति 'सम्मान' था। बच्चे अपने पिता की आज्ञा से फिर से खेलने चले जाते। इस प्रकार उनकी गंभीरता ही बच्चों को अनुशासन में रखती थी। यह व्यवहार बच्चों के लिए अनुशासन और पिता के प्रति सम्मान दोनों का था।
2
लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
उत्तर:
लता जी का अपने पिता से बहुत लगाव था, पिता उनके आदर्श थे। उन्होंने उनके द्वारा दी गई सीख को अपने जीवन में उतारा। लता जी के पिता सदैव सच्चाई और स्वाभिमान से जीते थे और उन्होंने अपने बच्चों को भी सच्चाई से परिपूर्ण संस्कार दिए। वे हमेशा कहते थे — "जो बात तुम्हें सही लगती है, उसे करो और किसी के आगे मत झुको।"लता जी ने अपने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से संगीत सीखा। साथ ही उन्हें अपने पिता से जिंदगी की सही बातों पर खड़े रहने की हिम्मत भी मिली। अपने पिता की तरह ही लता जी भी अपने काम के प्रति समर्पित थीं। जैसे उनके पिता सुबह तीन बजे तक कार्य में डूबे रहते थे, वैसे ही लता जी भी कभी एक, कभी दूसरे तो कभी तीसरे स्टूडियो में रेकॉर्डिंग हेतु जाती रहती थीं और पूरा दिन संगीत साधना में बिता देती थीं।
3
"मैंने अपने पिताजी का नाम थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।" 'नाम आगे बढ़ाने' का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
उत्तर:
लता जी के पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर भी शास्त्रीय संगीत में पारंगत थे। लता जी ने अपने पिता से संगीत की शिक्षा ली और अपने जीवन को संगीत के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया। संगीत में उनके अनमोल योगदान और सच्चे समर्पण हेतु उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया और 'भारत कोकिला' की उपाधि से नवाजा गया। उनकी आवाज़ ने लोगों के दिलों और आत्मा पर राज किया है।लता जी ने अपने पिता से केवल संगीत की शिक्षा ही नहीं ली, बल्कि पिता के आदर्शों — सच्चाई और आत्मविश्वास के गुणों को भी आत्मसात कर उनके नाम को सही मायने में अमर कर दिया। यह केवल प्रसिद्धि पाना नहीं था, बल्कि पिता द्वारा स्थापित आदर्शों को निभाने का महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी था।
4
किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
उत्तर:
यह बात पूर्णरूप से सत्य है कि आपसी सामंजस्य की भावना से प्रेरित व्यक्ति सदैव सफलता की ओर अग्रसर रहता है। किसी भी क्षेत्र में सफलता हेतु अनिवार्य है कि अपने सहयोगियों का सदैव सम्मान करें और उनके साथ चलें।लता जी इस बात को बखूबी जानती थीं; इसी कारण उन्होंने कोरस गाने वाली लड़कियों को सदैव सम्मान दिया और उनके साथ मधुर संबंध बनाए। कदाचित इसी कारण कोरस वाली लड़कियाँ उनके साथ 1960 से 1980 तक जुड़ी रहीं।
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व / उभरती छवि(4 questions)
1
"मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।"इस पंक्ति से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं?
उत्तर:
समर्पण, एकाग्रता, साधना।यह पंक्ति दर्शाती है कि लता जी अपने कार्य में पूर्णतया डूबकर रहती थीं। गाने और रेकॉर्डिंग के अतिरिक्त वे किसी और बात की ओर ध्यान ही नहीं देती थीं। यह उनके संगीत के प्रति गहरे समर्पण, अद्भुत एकाग्रता और निरंतर साधना को प्रकट करता है।
2
"अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।"इस पंक्ति से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं?
उत्तर:
आत्मविश्वास, स्वाभिमान, दृढ़ता।इस कथन से पता चलता है कि लता जी सत्य के मार्ग पर अडिग रहने वाली, अपने सिद्धांतों पर टिकी रहने वाली और किसी के सामने न झुकने की दृढ़ मानसिकता की स्वाभिमानी महिला थीं।
3
"आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।"इस पंक्ति से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं?
उत्तर:
कृतज्ञता, विनम्रता, सरलता।लता जी श्रोताओं के प्रेम और प्रशंसा के लिए हृदय से आभारी थीं। अपनी अमरता का श्रेय वे श्रोताओं के प्रेम को देती थीं। यह उनकी गहरी कृतज्ञता, विनम्रता और सरल स्वभाव को दर्शाता है।
4
"मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।"इस पंक्ति से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं?
उत्तर:
दार्शनिकता, स्पष्टता, स्पष्टवादिता।यह कथन लता जी की जीवन के प्रति गहरी दार्शनिक समझ को दर्शाता है। वे जीवन की नश्वरता और कला की अमरता में स्पष्ट अंतर करती थीं। शरीर नश्वर है, पर कर्म और संगीत अमर रहता है — इस सत्य को उन्होंने बड़ी स्पष्टवादिता से स्वीकार किया।
मेरे प्रश्न(2 questions)
1
उत्तर : 'मंगलागौर' जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।इस उत्तर से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)।
उत्तर:
1. मंगलागौर का स्वरूप कैसा होता है?
2. लता जी ने मंगलागौर के विषय में क्या बताया?
3. मंगलागौर किस प्रकार का पर्व है?
4. सामाजिक त्योहार 'मंगलागौर' स्त्रियों के लिए विशेष क्यों है?
5. लता जी ने मंगलागौर का विवाह से क्या संबंध बताया है?
2
उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।इस उत्तर से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)।
उत्तर:
1. संगीतकारों के विषय में लता जी के क्या विचार थे?
2. पुराने संगीतकारों के संदर्भ में लता जी का अनुभव क्या कहता था?
3. तकनीकी प्रगति और पुराने संगीतकारों के संदर्भ में लता जी ने क्या देखा?
4. लता जी ने पुराने संगीतकार और वर्तमान तकनीकी प्रगति के बीच क्या पाया?
5. पुराने संगीतकारों के संदर्भ में लता जी का क्या नज़रिया था?
मेरे अनुभव मेरे विचार(4 questions)
1
"अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।"क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?
उत्तर:
हाँ, हमारे पिताजी ने भी हमें यही शिक्षा दी कि जो तुम्हें उचित लगता है उसे करो और किसी के आगे झुको नहीं। मैंने अपने जीवन में इस बात को हमेशा याद रखा और मुझे इससे सदैव लाभ ही हुआ क्योंकि मेरे आत्मविश्वास ने मुझे सदैव मजबूती दी।अनुभव – एक बार हम चार बहुत गहरे मित्र थे। हम सभी ने कसौल में ट्रैकिंग की योजना बनाई और घरवालों की सहमति से सभी सुरक्षित कसौल पहुँच गए। परंतु वहाँ तेज वर्षा के आसार थे। मैंने अपने मित्रों को खराब मौसम के कारण यह योजना रद्द करने की बात कही, परंतु उन्होंने यह कहकर खारिज कर दिया कि वे यहाँ केवल ट्रैकिंग के लिए आए हैं। मैं अपने फैसले पर अडिग रहा। वे सभी चले गए और तेज तूफान में फँस गए। चार दिन तक वे रास्ते में किसी स्थान पर रुके रहे, जहाँ उन्हें पर्याप्त भोजन भी नहीं मिला और वे बहुत परेशान हुए। वे अपने फैसले पर दुखी थे, परंतु मैं संतुष्ट था क्योंकि मैंने अपने सही विवेक पर अकेला खड़ा होकर सही निर्णय लिया था।
2
"बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।"आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वतः करते होंगे, उनके विषय में बताइए।
उत्तर:
मेरे पिताजी सदैव मेरे आदर्श रहे हैं। वे सदा थोड़े में खुश रहने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने मुझे हमेशा सच्चाई और परिश्रम के मार्ग पर चलकर लक्ष्य हासिल करना सिखाया। वे अक्सर कहते हैं — "यदि फूलों पर चलना सीखा है तो काँटों पर चलना भी सीखो क्योंकि परिस्थितियाँ कभी एक सी नहीं रहतीं।"उनकी इस बात ने मेरे दिल में घर कर लिया। मैं समझ चुकी थी कि जीवन में यदि सफल होना है तो केवल जीत ही नहीं, अपितु हार भी स्वीकार करनी होगी। मैंने पिताजी द्वारा सिखाए गए कायदे — जैसे सच्चाई पर चलना, झूठ नहीं बोलना, मेहनत करना और जो कुछ पास है उसमें संतुष्ट होना — सभी को न केवल स्वीकार किया, अपितु अपने गुणों में शामिल कर जीवन का हिस्सा भी बना लिया। अब इन्हें पिताजी या माताजी द्वारा याद दिलाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ये स्वतः ही मेरे आचरण में एकसार हो चुके हैं और मुझे हर कदम पर मजबूत बनाते हैं।
3
"पहले दिन गुड़ि बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।"आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वैसे तो वर्तमान में त्योहार मनाने की परंपराएँ बदलने लगी हैं, परंतु हमारे घर में आज भी एक ऐसा त्योहार है जिसमें हमने कोई परिवर्तन नहीं किया, वह है 'दशहरा पूजन'।इस दिन प्रातः माताजी चौक की साफ-सफाई करती हैं। फिर पिताजी गोबर से कुछ आकृतियाँ बनाते हैं। माँ हल्दी और आटे से उसे सजाती हैं। फिर पिताजी घर के सभी सदस्यों को कॉपी, किताब अथवा डायरी लाने को कहते हैं। उसके बाद नौ दिन तक पूजे गए हरे जौ लेकर आते हैं और बच्चों की कॉपी, पुस्तकें और बड़ों की डायरी में उन्हें रखते हैं। उससे पहले वे जौ कान पर रखे जाते हैं। फिर उस पूजनीय आकृति की प्रदक्षिणा की जाती है और कहा जाता है कि चलो, सब शिक्षा ग्रहण करने गुरुकुल चलो।इस प्रकार इस विधि में असीम आनंद की अनुभूति होती है। यह परंपरा आज तक उसी रूप में कायम है।
4
"बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।"पाठ में आपने पढ़ा कि लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सवों से जुड़ी अनेक परंपराएँ बदल रही हैं। कौन-कौन-सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?
उत्तर:
वर्तमान में सचमुच त्योहार सिमटते जा रहे हैं। जहाँ पहले होली आने पर आँगन साफ करके दादी माँ और पड़ोस की औरतें मिलकर गुजियाँ बनानी शुरू करती थीं और घर के चारों तरफ खाने की खुशबू फैलाती थीं, वहीं आज शुगर कंट्रोल और व्यस्त दिनचर्या के चलते बाजार से केवल कुछ मिठाई मँगाकर 'त्योहार' मना लिया जाता है।पहले दीवाली आने पर हम बहन-भाई पटाखों की पूरी लिस्ट तैयार करते थे जिसे लेकर पापा-मम्मी सदर बाजार जाते थे, परंतु अब प्रदूषण के चलते इनके बारे में सोचना भी गुनाह है। मिठाई के डिब्बे भी जहाँ घर-घर बाँटे जाते थे, वे अब महँगाई के चलते इतने सिमट गए हैं कि केवल अपने घर तक सीमित रह गए हैं। अब तो त्योहारों की बधाई भी फोन की तारों पर सिमट गई है। ये सभी त्योहार अब सूक्ष्म होते जा रहे हैं और आहिस्ता-आहिस्ता अपना अस्तित्व धूमिल करते जा रहे हैं।
विधा से संवाद — साक्षात्कार की पड़ताल(2 questions)
1
'ऐसी भी बातें होती हैं' एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा व्यक्ति उन प्रश्नों के उत्तर देता है। साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।• साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया, उसका नाम • प्रश्नोत्तर • भावनात्मक वातावरण • आमंत्रण, स्वागत और परिचय • उत्तर देने की शैली का संकेत • विचार और उदाहरण • संस्मरण • समापन
उत्तर:
• साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया, उसका नाम — साक्षात्कार कर्ता: यतींद्र मिश्र; जिनका साक्षात्कार लिया गया: लता मंगेशकर।• प्रश्नोत्तर — यतींद्र मिश्र: पिताजी से संगीत के अलावा आपने और क्या-क्या सीखा। लता मंगेशकर: सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की बात सीखी।• भावनात्मक वातावरण — पिताजी की कंपनी जब तक अच्छी चलती थी, तो हम सब लोग बड़े शान से रहते थे। फिर पिताजी के निधन के बाद हमें यह भी देखना पड़ा कि बुरे हालात में कैसे जीना है?• आमंत्रण, स्वागत और परिचय — दीदी आपके संगीत की अप्रतिम यात्रा पर बातचीत शुरू करते हैं। आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ। मेरे पिताजी कमाल के आदमी थे, जिन्हें मैंने हमेशा अपने काम और संगीत में डूबा हुआ ही देखा।• उत्तर देने की शैली का संकेत — आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है, जो दुनिया ने मुझे दिया है।• विचार और उदाहरण — मेरा कोरस की लड़कियों के साथ अच्छा संबंध था, वो बिल्कुल मेरे घर जैसी थीं। अक्सर वहाँ स्टूडियो में ज्यादा कुर्सियाँ नहीं होती थीं। वे सब बड़े मजे से जमीन पर बैठती थीं और अक्सर मैं भी रेकॉर्डिंग में आकर वहीं जमीन पर बैठकर उन सभी के साथ बातें करती थी।• संस्मरण — आप सुनकर हैरान होंगे कि मैं ऐन दीवाली के दिन तड़के पाँच बजे ही नहा-धोकर बहुत सारे संगीतकारों के घर मिठाई लेकर पहुँच जाती थी।• समापन — हे प्रभु! तुमने जो भी दिया, वह बहुत दिया, दूसरों से कहीं ज्यादा दिया। अपनी कृपा की छाया से जैसे मुझे छाँह दी है, वैसे ही हर एक कलाकार और नेक इन्सानों के ऊपर भी रखना यही प्रार्थना है।
2
"मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।"इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है — क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।
उत्तर:
"मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ" — इस कथन से पता चलता है कि यह साक्षात्कार की शैली का एक औपचारिक संवाद है, आत्मीयता अथवा बातचीत नहीं, क्योंकि प्रस्तुत संवाद में साक्षात्कार लेने वाले व्यक्ति द्वारा पूछे गए सवालों के उत्तर दिए गए हैं।साक्षात्कार कर्ता ने लता जी से ऐसे सवाल पूछे हैं जो उनके प्रशंसक जानना चाहेंगे। लता जी ने संगीत शिक्षा, परिवार, कैरियर, वैचारिक तथ्य इत्यादि से संबंधित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विस्तारपूर्वक दिए। यह शैली साक्षात्कार की ही थी, क्योंकि संवाद में दोनों तरफ से प्रश्नोत्तर शैली का स्वरूप चलता है। साक्षात्कार कर्ता द्वारा पूछे गए प्रश्न निजी जानकारी से संबंधित न होकर इस प्रकार के थे जिसके माध्यम से जाना जा सके कि इतनी ऊँचाइयाँ हासिल करने के पीछे कितना संघर्ष, कितनी मेहनत और कैसी विचारधारा रही है।
आपका साक्षात्कार(1 questions)
1
"आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।"प्रस्तुत पाठ में विश्व प्रसिद्ध व्यक्तित्व का साक्षात्कार दिया गया है। कल्पना कीजिए कि आप भी लता मंगेशकर के इस साक्षात्कार में उपस्थित हैं। आप लता जी से कौन-कौन से अलग प्रश्न पूछते और क्यों?
उत्तर:
वैसे तो साक्षात्कार में प्रस्तुत व्यक्ति के विचार, जीवन के प्रति उनका नज़रिया, उनका संघर्ष और जीत का मंत्र इत्यादि पूछा जाता है। जैसा कि साक्षात्कारकर्ता यतींद्र मिश्र जी ने पूछा। यदि यह अवसर मुझे मिलता तो मैं निम्न प्रश्न और पूछना चाहती:1. आपने हिन्दी और मराठी के अलावा अन्य कौन-कौन-सी भाषाओं में गाना गाया?
2. आपकी माताजी कैसी विचारधारा की महिला थी?
3. आपने विवाह न करने का निर्णय क्यों लिया?
4. आपको अपने द्वारा गाए हुए गानों में सबसे अच्छा गाना कौन-सा लगता है?
5. गाने की रिकॉर्डिंग के समय कभी कोई विशेष वाक्या घटित हुआ हो जो आपको आज भी स्मरण हो तो साझा कीजिए।
6. भाई-बहनों के साथ आपके संबंध बचपन से लेकर बड़े होने तक कैसे रहे?
7. संगीत के संदर्भ में आप अपने प्रशंसकों से क्या कहना चाहेंगी?क्यों – मैं उपर्युक्त प्रश्न इसलिए पूछना चाहूँगी कि इसके माध्यम से हमें लता जी के बारे में और अधिक जानने का अवसर मिलेगा और संगीत से जुड़े लोगों को इन स्मृतियों से प्रेरणा भी मिलेगी।
विषयों से संवाद(2 questions)
1
"एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था।"सन् 1942 में अपने पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर ने अकेले अपनी माँ, छोटे भाई-बहनों की देखभाल की और अपने घर को सँभाला। उस समय उनकी आयु मात्र 13 वर्ष थी। तब महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए लता जी के एक दिन की कल्पना कीजिए। इस भागदौड़ में वे किन-किन चुनौतियों का सामना करती होंगी? (संकेत – भोजन, यात्रा-भाड़ा, सुरक्षा, थकान आदि)
उत्तर:
लता जी के पिताजी का देहांत जब 1942 में हुआ, तब लता जी ने घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उस समय उनकी आयु मात्र 13 वर्ष थी। उन्होंने अपनी माँ और छोटे भाई-बहनों की देखभाल की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। इसी कारण उन्होंने विवाह न करने का भी फैसला लिया। जब तक पिता जीवित थे, तब तक वे बड़ी शान से रहते थे। उनके निधन के बाद उन्होंने जाना कि बुरे हालातों में कैसे जिया जाता है।लता जी ने अपने पिताजी से जो सच्चाई और हिम्मत का गुण पाया था, उसी के कारण वे अपने कंधों को मजबूती दे सकीं। वे सुबह से रात तक स्टूडियो के चक्कर लगाती थीं और बस इतना चाहती थीं कि अपने परिवार के लिए ज्यादा-से-ज्यादा कमा सकें। न तो उन्हें भोजन का समय मिलता था, न आराम का, परंतु फिर भी उन्हें थकान का एहसास नहीं होता था और न ही वे अपनी सुरक्षा अथवा यात्रा-भाड़े का कुछ सोचती थीं। उन्हें अपनी तकलीफों से कोई फर्क नहीं पड़ता था। वे तो बस परिवार के लिए धन कमाने हेतु नए-नए कॉन्ट्रेक्ट खोजती रहती थीं।
2
"पहले के दौर में पुरुष और स्त्री आवाज़ों के कोरस हम लोगों के गीतों के साथ ही रेकॉर्ड होते थे। भले ही वह गाना डुएट हो या फिर कोई सोलो सांग।"अपने घर, आस-पड़ोस, समुदाय, विद्यालय में होने वाले उन कार्यों के विषय में बताइए जिनमें सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है।
उत्तर:
ऐसे अनेक कार्य होते हैं जिनमें विभिन्न स्तरों पर सहयोग की आवश्यकता होती है।घर – घर में प्रायः सभी कार्य आपसी सहयोग से होते हैं, जैसे- धन कमाना, खाना बनाना, सफाई इत्यादि। इसके अतिरिक्त जन्मदिन मनाना, विवाह की वर्षगाँठ मनाना अथवा दुखद परिस्थितियों में भी आपसी सहयोग से कार्य होता है।आस-पड़ोस – कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान, सामूहिक रूप से किसी के सुख-दुख में शामिल होना इत्यादि सामूहिक सहयोग के कार्य होते हैं।समुदाय – समुदाय में प्रायः संचालित करने वाला वर्ग मिलकर प्रत्येक कार्य को रूप देते हैं, जैसे- कोई सांस्कृतिक कार्य का आयोजन, स्वच्छता एवं जागरूकता आयोजन, पर्व इत्यादि हेतु मेले व अन्य कार्यक्रम का आयोजन, स्वास्थ्य संबंधी शिविर इत्यादि का आयोजन। प्रस्तुत सभी कार्य सहयोग से पूर्ण होते हैं।विद्यालय – विद्यालय में तो सभी कार्य सहयोग से होते हैं। अध्यापकों का बच्चों को मिलकर पढ़ाना, अनेक उत्सवों में बच्चों का मिलकर भाग लेना, मिलकर पढ़ना, परीक्षा देना, खेल में भाग लेना इत्यादि।विशेष – देखा जाए तो आपसी सहयोग से ही यह दुनिया चलती है। अकेले व्यक्ति से न तो परिवार निर्मित होगा और न ही विद्यालय, समुदाय या समाज।
शास्त्रीय संगीत(2 questions)
1
"फिर उसमें लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन की भी परंपरा थी।" रागदारी वाले गायन का अर्थ है — भारतीय शास्त्रीय संगीत। आपने इस पाठ में संगीत से जुड़े अनेक शब्दों को पढ़ा है। शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों की सहायता से इनके अर्थ और उदाहरण खोजकर लिखिए:राग, सुर, बंदिश, अभंग, सोहर, फाग, बधावा
उत्तर:
1. राग – (अर्थ) स्वरों की एक ऐसी मधुर रचना जो श्रोता के मन को भावनाओं से रंग देती है; जिसमें अधिकतम 7 स्वर होते हैं। (उदाहरण) राग यमन, राग भैरव, राग दरबारी, राग भूपाली, राग खमाज।2. सुर – (अर्थ) संगीत में स्वर, राग, धुन, मधुर ध्वनि और गायन का स्तर; संगीत में 7 स्वर होते हैं। (उदाहरण) सा, रे, गा, मा, पा, धा, नी।3. बंदिश – (अर्थ) बाँधना या संरचना; किसी विशेष राग और ताल में पिरोई गई गान-रचना। (उदाहरण) राग यमन (त्रिताल), राग भैरव (विलंबित खयाल), राग भूपाली (द्रुत खयाल)।4. अभंग – (अर्थ) अटूट या अखंड काव्यात्मक रूप; भगवान विट्ठल की स्तुति में गाए जाने वाले पद। (उदाहरण) "सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी। कर कटेवरी, ठेवोनिया।"5. सोहर – (अर्थ) उत्तर भारत (बिहार-यूपी) का एक पारंपरिक लोकगीत, मुख्य रूप से बच्चे के जन्म पर गाया जाने वाला बधाई गीत। (उदाहरण) "कौशल्या गावे हो सोहर, बधइया बाजे अवध नगरिया हो।" "नंद घर भइले गुलजार, अंगनबा होरवे मंगल हो।"6. फाग – (अर्थ) फाल्गुन महीने (होली) पर गाए जाने वाले लोकगीत। (उदाहरण) "होली खेलें रघुबीरा अवध में" "खेलें मसाने में होरी दिगंबर।"7. बधावा – (अर्थ) शुभ अवसर पर गाया जाने वाला मांगलिक गीत। (उदाहरण) जन्मोत्सव, विवाह अथवा मांगलिक कार्यों पर गाए जाने वाले सामाजिक गीत, जैसे- "दूजो बद्यायो जेठ घर, तीजो बधायो देवर घर।"
2
"त्योहारों के संदर्भ में एक बात और ध्यान में आती है कि अधिकांश प्रदेशों में पर्वों व अनुष्ठानों से संदर्भित घर-घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।" आपने पढ़ा कि भारत में त्योहारों पर फाग, धमार, सोहर, बधावा, छठ के गीत आदि गाने की परंपरा है। अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले ऐसे गीतों के विषय में अपने घर में पता कीजिए और एक गीत अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
गीत जीवन में हर्षोल्लास के प्रतीक होते हैं, विशेषकर जब घर में जन्मोत्सव अथवा विवाह के शुभ अवसर होते हैं तो ये गीत वातावरण में रंग भर देते हैं।हमारे घर में भी जब बड़ी बहन का विवाह तय हुआ, तो विवाह के दिन मामा जी भात लेकर आए, तब उन्हें दरवाजे पर ही रोक कर पहले उनका तिलक व आरती का कार्यक्रम हुआ, फिर भात का गीत गाया गया, जो इस प्रकार था:नई चाल को भात उढ़इयो मेरे भाइय, ससुर को चाहे जो ले आना, सास है तब तू लहंगा लाईयो भातइया नई चाल...
जेठ को चाहे जो ले आना, जेठानी है नखरेबाज, तू सूट लइयो भातइया नई चाल...
देवर को चाहे जो ले आना, देवरानी है फैशनदार, तू प्लाजो लइयो भातइया नई चाल...
नन्देऊ को चाहे जो ले आना, नंद है गुस्सेबाज, तू जींस लइयो भातइया नई चाल...
साइबर सुरक्षा(1 questions)
1
"आज, जो स्थिति है और जिस तरह हमारी तकनीक विकसित हो चुकी है, उसमें अगर इन लोगों को काम करने का मौका मिलता, तब तो कमाल ही हो गया होता।"आज तकनीकी विकास इतना अधिक हो चुका कि अनेक धोखेबाज / ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके अपनी आवाज़ बदलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि साइबर सुरक्षा नियमों का प्रयोग करते हुए इस प्रकार की धोखाधड़ी से किस प्रकार बचा जा सकता है?
उत्तर:
आज कृत्रिम बुद्धिमता (AI) के आगमन के साथ साइबर अपराध भी बहुत बढ़ गया है। AI के जरिए किसी की शक्ल बनाना, आवाज़ की नकल करना इतना स्वाभाविक लगता है कि असली-नकली पता ही नहीं चल पाता और ऐसे में धोखाधड़ी तेजी से बढ़ती है, जिसमें अपराधी किसी की आवाज़ की नकल करके परिवारवालों से पैसे माँगते हैं। AI का उपयोग करके हमले के कोड को बेहतर बनाया जा रहा है, जिससे डेटा ब्रीच के मामले बढ़े हैं।साइबर सुरक्षा के नियम
1. भारत सरकार ने AI से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं।
2. AI जनरेटेड सामग्री को लेबल करना अनिवार्य है, इसे अब SGI के रूप में मान्यता दी गई है।
3. डिजिटल प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि AI सामग्री उपयोगकर्ता की सहमति से बनाई गई है।
4. धोखाधड़ी के मामले में हेल्पलाइन नंबर 1930 उपलब्ध है।
5. ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए भारत सरकार का आधिकारिक पोर्टल भी उपलब्ध है।बचाव के उपाय
1. किसी वीडियो, फोटो या संदेश पर आँख बंद करके भरोसा न करें।
2. कोई वित्तीय मदद माँगे तो सावधान रहें; यदि वह फोन पर हो तो फोन काट दें।
3. अपने सभी महत्वपूर्ण खातों के लिए MFA (मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) को सक्रिय रखें।
4. सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें।
5. AI-आधारित एंटीवायरस का प्रयोग करें।
ऐसे ही बोलते हैं(2 questions)
1
"वे बस हमको गंभीरता से देखते थे… मगर हम सभी समझ जाते थे कि हमको बुलाया किसलिए गया है।"क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना कुछ बोले सिर्फ नजरों या संकेतों (हाव-भाव) से ही आपको समझा देता है? उस अनुभव के विषय में बताइए।
उत्तर:
हाँ, हमारे पिताजी ऐसे व्यक्ति थे जो हमें डाँटते नहीं थे और जब कभी हम ज्यादा शरारत करते तो बस गुस्से से घूरते थे और हाथ के इशारे से चुपचाप बैठकर पढ़ने के लिए कहते थे। तब हम दोनों बहन-भाई शरारत छोड़कर चुपचाप पढ़ने बैठ जाते। वैसे हमारे पापा हमें बहुत प्यार करते थे। उनकी एक नज़र या इशारा ही हमारे लिए अनुशासन सिखाने के लिए पर्याप्त था।
2
यदि कोई व्यक्ति बिना बोले (संकेत भाषा) आपको कुछ समझा रहा है, तो वह आपके साथ और आप उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे? (संकेत – धैर्य, जिज्ञासा, समानुभूति आदि)
उत्तर:
यदि कोई व्यक्ति बोल नहीं सकता, इस कारण वह अपनी बात इशारों से समझा रहा है, तो हम उससे सहानुभूति रखते हुए धैर्य से उसकी बात को समझने का प्रयास करेंगे। उसके द्वारा कही गई बात को जिज्ञासापूर्वक जानना चाहेंगे। हम उसके साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करेंगे और उसे यकीन दिलाएँगे कि हम उसकी बात समझना चाहते हैं। हम केवल यकीन ही नहीं दिलाएँगे, अपितु उसकी बातों को ध्यानपूर्वक समझेंगे भी।
सृजन(2 questions)
1
"अगर हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर सन् 1949-50 में ले जाएँ।" कल्पना कीजिए कि आपके पास टाइम मशीन है। 1940-50 के दशक में जाकर लता जी से मिलिए और उनके साथ बिताए गए एक दिन का वर्णन डायरी के रूप में लिखिए। उस समय की वेशभूषा, भोजन, संगीत आदि का वर्णन अवश्य कीजिए।
उत्तर:
डायरी लेखन1949-50 का समय जब लता जी से मिली
दिनांक – 15 अप्रैल, 2027
दिन – बृहस्पतिवार
समय – रात्रि – 9 बजेआज का दिन बहुत ही विशेष और यादगार रहा क्योंकि आज मैं टाइम मशीन के जरिए 1950 में पहुँच गया, जहाँ मेरी मुलाकात लता मंगेशकर जी से हुई। उनसे मिलना एक सपने जैसा लग रहा है। आज मैंने लता जी के साथ दो घंटे बिताए और उनके बारे में जाना। उनका व्यक्तित्व बहुत सरल व सादा था। हल्के बॉर्डर के साथ उन्होंने सफेद रंग की साड़ी पहनी हुई थी। उनके चेहरे पर बहुत सादगी थी। वे प्रसन्नमुख होकर मेरे प्रश्नों का उत्तर दे रही थीं। वे सादा भोजन करती थीं। और जहाँ तक संगीत की बात है तो संगीत तो इनकी आत्मा में बसता है। वे बहुत ही मधुर कंठ से गाती थीं।मैं कुछ पल तो उनके संगीत में ही डूबी रही। फिर उनसे उनके बारे में जाना। वे मिठास से भरी एक सरल महिला थीं। उन्होंने मेरे साथ दो घंटे बिताए जो मेरे लिए यादगार बन गए। उनसे बातचीत करने के पश्चात मैंने उनसे विदा ली और भूख शांत करने के लिए एक भोजनालय तलाशा। उस समय सभी लोग बहुत सादी वेशभूषा में प्रसन्नचित्त थे। मैंने थोड़ा-सा भोजन किया और फिर थोड़ी देर बाजार टहलने के पश्चात टाइम मशीन से वापस अपने समय में लौट आया और अब उन बेहतरीन पलों को मैं तुमसे साझा कर रही हूँ।मैं आशा करती हूँ कि उनकी स्मृतियों से जो सीख मुझे मिली है, उसे मैं अपने जीवन में सफलतापूर्वक लागू करूँ और कामयाब बनूँ।
2
"आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।"कल्पना कीजिए कि यह लता जी का अंतिम संदेश है — आप उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया एक अनुच्छेद के रूप में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
अनुच्छेद"आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।"लता जी आज हमारे बीच नहीं है, परंतु उनकी मधुर आवाज़ ने उन्हें आज भी हम सबके बीच जिंदा रखा है। उनकी आवाज़ ही उनकी पहचान है। वे अपने प्रशंसकों को कहती थीं कि "आप लोगों का मुझे अमर मानना, सही मायने में आप सबका मेरे प्रति प्रेम है।" संगीत की दुनिया में लता जी ने मात्र 5 वर्ष की आयु से ही कदम रख दिया था और फिर संगीत के रास्ते पर वे निरंतर अग्रसर रहीं। संगीत तो उनकी नस-नस में बहता था। उनके द्वारा गाया हुआ गाना सुनने वाले के दिल में उतर जाता था।वे स्वभाव की भी सरल व सहज थीं। परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के कारण उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया। वे अपने सहयोगियों के साथ भी प्रेमपूर्वक रहती थीं। उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य था अधिक धन कमाकर अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाना। उन्होंने अनेक उतार-चढ़ाव व संघर्षों के मार्ग को पूरा कर परिवार के प्रति अपने उत्तरदायित्व को पूरा किया। श्रोताओं के मुख से मिली प्रशंसा लता जी के लिए अनमोल थी। इसी कारण वे प्राप्त प्रशंसा को अमर होने के समान मानती थीं। वे सचमुच अमर हो गईं। आज वह भले ही जीवित नहीं हैं, परंतु गानों में मौजूद उनकी आत्मा आज भी उनकी मौजूदगी को अमर बनाती है।
व्याकरण की बात — मुहावरे(1 questions)
1
"मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं पसारना है।"उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित अंश मुहावरा है। 'हाथ पसारना या फैलाना' का अर्थ है — कुछ माँगना या याचना करना। हाथों से जुड़े अनेक मुहावरे आपने पढ़े और सुने होंगे। ऐसे ही कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए:• हाथ में आना • हाथ का मैल होना • हाथ से हाथ मिलाना • हाथ साफ करना • हाथ से निकल जाना • हाथ धो बैठना
उत्तर:
• हाथ में आना – कब्जे में आना।
वाक्य: बहुत कोशिशों के बाद आखिरकार चोर पुलिस के हाथों में आ ही गया।• हाथ का मैल होना – आसानी से मिलने वाली वस्तु।
वाक्य: मेहनती व्यक्ति के लिए सफलता हाथ का मैल है।• हाथ से हाथ मिलाना – समझौता करना।
वाक्य: दोनों कंपनियों के मालिक ने नई परियोजना हेतु हाथ से हाथ मिलाया है।• हाथ साफ करना – चोरी करना / हड़प लेना।
वाक्य: चोर ने जुलूस का लाभ उठाकर बहुत से लोगों की जेब पर हाथ साफ कर दिया।• हाथ से निकल जाना – नियंत्रण से बाहर होना।
वाक्य: समय रहते पढ़ाई कर लो वरना मौका हाथ से निकल जाएगा।• हाथ धो बैठना – किसी वस्तु, व्यक्ति अथवा अवसर को हमेशा के लिए खो देना।
वाक्य: लापरवाही के कारण आज उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा।
हमारी भाषाएँ(3 questions)
1
"'गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन'। मतलब गाँव तो बह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है।" आपने एक कहावत और उसका हिंदी में अर्थ पढ़ा। इस कहावत के अर्थ को अपने घर या क्षेत्र की भाषा अथवा भाषाओं में लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त कहावत को पंजाबी और यू.पी. की भाषा में इस प्रकार कहेंगे:1. पंजाबी – "पिंड गया तां नाव वी गई" या "बेला लंघ गया, मौका वी लंघ गया"2. यू.पी. (पूर्वांचल / देहाती भाषा) – "गाँव गवा दिहल, नावो छूट गइली"3. गढ़वाली – "बखत ग्यो, मौका भी भी ग्यो"
2
लता जी ने मराठी कहावत को हिंदी में समझाया। अब आप अपनी मातृभाषा की कोई कहावत चुनिए और उसका हिंदी में अनुवाद कीजिए। अनुवाद के बाद भाव में क्या परिवर्तन आया? लिखिए।
उत्तर:
1. पंजाबी कहावत "जिहड़ा बोवे ओह ही काटे" – अर्थ: जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।2. पहाड़ी कहावत "बखत पै काम, बाद में नाम" – अर्थ: समय पर काम करना जरूरी है, तभी सम्मान मिलता है।3. यू.पी. कहावत "जैसा करब, वैसा भरब" – अर्थ: जैसा करोगे, वैसा फल पाओगे।4. भोजपुरी "जाके पाँव ना फाटे बिवाई, ऊ का जाने पीर पराई" – अर्थ: जिसने स्वयं दुख नहीं झेला, वह दूसरों का दर्द समझ नहीं सकता।5. राजस्थानी "घर रो भेदी लंका ढाए" – अर्थ: अपना ही व्यक्ति नुकसान कर देता है।6. पंजाबी "जित्थे दी खोती, ओथ्थे आ खलोती" – अर्थ: गलत व्यक्ति वहीं जाकर रुकता है जहाँ उसकी जगह होती है।7. बुंदेलखंडी "धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय" – अर्थ: धैर्य रखने से ही काम सफल होता है।8. गढ़वाली "एक हाथ से ताली नि बजदी" – अर्थ: किसी भी बात में दोनों पक्षों की भूमिका होती है।भाव में परिवर्तन – अनुवाद करने पर केवल भाषा बदलती है, परंतु कहावत का मूल भाव और शिक्षा यथावत रहती है।
3
एक 'सेतु चित्र' बनाइए जिसमें दो किनारे हों — एक किनारे पर हिंदी और दूसरे किनारे पर अपने घर या क्षेत्र की भाषा। दोनों किनारों के बीच में ऐसे शब्द लिखिए जो दोनों भाषाओं में समान अर्थ रखते हैं।
उत्तर:
सेतु चित्र – कागज पर एक पुल (सेतु) बनाइए। एक किनारे पर 'हिंदी' और दूसरे किनारे पर अपने घर/क्षेत्र की भाषा लिखिए। पुल के बीच में दोनों भाषाओं के समान अर्थ वाले शब्द लिखिए, जैसे:• पानी – पाणी
• माँ – माता / अम्मा
• घर – गृह / घर
• आँख – अख / नयन
• नाम – नाव / नालो / नांउ
• सूरज – सूर्य / भानु
• चाँद – चंद्रमा / माहइस प्रकार सेतु चित्र दर्शाता है कि हमारी भाषाओं में कितनी गहरी समानता है।
गतिविधियाँ(6 questions)
1
'नाम रह जाएगा' वाक्य के लिए एक सुंदर पोस्टर बनाइए। इसके ऊपर 'नाम रह जाता है..' लिखिए और नीचे विभिन्न भारतीय भाषाओं में 'नाम' शब्द (जैसे- नाव, नालो, नांउ, नाउँ, मिङ, पेरु, नामम् आदि) लिखिए। साथ ही कक्षा में सब विद्यार्थी मिलकर एक प्रतिज्ञा लें — 'हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।'
उत्तर:
पोस्टर गतिविधि – कागज पर एक रंगीन पोस्टर बनाइए। पोस्टर के ऊपर बड़े अक्षरों में लिखिए — "नाम रह जाता है..." और नीचे विभिन्न भारतीय भाषाओं में 'नाम' शब्द लिखिए — नाव, नालो, नांउ, नाउँ, मिङ, पेरु, नामम् आदि।इसके बाद पूरी कक्षा मिलकर प्रतिज्ञा लें — "हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।" यह गतिविधि भारतीय भाषाओं की विविधता और एकता का संदेश देती है।
2
कागज पर एक पेड़ का चित्र बनाइए। इसे नाम दीजिए — 'भाषा-वृक्ष'। इसकी जड़ में लिखिए — 'भारतीय संस्कृति'; तने पर और शाखाओं पर लिखिए — हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि। हर शाखा पर उस भाषा का एक प्यारा शब्द जोड़िए।
उत्तर:
भाषा-वृक्ष गतिविधि – कागज पर एक बड़ा पेड़ बनाइए। इसकी जड़ में 'भारतीय संस्कृति' लिखिए, जो दर्शाता है कि सभी भाषाएँ एक ही संस्कृति से निकली हैं। तने पर और शाखाओं पर हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि भाषाओं के नाम लिखिए। हर शाखा पर उस भाषा का एक प्यारा शब्द जोड़िए, जैसे- हिंदी: माँ, तमिल: अम्मा, बांग्ला: माँ, गुजराती: माँ। इस प्रकार यह चित्र भाषाओं की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत करता है।
3
समूह में मिलकर किसी विषय पर एक छोटा समाचार बुलेटिन तैयार कीजिए जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और किसी क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग हो। उदाहरण के लिए, एक विषय हो सकता है — 'कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं।'
उत्तर:
समाचार बुलेटिननमस्कार! आज की खास खबर कला जगत से — "कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं"। हाल ही में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों के कलाकारों ने अपनी-अपनी कला प्रस्तुत की। इस ईवेंट में पेंटिंग, म्यूजिक और डांस के माध्यम से एकता का मैसेज दिया गया। एक कलाकार ने कहा — "Art connects people beyond language", वहीं एक पंजाबी कलाकार ने कहा — "कला दिलाँ नूं जोड़दी ऐ, बँडदी नहीं" (कला दिलों को जोड़ती है, बाँटती नहीं)।कार्यक्रम में यह भी देखा गया कि भाषा अलग होने के बावजूद, भावनाएँ सबकी एक जैसी थीं। संदेश साफ है — कला एक ऐसी शक्ति है जो हमें एक साथ लाती है, न कि अलग करती है। धन्यवाद!
4
भाषाई स्मृति पोटली — अपने परिवार में प्रयुक्त अलग-अलग भाषाओं के पाँच शब्द एकत्र कीजिए (जैसे- दादी मराठी बोलती हों, माँ हिंदी)। उन्हें एक 'शब्द पोटली' में कार्ड पर सजाइए।
उत्तर:
शब्द पोटली गतिविधि – अपने परिवार के सदस्यों से उनकी भाषा के पाँच शब्द एकत्र कीजिए, जैसे- दादी मराठी बोलती हैं, माँ हिंदी, पिताजी पंजाबी। प्रत्येक शब्द को एक छोटे कार्ड पर उस भाषा और अर्थ के साथ लिखकर एक पोटली/थैले में सजाइए। यह गतिविधि परिवार की भाषाई विरासत को संजोने में सहायक है।
5
स्वर-कोलाज गतिविधि कीजिए।
उत्तर:
स्वर-कोलाज गतिविधि – अखबारों, पत्रिकाओं या इंटरनेट से विभिन्न भारतीय भाषाओं के स्वर/अक्षर काटकर एकत्र कीजिए और उन्हें एक कागज पर रचनात्मक ढंग से चिपकाकर रंगीन कोलाज बनाइए। यह कोलाज हमारी भाषाओं के मधुर स्वरों की विविधता को प्रस्तुत करता है।
6
समय-रेखा — लता जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ कालानुक्रम में दर्शाइए।
उत्तर:
लता मंगेशकर जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का कालानुक्रम:• 1929 : 28 सितंबर को इंदौर में जन्म
• 1942 : पिता के निधन के बाद कम उम्र (13 वर्ष) में गायन शुरू
• 1949 : फिल्म 'महल' के गीत — "आएगा आने वाला" से बड़ी सफलता एवं पहचान
• 1950-60 : हिंदी सिनेमा की सबसे प्रमुख पार्श्व गायिका बनीं; मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार जैसे महान गायकों के साथ काम
• 1963 : देशभक्ति गीत "ए मेरे वतन के लोगो" — जिसे सुनकर जवाहरलाल नेहरू भावुक हो गए
• 1969 : पदम भूषण से सम्मानित
• 1989 : दादा साहब फाल्के पुरस्कार
• 2001 : भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' मिला
• 2022 : 6 फरवरी को निधननिष्कर्ष – लता जी का जीवन संगीत, समर्पण और सफलता का अद्भुत उदाहरण है। उनकी आवाज़ आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।